22 जुलाई 2026
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कल्याण बनर्जी निलंबन: टीएमसी ने नियम 374(2) पर उठाए सवाल, लोकसभा अध्यक्ष अगले दिन सुनाएंगे फैसला

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कल्याण बनर्जी निलंबन: टीएमसी ने नियम 374(2) पर उठाए सवाल, लोकसभा अध्यक्ष अगले दिन सुनाएंगे फैसला

सारांश

मानसून सत्र में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी का शेष सत्र-भर निलंबन विवाद का केंद्र बन गया है। टीएमसी का कहना है कि घटना स्थगित सदन में हुई थी, इसलिए नियम 374(2) लागू नहीं होता। लोकसभा अध्यक्ष अगले दिन फैसला सुनाएंगे।

मुख्य बातें

टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी को 22 जुलाई को संसद के पूरे शेष मानसून सत्र के लिए निलंबित किया गया।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि निलंबन का आधार बनी घटना सदन की कार्यवाही स्थगित रहने के दौरान हुई थी, इसलिए नियम 374(2) लागू नहीं होता।
कल्याण बनर्जी को न पूर्व नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला — टीएमसी का आरोप।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि निलंबन प्रस्ताव सत्ता पक्ष की ओर से आया है और वे अगले दिन फैसला सुनाएंगे।
भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने विपक्ष पर शर्तें बदलकर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।

संसद के मानसून सत्र में 22 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी के निलंबन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो गया। टीएमसी ने निलंबन की प्रक्रिया को संसदीय नियमों के विरुद्ध बताते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया है।

निलंबन का घटनाक्रम

टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने बताया कि दोपहर करीब दो बजे सदन में हंगामे के बीच कार्यवाहक सभापति ने एक नोटिस पढ़कर कल्याण बनर्जी को पूरे शेष मानसून सत्र के लिए निलंबित करने की घोषणा की। उनके अनुसार, सदन में शोर-शराबे के कारण अधिकांश सांसद यह समझ ही नहीं पाए कि सभापति क्या कह रहे थे।

रॉय ने स्पष्ट किया कि निलंबन का कथित आधार कल्याण बनर्जी और सांसद मिताली बाग के बीच हुई बहस है, जो उस समय हुई जब सदन की कार्यवाही स्थगित थी, माइक बंद थे और पीठासीन अधिकारी भी मौजूद नहीं थे। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी परिस्थितियों में हुई घटना को सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

नियम 374(2) पर विवाद

सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी को न तो कोई पूर्व नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। उनके अनुसार, नियम 374(2) उस स्थिति में लागू नहीं होता जब सदन की कार्यवाही स्थगित हो। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही मानसून सत्र में सरकार के रवैये को लेकर नाराज है।

इस संबंध में रॉय ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की। अध्यक्ष ने कहा कि निलंबन का प्रस्ताव सत्ता पक्ष की ओर से आया है, इसलिए वे इस विषय पर उनसे चर्चा करेंगे और अगले दिन अपना निर्णय सुनाएंगे।

भाजपा का पक्ष

भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने कहा कि राजनीति में उतार-चढ़ाव और मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत शत्रुता में नहीं बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।

देव ने यह भी कहा कि यदि बार-बार मुद्दे और शर्तें बदली जाएंगी तो सदन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ पाएगी। उनके अनुसार, पहले विपक्ष ने चर्चा की मांग की, जिस पर सरकार और पीठासीन अधिकारी दोनों सहमत हो गए, लेकिन बाद में विपक्ष ने पहले इस्तीफे की शर्त जोड़ दी।

छात्रों की आवाज़ और संसदीय दायित्व

सुष्मिता देव ने जोर देते हुए कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों की चिंता करता है, तो उसे सदन में चर्चा में भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र सीधे संसद में अपनी बात नहीं रख सकते, इसलिए उनकी आवाज़ सांसदों के माध्यम से ही सदन तक पहुँचती है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मानसून सत्र में निलंबन को लेकर विवाद उठा हो — पिछले कई सत्रों में भी इसी तरह के टकराव सामने आए हैं। लोकसभा अध्यक्ष के अगले दिन के फैसले पर अब सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह पीठासीन अधिकारियों की प्रक्रियागत जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है। दूसरी ओर, भाजपा का यह तर्क कि विपक्ष बार-बार शर्तें बदलता है, मानसून सत्र की उस व्यापक समस्या को दर्शाता है जहाँ कार्यवाही बहस की बजाय टकराव में तब्दील हो जाती है। लोकसभा अध्यक्ष का अगले दिन का फैसला न केवल इस मामले की दिशा तय करेगा, बल्कि आने वाले सत्रों में निलंबन प्रक्रिया की व्याख्या के लिए एक मिसाल भी बनेगा।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कल्याण बनर्जी को संसद से निलंबित क्यों किया गया?
कल्याण बनर्जी को 22 जुलाई को मानसून सत्र के शेष भाग के लिए निलंबित किया गया। कार्यवाहक सभापति ने सदन में हंगामे के बीच यह घोषणा की। निलंबन का कथित आधार उनकी और सांसद मिताली बाग के बीच हुई बहस बताई जा रही है।
टीएमसी ने नियम 374(2) पर क्या आपत्ति जताई है?
टीएमसी सांसद सौगत रॉय के अनुसार, नियम 374(2) तभी लागू होता है जब सदन की कार्यवाही चल रही हो। कथित घटना उस समय हुई जब सदन स्थगित था, माइक बंद थे और पीठासीन अधिकारी मौजूद नहीं थे, इसलिए यह नियम यहाँ लागू नहीं होता।
लोकसभा अध्यक्ष ने इस मामले में क्या कहा?
लोकसभा अध्यक्ष ने सौगत रॉय से मुलाकात के बाद कहा कि निलंबन का प्रस्ताव सत्ता पक्ष की ओर से आया है। उन्होंने कहा कि वे इस विषय पर सत्ता पक्ष से चर्चा करेंगे और अगले दिन अपना निर्णय सुनाएंगे।
भाजपा ने संसद के गतिरोध पर क्या रुख अपनाया?
भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने कहा कि विपक्ष पहले चर्चा की मांग करता है, फिर इस्तीफे की शर्त जोड़ देता है, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित होती है। उन्होंने सभी दलों से संसदीय मर्यादा बनाए रखने और बहस के ज़रिए समस्याओं का समाधान निकालने का आग्रह किया।
टीएमसी ने निलंबन पर क्या मांग रखी है?
टीएमसी ने कल्याण बनर्जी का निलंबन तत्काल वापस लेने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि न तो उन्हें पूर्व नोटिस दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का मौका मिला, जो संसदीय प्रक्रिया के विरुद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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