जयपुर में करणी सेना पर वाटर कैनन, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े; सवर्ण न्याय यात्रा का क्लाइमेक्स
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर में 3 अगस्त 2026 को श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के हजारों समर्थकों ने कलवार रोड से जिला कलेक्ट्रेट की ओर मार्च किया, जिस पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स हटा दिए और जोतवाड़ा-पानीपेच मार्ग से कलेक्ट्रेट की ओर अपना जुलूस जारी रखा। यह प्रदर्शन यूजीसी के हालिया फैसलों को वापस लेने और सवर्ण समुदाय से जुड़ी माँगों को लेकर बुलाया गया था।
मुख्य घटनाक्रम
प्रदर्शनकारी रावण गेट पर एकत्रित हुए और करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में पानीपेच मार्ग से आगे बढ़ने लगे। कलवार पुलिया के पास पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर जुलूस रोकने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव हो गया।
पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का उपयोग किया। कथित तौर पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने वाटर कैनन वाहन की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद भी प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाकर मार्च जारी रखा और चोमू पुलिया इलाके तक पहुँच गए।
पुलिस की तैयारी और तैनाती
अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए चोमू पुलिया के पास अतिरिक्त बैरिकेड्स लगाए। स्पेशल टास्क फोर्स के जवानों सहित भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कड़ी निगरानी जारी रही, हालाँकि प्रदर्शनकारियों ने रोकने की कोशिशों के बावजूद अपना मार्च नहीं रोका।
सवर्ण न्याय यात्रा की पृष्ठभूमि
यह प्रदर्शन महिपाल सिंह मकराना की शुरू की गई 'सवर्ण न्याय यात्रा' का अंतिम और निर्णायक चरण था। मकराना ने करीब 24 दिन पहले जयपुर से बीकानेर के देशनोक तक यात्रा शुरू की थी, जो बाद में सवर्ण न्याय यात्रा में बदल गई और रविवार, 2 अगस्त को जयपुर पहुँची।
गौरतलब है कि यात्रा के अंतिम चरण में मकराना शनिवार को बीमार पड़ गए और कुछ देर के लिए बेहोश भी हो गए। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के बावजूद उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर यात्रा जारी रखी। रविवार रात हजारों समर्थकों ने गोविंदपुरा से बजरंग द्वार तक मशाल जुलूस में हिस्सा लिया।
प्रदर्शन का दायरा और माँगें
आयोजकों के अनुसार, इस रैली में 24 राज्यों के लोगों ने हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में समर्थक निजी वाहनों और बसों से जयपुर पहुँचे। मार्च का उद्देश्य जिला कलेक्टर के कार्यालय में ज्ञापन सौंपना था, जिसमें यूजीसी के हालिया फैसलों को वापस लेने और उच्च जाति समुदाय से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की माँग शामिल थी।
आगे की स्थिति
जुलूस के चोमू पुलिया तक पहुँचने पर स्थिति तनावपूर्ण बनी रही, लेकिन पुलिस की कड़ी निगरानी में रही। प्रशासन और करणी सेना के बीच आगे की बातचीत की संभावना बनी हुई है। यह देखना होगा कि सरकार इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है।