23 सितंबर 2026
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कर्नाटक विधान परिषद में हंगामा: CM शिवकुमार की ₹15 लाख की शॉल पर BJP-कांग्रेस में तीखी झड़प

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कर्नाटक विधान परिषद में हंगामा: CM शिवकुमार की ₹15 लाख की शॉल पर BJP-कांग्रेस में तीखी झड़प

सारांश

सूखाग्रस्त कर्नाटक में ₹15 लाख की शॉल बन गई राजनीतिक अखाड़े का केंद्र — BJP एमएलसी केएस नवीन के तंज और कांग्रेस एमएलसी रवि के पलटवार ने विधान परिषद को हंगामे में डाल दिया। अध्यक्ष को सदन स्थगित करना पड़ा।

मुख्य बातें

BJP एमएलसी केएस नवीन ने आरोप लगाया कि CM डीके शिवकुमार ने सूखे के दौरान ₹15 लाख की शॉल पहनी थी।
नवीन की हरी शॉल पर कांग्रेस एमएलसी एस.
रवि की व्यंग्यात्मक टिप्पणी से 23 सितंबर 2026 को कर्नाटक विधान परिषद में हंगामा हुआ।
शहरी विकास मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया और मुजराई मंत्री केएस बसवंतप्पा ने हस्तक्षेप कर नवीन से व्यक्तिगत टिप्पणी से बचने को कहा।
परिषद अध्यक्ष सलीम अहमद ने विवादित बहस को रिकॉर्ड न करने का निर्देश दिया और सदन को स्थगित किया।
रवि ने बचाव में PM नरेंद्र मोदी के कथित सोने के धागों वाले सूट का उल्लेख कर विवाद को राष्ट्रीय स्तर तक खींचा।

कर्नाटक विधान परिषद में बुधवार, 23 सितंबर 2026 को उस समय जोरदार हंगामा हुआ जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एमएलसी केएस नवीन ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने राज्य में सूखे की स्थिति के बीच ₹15 लाख की महँगी शॉल पहनी थी। इसके साथ ही कांग्रेस एमएलसी एस. रवि द्वारा नवीन की हरी शॉल पर की गई व्यंग्यात्मक टिप्पणी ने सदन में दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक को और तेज़ कर दिया।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

केएस नवीन किसानों की समस्याओं के प्रतीक के रूप में हरी शॉल पहनकर परिषद में बोलने के लिए उठे थे। इस पर मुख्यमंत्री शिवकुमार के रिश्तेदार और कांग्रेस एमएलसी एस. रवि ने तंज कसते हुए कहा कि नवीन का यह हावभाव महज दिखावा था और उन्हें शॉल उतारकर बोलना चाहिए था।

रवि की इस टिप्पणी पर नवीन ने तीखा पलटवार किया। नवीन ने कहा, 'मैं किसानों की परेशानियों को दर्शाने के लिए यह शॉल पहनता हूँ। उनकी समस्याओं को प्रतिबिंबित करने के लिए मैंने यह शॉल पहनी है। मैं सत्र में ₹15 लाख की शॉल पहनकर नहीं आऊँगा।'

कांग्रेस की आपत्ति और मंत्रियों का हस्तक्षेप

जब नवीन ने मुख्यमंत्री की महँगी शॉल का उल्लेख किया, तो कांग्रेस के सदस्यों ने एकजुट होकर आपत्ति दर्ज कराई। शहरी विकास मंत्री यतींद्र सिद्धारमैया और मुजराई मंत्री केएस बसवंतप्पा ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए नवीन से व्यक्तिगत टिप्पणियों से परहेज़ करने का आग्रह किया।

सदन में दोनों पक्षों के सदस्य एक-दूसरे के विरुद्ध नारे लगाने लगे, जिससे कार्यवाही पूरी तरह बाधित हो गई।

रवि का पलटवार और PM मोदी का ज़िक्र

कांग्रेस एमएलसी एस. रवि ने बाद में अपनी टिप्पणी का बचाव करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री शिवकुमार दिखावे के लिए महँगी शॉल नहीं पहनते। रवि ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व में करोड़ों रुपए के सोने के धागों वाला सूट पहना था।

