खड़गे का संदेश: समय के साथ संस्थाएं कायम रहती हैं, लेकिन चेहरे बदलते हैं
सारांश
Key Takeaways
- संस्थाएं समय के साथ कायम रहती हैं
- सांसदों का अनुभव महत्वपूर्ण है
- नई भूमिकाओं के लिए तैयारी आवश्यक है
- सांसदों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर समय मिलना चाहिए
- विदाई का महत्व और छाप छोड़ने की आवश्यकता
नई दिल्ली, 18 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। राज्यसभा से कई सांसद अपने कार्यकाल को समाप्त कर रहे हैं। इन सांसदों और सदन को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि समय की धारा कभी थमती नहीं है। संस्थाएं स्थायी रहती हैं, लेकिन लोगों के चेहरे बदलते रहते हैं। जो साथी फिर से चुनकर आ रहे हैं, उनका स्वागत है और जो सेवानिवृत्त हो रहे हैं, वे भी सार्वजनिक जीवन में अपना योगदान आगे जारी रखेंगे। यहाँ का अनुभव उन्हें भविष्य में अधिक सार्थक भूमिकाओं में मदद करेगा।
राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कार्यकाल है और उन्होंने 16 फरवरी 2022 से नेता प्रतिपक्ष का पद संभाला। इस अनुभव को वे अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका अनुभव उच्च सदन में खट्टा-मीठा रहा है, लेकिन उनका मानना है कि इस सदन को और प्रभावी बनाने के लिए नए प्रयासों की आवश्यकता है ताकि यह देश और समाज को बेहतर दिशा दे सके।
खड़गे ने इस अवसर पर राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे कुछ साथियों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एचडी देवगौड़ा, जो कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं, के साथ उनका लंबा संबंध रहा है। शरद पवार एक राष्ट्रीय नेता हैं, और यह खुशी की बात है कि वे आगे भी सदन का मार्गदर्शन करेंगे। तिरुचि शिवा संसदीय कार्यवाही के गहन जानकार हैं, और उनका योगदान महत्वपूर्ण रहेगा। रामदास आठवले अपनी अनूठी काव्य शैली में बात करते हैं और सदन में उनकी एक अलग पहचान है।
उन्होंने दिग्विजय सिंह का भी जिक्र किया, जिनका मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में बड़ा योगदान रहा है। राज्यसभा में रहते हुए उन्होंने संसदीय समितियों में महत्वपूर्ण कार्य किया है। केटीएस तुलसी ने नागरिक स्वतंत्रता और संवैधानिक मुद्दों पर अपने विचारों से सदन को समृद्ध किया है। शक्ति सिंह गोहिल, नीरज डांगी, रजनी पाटिल, फौजिया खान, प्रियंका चतुर्वेदी और साकेत गोखले जैसे साथियों ने भी विभिन्न विषयों पर गंभीरता से अपनी बात रखी और सदन की गरिमा बढ़ाई।
खड़गे ने कहा कि उपसभापति हरिवंश अपने शालीन और संतुलित व्यवहार के लिए जाने जाते हैं। राजनीति या सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोग कभी भी वास्तव में सेवानिवृत्त नहीं होते। देश सेवा का जज्बा न तो थकता है और न ही समाप्त होता है। इस सदन में विभिन्न राज्यों और विचारधाराओं से आए सदस्यों के विचार सुनने को मिलते हैं, जो सीखने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने हमेशा कोशिश की है कि वे नियमित रूप से सदन में उपस्थित रहें, चर्चाओं में भाग लें, और नई बातें सीखते रहें। ज्ञान कभी पूर्ण नहीं होता, वह निरंतर पढ़ने, सुनने और सीखने से बढ़ता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सांसदों को अधिक समय मिलना चाहिए ताकि गरीबों, कमजोर वर्गों, किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सके। कई बार जब हम ये मुद्दे उठाते हैं, तो उन्हें आलोचना समझ लिया जाता है, जबकि सरकार को जनता की चिंताओं को गंभीरता से सुनना चाहिए। सीमित समय में भी सांसद अपनी महत्वपूर्ण बातें रखते हैं, इसलिए आवश्यक है कि उन्हें पूरा अवसर मिले, ताकि यह सदन अपनी गरिमा और प्रभावशीलता को और बढ़ा सके।
खड़गे ने सेवानिवृत्त होने वाले सांसदों के लिए एक शेर पढ़ा: ‘विदाई तो है दस्तूर जमाने का पुराना, पर जहां भी जाना, अपनी छाप कुछ ऐसे छोड़ जाना, कि हर कोई गुनगुनाए तुम्हारे ही तराना।’ उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर, भाईचारे की भावना के साथ, देशहित में कार्य करते रहेंगे।