केईएम अस्पताल नाम परिवर्तन: लोढ़ा बोले — किंग एडवर्ड गौरव नहीं, गुलामी का प्रतीक है
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने मंगलवार, 23 जून 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद में किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल के नाम परिवर्तन के मुद्दे पर विपक्ष को कड़ा जवाब दिया। लोढ़ा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किंग एडवर्ड भारत के लिए गौरव का विषय नहीं, बल्कि औपनिवेशिक दासता के दौर का प्रतीक है।
मुख्य घटनाक्रम
मंत्री लोढ़ा ने सदन में कहा कि ब्रिटिश शासनकाल भारत के शोषण का काल था। उन्होंने तर्क दिया कि किंग एडवर्ड ने भारत को गुलाम बनाया और देश की संपत्ति लूटकर इंग्लैंड ले गए। उनके अनुसार यह कहना कि 'किंग एडवर्ड ने भारत को धन दिया था', पूरी तरह भ्रामक है।
लोढ़ा ने तीखे शब्दों में कहा कि लाखों भारतीयों की मृत्यु के लिए जिम्मेदार किंग एडवर्ड एक क्रूर शासक थे। उन्होंने किंग एडवर्ड के नाम का समर्थन करने वालों की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति के नाम को महिमामंडित करना उचित नहीं है।
नाम परिवर्तन का प्रस्ताव
लोढ़ा ने बताया कि केईएम अस्पताल के नाम परिवर्तन के लिए सरकार ने तीन वैकल्पिक नाम प्रस्तावित किए हैं और उचित समय पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित तीनों नामों में से जो भी चुना जाए, अस्पताल का संक्षिप्त नाम 'केईएम' ही बना रहेगा — ताकि दशकों से बनी पहचान और आम जन की सुविधा बनी रहे।
ट्रम्प टॉवर नाम पर सफाई
विपक्ष ने ट्रम्प टॉवर के नाम पर भी सवाल उठाए। इस पर लोढ़ा ने कहा कि ट्रम्प नाम केवल एक व्यावसायिक साझेदारी के तहत दिया गया है और इसका किसी व्यक्ति के महिमामंडन से कोई संबंध नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब औपनिवेशिक नामों को हटाने की मुहिम पूरे देश में तेज़ हो रही है।
विधान परिषद में तीखी नोकझोंक
बहस के दौरान विधान परिषद सदस्य मिलिंद नार्वेकर ने मंत्री लोढ़ा के व्यवसाय पर सवाल उठाए। इसके जवाब में लोढ़ा ने कहा कि उनका व्यवसाय और आय का स्रोत सार्वजनिक रूप से ज्ञात है। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि नार्वेकर का व्यवसाय अज्ञात होने के बावजूद वे बड़ी गाड़ी में चलते हैं।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि केईएम अस्पताल मुंबई के सबसे पुराने और बड़े सार्वजनिक अस्पतालों में से एक है, जो दशकों से लाखों मरीजों की सेवा कर रहा है। नाम परिवर्तन का अंतिम निर्णय महाराष्ट्र सरकार द्वारा लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि औपनिवेशिक नामों पर यह बहस आने वाले समय में और तेज़ होगी।