3 अगस्त 2026
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जयपुर में करणी सेना पर वाटर कैनन, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े; सवर्ण न्याय यात्रा का क्लाइमेक्स

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जयपुर में करणी सेना पर वाटर कैनन, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े; सवर्ण न्याय यात्रा का क्लाइमेक्स

सारांश

जयपुर में करणी सेना की 'सवर्ण न्याय यात्रा' का क्लाइमेक्स तनावपूर्ण रहा — पुलिस ने वाटर कैनन चलाई, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और मार्च जारी रखा। 24 राज्यों से आए समर्थकों के साथ महिपाल सिंह मकराना का यह आंदोलन यूजीसी फैसलों और सवर्ण माँगों पर सरकार को सीधी चुनौती है।

मुख्य बातें

जयपुर में 3 अगस्त 2026 को श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शनकारियों ने कलवार पुलिया और चोमू पुलिया के पास पुलिस बैरिकेड्स हटा दिए और मार्च जारी रखा।
रैली का नेतृत्व करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने किया, जो स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद व्हीलचेयर पर यात्रा में शामिल रहे।
आयोजकों के अनुसार रैली में 24 राज्यों के समर्थकों ने हिस्सा लिया।
प्रदर्शन यूजीसी के हालिया फैसलों को वापस लेने और सवर्ण समुदाय की माँगों को लेकर बुलाई गई 'सवर्ण न्याय यात्रा' का हिस्सा था।
स्पेशल टास्क फोर्स सहित भारी पुलिस बल तैनात, स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में रही।

जयपुर में 3 अगस्त 2026 को श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना के हजारों समर्थकों ने कलवार रोड से जिला कलेक्ट्रेट की ओर मार्च किया, जिस पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के बैरिकेड्स हटा दिए और जोतवाड़ा-पानीपेच मार्ग से कलेक्ट्रेट की ओर अपना जुलूस जारी रखा। यह प्रदर्शन यूजीसी के हालिया फैसलों को वापस लेने और सवर्ण समुदाय से जुड़ी माँगों को लेकर बुलाया गया था।

मुख्य घटनाक्रम

प्रदर्शनकारी रावण गेट पर एकत्रित हुए और करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के नेतृत्व में पानीपेच मार्ग से आगे बढ़ने लगे। कलवार पुलिया के पास पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर जुलूस रोकने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव हो गया।

पुलिस ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का उपयोग किया। कथित तौर पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने वाटर कैनन वाहन की ओर बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद भी प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाकर मार्च जारी रखा और चोमू पुलिया इलाके तक पहुँच गए।

पुलिस की तैयारी और तैनाती

अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करते हुए चोमू पुलिया के पास अतिरिक्त बैरिकेड्स लगाए। स्पेशल टास्क फोर्स के जवानों सहित भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की कड़ी निगरानी जारी रही, हालाँकि प्रदर्शनकारियों ने रोकने की कोशिशों के बावजूद अपना मार्च नहीं रोका।

सवर्ण न्याय यात्रा की पृष्ठभूमि

यह प्रदर्शन महिपाल सिंह मकराना की शुरू की गई 'सवर्ण न्याय यात्रा' का अंतिम और निर्णायक चरण था। मकराना ने करीब 24 दिन पहले जयपुर से बीकानेर के देशनोक तक यात्रा शुरू की थी, जो बाद में सवर्ण न्याय यात्रा में बदल गई और रविवार, 2 अगस्त को जयपुर पहुँची।

गौरतलब है कि यात्रा के अंतिम चरण में मकराना शनिवार को बीमार पड़ गए और कुछ देर के लिए बेहोश भी हो गए। स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के बावजूद उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर यात्रा जारी रखी। रविवार रात हजारों समर्थकों ने गोविंदपुरा से बजरंग द्वार तक मशाल जुलूस में हिस्सा लिया।

प्रदर्शन का दायरा और माँगें

आयोजकों के अनुसार, इस रैली में 24 राज्यों के लोगों ने हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में समर्थक निजी वाहनों और बसों से जयपुर पहुँचे। मार्च का उद्देश्य जिला कलेक्टर के कार्यालय में ज्ञापन सौंपना था, जिसमें यूजीसी के हालिया फैसलों को वापस लेने और उच्च जाति समुदाय से जुड़े मुद्दों पर कार्रवाई की माँग शामिल थी।

आगे की स्थिति

जुलूस के चोमू पुलिया तक पहुँचने पर स्थिति तनावपूर्ण बनी रही, लेकिन पुलिस की कड़ी निगरानी में रही। प्रशासन और करणी सेना के बीच आगे की बातचीत की संभावना बनी हुई है। यह देखना होगा कि सरकार इन माँगों पर क्या रुख अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजस्थान में सवर्ण राजनीति के बदलते समीकरणों का संकेत है — जहाँ यूजीसी जैसे केंद्रीय मुद्दे को स्थानीय जाति-आधारित गोलबंदी से जोड़ा जा रहा है। 24 राज्यों से समर्थकों का जुटना संगठन की राष्ट्रीय पहुँच दर्शाता है, लेकिन बैरिकेड तोड़ने की घटना यह भी बताती है कि प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की खाई गहरी है। असली सवाल यह है कि राज्य सरकार इन माँगों पर बातचीत की मेज पर आती है या कानून-व्यवस्था की आड़ में इसे टालती रहती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयपुर में करणी सेना का प्रदर्शन किस बारे में था?
यह प्रदर्शन यूजीसी के हालिया फैसलों को वापस लेने और सवर्ण समुदाय से जुड़ी माँगों को पूरा कराने के लिए आयोजित किया गया था। यह महिपाल सिंह मकराना की 'सवर्ण न्याय यात्रा' का अंतिम और निर्णायक चरण था।
पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल क्यों किया?
जब प्रदर्शनकारी कलवार पुलिया के पास पुलिस बैरिकेड्स पार करने की कोशिश करने लगे, तो पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाकर मार्च जारी रखा।
सवर्ण न्याय यात्रा क्या है और यह कब शुरू हुई?
सवर्ण न्याय यात्रा करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना द्वारा शुरू की गई एक जन-जागरण यात्रा है, जो करीब 24 दिन पहले जयपुर से बीकानेर के देशनोक तक शुरू हुई थी। यह यात्रा यूजीसी फैसलों के विरोध और उच्च जाति समुदाय के मुद्दे उठाने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
रैली में कितने राज्यों के लोग शामिल हुए?
आयोजकों के अनुसार इस रैली में 24 राज्यों के समर्थकों ने हिस्सा लिया। बड़ी संख्या में लोग निजी वाहनों और बसों से जयपुर पहुँचे थे।
महिपाल सिंह मकराना की सेहत के बारे में क्या जानकारी है?
यात्रा के अंतिम चरण में मकराना शनिवार को बीमार पड़ गए और कथित तौर पर कुछ देर के लिए बेहोश भी हो गए। स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर यात्रा और सोमवार का प्रदर्शन जारी रखा।
राष्ट्र प्रेस
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