कोलकाता पुलिस DC कार्यालय में ₹51 लाख गबन: UDA पुलकेंदु घोष गिरफ्तार, 112 फर्जी बिल बरामद
सारांश
मुख्य बातें
कोलकाता पुलिस के पूर्वी डिवीजन उपायुक्त (DC) कार्यालय में तैनात अपर डिवीजन सहायक (UDA) पुलकेंदु घोष को 6 जुलाई 2026 को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने 2022 से 2026 के बीच 112 फर्जी बिल तैयार कर ₹51 लाख से अधिक की सरकारी राशि अपने और अपनी माँ के बैंक खातों में स्थानांतरित की। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
मुख्य घटनाक्रम
जाँच के अनुसार, पुलकेंदु घोष कार्यालय में ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के बिल तैयार करने का अधिकृत कर्मचारी था। पुलिस का आरोप है कि उसने इसी जिम्मेदारी का दुरुपयोग करते हुए 88 फर्जी बिलों के माध्यम से ₹40 लाख से अधिक अपने स्वयं के बैंक खाते में और 24 फर्जी बिलों के जरिए ₹10 लाख से अधिक अपनी माँ के नाम वाले खाते में जमा कराए।
कथित धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए फर्जी दस्तावेजों और जाली मुहरों का भी इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने जाँच के दौरान कई फर्जी बिल बरामद किए हैं।
HRMS प्रणाली से डेटा छेड़छाड़
जाँच में सामने आया कि आरोपी ने HRMS (मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली) से मूल ठेकेदारों और आपूर्तिकर्ताओं के बैंक खाता विवरण कथित तौर पर हटा दिए और उनकी जगह अपने तथा अपनी माँ के खातों की जानकारी दर्ज कर दी। इस कारण वैध आपूर्तिकर्ताओं के रिकॉर्ड अब सिस्टम में उपलब्ध नहीं हैं।
पूछताछ के दौरान चार ठेका कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जाँचकर्ताओं को बताया कि उन्हें देय भुगतान कभी प्राप्त नहीं हुआ। बाद में सत्यापन में कथित तौर पर पुष्टि हुई कि वह राशि घोष और उसकी माँ के खातों में जमा की गई थी।
जाँच की शुरुआत कैसे हुई
पुलिस के अनुसार, सरकार बदलने के बाद लालबाजार (कोलकाता पुलिस मुख्यालय) को इस कथित गबन की शिकायत मिली। पिछले महीने संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय) ने मामले की जाँच के आदेश दिए। उपायुक्त (पूर्वी डिवीजन) के निर्देश पर 15 जून से 30 जून तक पुलिस की एक विशेष टीम ने जाँच की। प्रारंभिक जाँच पूरी होने के बाद आनंदपुर थाने, पूर्वी कोलकाता में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर रविवार को गिरफ्तारी की गई।
वरिष्ठ पद का फायदा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कार्यालय में वरिष्ठ पद पर होने के कारण सहकर्मी शायद ही कभी पुलकेंदु घोष के कार्यों पर सवाल उठाते थे। यह ऐसे समय में आया है जब सरकारी कार्यालयों में आंतरिक वित्तीय निगरानी की कमी एक बार फिर चर्चा में है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर अपना अपराध स्वीकार कर लिया।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जाँच जारी है। गौरतलब है कि यह मामला सरकारी वित्तीय प्रणालियों में डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा और आंतरिक ऑडिट तंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है। अधिकारियों के अनुसार, HRMS डेटा में की गई छेड़छाड़ की तकनीकी जाँच भी की जा रही है।