कटिचक्रासन: सांस, पाचन और कमर दर्द की समस्या से राहत दिलाने वाला सरल योगासन
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय ने विश्व योग दिवस 2025 (21 जून) से पहले कटिचक्रासन को सांस संबंधी समस्याओं, पाचन विकारों और कमर दर्द से राहत दिलाने में कारगर बताया है। मंत्रालय रोज़ाना अलग-अलग योगासनों की जानकारी साझा कर आम नागरिकों को नियमित योगाभ्यास के लिए प्रेरित कर रहा है। योग विशेषज्ञों के अनुसार यह आसन खड़े होकर किया जाता है और इसके लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती।
कटिचक्रासन क्या है और कैसे करें
कटिचक्रासन एक स्थायी योगासन है जिसमें सीधे खड़े होकर कमर को दाएँ और बाएँ घुमाया जाता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार इसे करने के लिए पैरों के बीच कंधे जितनी दूरी रखें, दोनों हाथ सामने फैलाएँ और धीरे-धीरे कमर को एक दिशा में मोड़ते हुए विपरीत कंधे की ओर देखें। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को धीमी गति से शुरू करने की सलाह दी जाती है।
स्वास्थ्य लाभ: क्या कहते हैं विशेषज्ञ
योग विशेषज्ञों के अनुसार कटिचक्रासन के नियमित अभ्यास से कमर और रीढ़ मज़बूत होती है तथा शरीर का लचीलापन बढ़ता है। यह श्वसन तंत्र को सुधारने और पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में सहायक माना जाता है। इसके अतिरिक्त पीठ और कूल्हों की जकड़न कम होती है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बेहतर होता है।
किन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी
यह आसन विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी बताया गया है जो लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं — जैसे कार्यालय कर्मचारी या छात्र। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल की व्यस्त जीवनशैली में कठोरता, कमर दर्द, सांस की तकलीफ और पाचन की कमज़ोरी आम शिकायतें बन चुकी हैं, जो धीरे-धीरे जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। कटिचक्रासन इन सभी समस्याओं से एक साथ निपटने में सहायक हो सकता है।
वृद्धावस्था में भी सक्रिय जीवन के लिए
विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ वृद्धावस्था का अर्थ केवल लंबी उम्र नहीं, बल्कि शारीरिक शक्ति, गतिशीलता और आत्मनिर्भरता बनाए रखना भी है। नियमित कटिचक्रासन से बुज़ुर्ग भी सक्रिय और स्वस्थ जीवनशैली बनाए रख सकते हैं। यदि किसी को कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या हो, तो अभ्यास से पहले किसी योग विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहेगा।
विश्व योग दिवस की तैयारी
21 जून 2025 को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस से पहले आयुष मंत्रालय इस तरह की जानकारियाँ लगातार साझा कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना सकें। मंत्रालय का यह अभियान योग को केवल उत्सव तक सीमित न रखकर इसे रोज़मर्रा के स्वास्थ्य प्रबंधन का साधन बनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है।