क्या केंद्र सरकार ने देशभर के राजभवनों के नाम बदलकर 'लोकभवन' रखा?
सारांश
Key Takeaways
- राजभवन का नाम बदलकर लोकभवन रखा गया है।
- केंद्र सरकार का यह कदम जनता की सेवा के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है।
- पहले नाम बदलने के उदाहरणों में राजपथ और रेस कोर्स रोड शामिल हैं।
- सेवा तीर्थ का नाम सेवा के लिए समर्पित स्थान का प्रतीक है।
नई दिल्ली, 2 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत में 1 दिसंबर 2025 की तारीख एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में दर्ज हो गई है, क्योंकि आज के दिन देशभर के विभिन्न राज्यों के राजभवन के नाम बदलकर लोकभवन रखे गए हैं।
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, यह परिवर्तन किया गया है।
इस प्रक्रिया के अंतर्गत केंद्र सरकार की ओर से राजभवनों के नाम में बदलाव का यह निर्णय स्पष्ट संकेत देता है कि सत्ता का उपयोग लाभ के लिए नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का निर्वहन करना है। यह नाम परिवर्तन केवल एक बाहरी दिखावा नहीं है, बल्कि इसका एक गहरा अर्थ है। यह दर्शाता है कि सरकार का प्रमुख कार्य जनता की सेवा करना है, न कि सत्ता का आनंद लेना।
वास्तव में, मोदी सरकार के पिछले 11 वर्षों में कई स्थानों और मार्गों के नामों में परिवर्तन देखने को मिले हैं।
पहले, राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रख दिया गया था। राजपथ का अर्थ राजाओं का मार्ग या शक्ति का प्रतीक था, जबकि अब इसे कर्तव्य से जोड़ा गया है, जिसका अर्थ स्पष्ट है कि सत्ता कोई अधिकार नहीं, बल्कि सेवा का अवसर और जिम्मेदारी है।
एक अन्य उदाहरण के तौर पर रेस कोर्स रोड का नाम भी 2016 में बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा गया। यह नाम जन साधारण को बताता है कि यह लोक कल्याण का रास्ता है, न कि किसी प्रतिष्ठा का प्रतीक।
इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय यानी पीएमओ के नए परिसर को सेवा तीर्थ का नाम दिया। सेवा तीर्थ का अर्थ है, "सेवा का पवित्र स्थान।" यह नाम इस बात की पुष्टि करता है कि इस स्थान को सेवा की भावना के केंद्र के रूप में समर्पित किया गया है।