कर्नाटक तटीय और मलनाड पर्यटन नीति: 7 सितंबर तक ड्राफ्ट, मंत्री केजे जॉर्ज ने की समीक्षा बैठक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के ऊर्जा और पर्यटन मंत्री केजे जॉर्ज ने शुक्रवार, 21 अगस्त को बेंगलुरु के विधान सौधा में तटीय और मलनाड क्षेत्रों के चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में कर्नाटक की प्रस्तावित तटीय-मलनाड पर्यटन नीति के ड्राफ्ट पर विस्तार से चर्चा हुई, जिसे 7 सितंबर 2026 तक तैयार किए जाने की उम्मीद जताई गई है। यह नीति इन इलाकों की अनछुई पर्यटन क्षमता को व्यवस्थित रूप से विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार का एक ठोस कदम है।
नीति की ज़रूरत क्यों पड़ी
तटीय कर्नाटक और मलनाड क्षेत्र अपने समुद्र तटों, धार्मिक व सांस्कृतिक स्थलों, घने जंगलों और प्राकृतिक विविधता के लिए जाने जाते हैं। बावजूद इसके, पर्यटन निवेश की गति धीमी रही है। कथित तौर पर इसकी एक बड़ी वजह कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ), इको-सेंसिटिव क्षेत्रों और वन विभाग के नियमों से जुड़ी मंजूरी प्रक्रियाओं की जटिलता है। इसके अलावा, तटीय कर्नाटक के कुछ हिस्सों को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील माना जाता रहा है, जहाँ अतीत में तनाव और हिंसा की घटनाएँ भी दर्ज हुई हैं। सरकार का मानना है कि पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर इन चुनौतियों का भी आंशिक समाधान हो सकता है।
बैठक में उठे मुद्दे और सुझाव
विधायक वी. सुनील कुमार ने तटीय क्षेत्र में पर्यटन निवेश को सुगम बनाने के लिए सिंगल-विंडो सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव रखा। उनका तर्क था कि विभिन्न विभागों के बीच मंजूरी और समन्वय के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र निवेशकों को आकर्षित करेगा और पर्यटन विकास की रफ्तार बढ़ाएगा।
मंगलुरु जिले के प्रभारी मंत्री यूटी खादर ने कहा कि तटीय क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं, लेकिन CRZ, इको-सेंसिटिव ज़ोन और वन विभाग के नियम कई परियोजनाओं के लिए बाधा बने हुए हैं। उन्होंने मंजूरी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और साथ ही पर्यावरण सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
उडुपी जिले के प्रभारी मंत्री रिजवान अरशद ने होटल उद्योग और अन्य पर्यटन गतिविधियों के लिए अनुकूल माहौल बनाने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने सुझाया कि नीति में पर्यटकों की माँग और गतिविधियों की प्रकृति के अनुरूप परिचालन समय व अन्य प्रावधानों को शामिल किया जाए।
बैठक में शामिल प्रमुख प्रतिनिधि
बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. राम प्रसाद मनोहर के अलावा कैप्टन बृजेश छोटा, कोटे श्रीनिवास पुजारी, मंजूनाथ भंडारी, इवान डिसूजा, हरीश पूंजा, उमानाथ ए. कोटियन, भरत शेट्टी वाई., डी. वेदव्यास कामथ, राजेश नाइक यू., भागीरथी मुरुल्या, अशोक कुमार राय, गुरुराज शेट्टी गंतिहोले, ए. किरण कुमार कोडगी, यशपाल सुवर्णा और गुरमे सुरेश शेट्टी सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की राह
मंत्री जॉर्ज ने स्पष्ट किया कि चुने हुए प्रतिनिधियों से प्राप्त सभी सुझावों की सूक्ष्मता से जाँच की जाएगी और उन्हें ड्राफ्ट नीति में समुचित स्थान दिया जाएगा। उन्होंने कहा, "तटीय और मलनाड क्षेत्र कर्नाटक की पर्यटन संपत्तियों में अहम हैं। इनकी पर्यटन क्षमता का पूरा लाभ उठाने के लिए हमें एक ऐसी व्यापक नीति की जरूरत है जो स्थानीय जरूरतों और चुने हुए प्रतिनिधियों के सुझावों को ध्यान में रखे।" नीति को अंतिम रूप देने से पहले और परामर्श प्रक्रियाएँ होंगी। इसके साथ ही, प्रस्तावित नीति की समीक्षा और आगे के निर्णय के लिए जल्द ही मंगलुरु में कैबिनेट की बैठक आयोजित होने की उम्मीद है। यदि नीति समयसीमा में तैयार होती है और सिंगल-विंडो जैसे सुधार लागू होते हैं, तो यह तटीय कर्नाटक में पर्यटन निवेश का एक नया अध्याय खोल सकती है।