रवि ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी नवीन के हरे शॉल को 'कृत्रिम' बताने पर केंद्रित थी, न कि किसी व्यक्तिगत हमले के रूप में।

अध्यक्ष का हस्तक्षेप और स्थगन

परिषद अध्यक्ष सलीम अहमद ने हस्तक्षेप करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि गरमागरम बहस के दौरान हुई तीखी नोकझोंक को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज न किया जाए। कार्यवाही पूरी तरह बाधित होने पर अध्यक्ष ने व्यवस्था बहाल करने के लिए परिषद को स्थगित कर दिया।

आगे क्या होगा

यह घटना कर्नाटक में सूखे के संकट के बीच शासन और नेताओं की जीवनशैली को लेकर राजनीतिक बहस को नई धार देती है। BJP के ₹15 लाख की शॉल वाले आरोप और कांग्रेस के पलटवार से स्पष्ट है कि आगामी सत्रों में भी यह मुद्दा सदन की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई में यह सूखाग्रस्त कर्नाटक में शासन और नेताओं की जीवनशैली के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है। BJP का यह हमला किसान-पीड़ा के प्रतीक के रूप में चतुराई से तैयार किया गया है, लेकिन कांग्रेस का PM मोदी के सोने के सूट वाला पलटवार बताता है कि दोनों दल इस मुद्दे को व्यापक 'अमीर नेता बनाम आम जनता' की कथा में ढालने की कोशिश कर रहे हैं। जो बात मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर छूट जाती है वह यह है कि असली सवाल — सूखा राहत और किसान नीति — इस नाटकीय शॉल-युद्ध में दब गया।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक विधान परिषद में ₹15 लाख की शॉल को लेकर विवाद क्या है?
BJP एमएलसी केएस नवीन ने आरोप लगाया कि CM डीके शिवकुमार ने राज्य में सूखे के दौरान ₹15 लाख की शॉल पहनी थी। यह टिप्पणी कांग्रेस एमएलसी एस. रवि द्वारा नवीन की हरी शॉल को 'दिखावटी' कहने के बाद सामने आई, जिससे 23 सितंबर 2026 को परिषद में जोरदार हंगामा हुआ।
BJP एमएलसी केएस नवीन ने हरी शॉल क्यों पहनी थी?
केएस नवीन के अनुसार, उन्होंने हरी शॉल किसानों की परेशानियों और उनकी समस्याओं के प्रतीक के रूप में पहनी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे महँगी शॉल पहनकर सदन में नहीं आते।
कांग्रेस एमएलसी एस. रवि ने अपनी टिप्पणी का बचाव कैसे किया?
रवि ने कहा कि CM शिवकुमार दिखावे के लिए महँगी शॉल नहीं पहनते और उनकी टिप्पणी नवीन के हरे शॉल को 'कृत्रिम' बताने पर केंद्रित थी। उन्होंने PM नरेंद्र मोदी के पूर्व में पहने कथित सोने के धागों वाले सूट का भी उल्लेख किया।
परिषद अध्यक्ष ने इस हंगामे पर क्या कार्रवाई की?
परिषद अध्यक्ष सलीम अहमद ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गरमागरम बहस के दौरान हुई नोकझोंक को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज न किया जाए। कार्यवाही पूरी तरह बाधित होने पर उन्होंने व्यवस्था बहाल करने के लिए सदन को स्थगित कर दिया।
यह विवाद कर्नाटक की राजनीति में क्यों अहम है?
यह घटना कर्नाटक में चल रहे सूखे के संकट की पृष्ठभूमि में हुई है, जहाँ किसान राहत एक संवेदनशील मुद्दा है। BJP इस मामले को CM की जीवनशैली और किसान-पीड़ा के बीच के अंतर के रूप में उठा रही है, जबकि कांग्रेस इसे केंद्र सरकार के खिलाफ पलटने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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