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कुंदन कृष्णन पर ₹150 करोड़ की बेनामी संपत्ति का आरोप, राजद सांसद सुधाकर सिंह ने माँगी केंद्रीय जाँच

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कुंदन कृष्णन पर ₹150 करोड़ की बेनामी संपत्ति का आरोप, राजद सांसद सुधाकर सिंह ने माँगी केंद्रीय जाँच

सारांश

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने बिहार STF प्रमुख कुंदन कृष्णन पर ₹150 करोड़ की बेनामी संपत्ति का आरोप लगाया है — नौकरी की आय मात्र ₹5 करोड़, संपत्ति कथित तौर पर ₹180 करोड़। मामला अब अदालत और केंद्रीय एजेंसियों तक पहुँचने की तैयारी में है।

मुख्य बातें

राजद सांसद सुधाकर सिंह ने 3 नवंबर 2026 को बिहार STF प्रमुख कुंदन कृष्णन पर कथित तौर पर ₹150 करोड़ की बेनामी संपत्ति का आरोप लगाया।
कृष्णन की सेवाकालीन आय लगभग ₹5 करोड़ बताई जा रही है, जबकि घोषित-अघोषित संपत्ति कथित तौर पर ₹180 करोड़ तक।
रितेश सिंह उर्फ बिट्टू सिंह के नाम पर कथित तौर पर ₹175 करोड़ की संपत्ति दर्ज कराने का भी आरोप।
सांसद ने लोकायुक्त, CVC, UPSC और केंद्रीय एजेंसियों से जाँच की माँग की; अदालत जाने की भी चेतावनी दी।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से लिखित स्पष्टीकरण की माँग; सरकार की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने 3 नवंबर 2026 को पटना में बिहार राज्य एसटीएफ के महानिदेशक कुंदन कृष्णन के खिलाफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। सिंह ने दावा किया कि कृष्णन की घोषित और अघोषित संपत्तियाँ उनकी सेवाकालीन आय की तुलना में अनुपातहीन रूप से अधिक हैं और इस मामले में लोकायुक्त, केंद्रीय एजेंसियों तथा सक्षम अधिकारियों से जाँच कराने की माँग की है।

आरोपों का ब्यौरा

सांसद सुधाकर सिंह के अनुसार, कुंदन कृष्णन की सरकारी सेवा से कुल आय कथित तौर पर लगभग ₹5 करोड़ के आसपास है। इसके विपरीत, उनकी और उनकी पत्नी की घोषित तथा अघोषित संपत्ति मिलाकर कथित तौर पर ₹180 करोड़ तक बताई जा रही है। सिंह ने कहा कि इसमें से ₹30 से ₹35 करोड़ की पारिवारिक संपत्ति घटाने के बाद भी लगभग ₹150 करोड़ की संपत्ति अस्पष्ट स्रोतों से बनी दिखती है।

राजद सांसद ने रितेश सिंह उर्फ बिट्टू सिंह की संपत्ति की भी जाँच कराने की माँग की। उनके अनुसार, रितेश सिंह के नाम पर कथित तौर पर लगभग ₹175 करोड़ की संपत्ति लिखवाई गई है। सिंह ने दावा किया कि जब कुंदन कृष्णन पटना के एसएसपी थे, उस दौरान एक ही खाते और प्लॉट से जुड़े लेनदेन में सफेद और काले धन का कथित इस्तेमाल कर यह संपत्ति रितेश सिंह के नाम दर्ज कराई गई। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज़ हैं।

जाँच की माँग और कानूनी कदम

सुधाकर सिंह ने स्पष्ट किया कि वे बिहार और केंद्र दोनों स्तरों पर जाँच की माँग उठाएँगे। उन्होंने बताया कि पिछले तीन वर्षों से वे लोकायुक्त की नियुक्ति और व्यवस्था को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा रहे हैं। इस संबंध में गृह मंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और केंद्रीय लोकायुक्त को पत्र भी लिखे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुंदन कृष्णन केंद्रीय सेवाओं से जुड़े अधिकारी हैं, इसलिए यह मामला दिल्ली स्थित संबंधित संस्थाओं के समक्ष भी रखा जाएगा।

सांसद ने यह भी कहा कि वे अदालत का दरवाजा खटखटाने से भी नहीं चूकेंगे। गौरतलब है कि यह उनकी ओर से इस मामले में की गई पहली शिकायत नहीं है — पहले भी कई मंचों पर यह मुद्दा उठाया जा चुका है।

सरकार की प्रतिक्रिया और मुख्यमंत्री से माँग

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से पहले की गई शिकायत पर जाँच शुरू होने के सवाल पर सुधाकर सिंह ने कहा कि अब तक सरकार की तरफ से कोई लिखित जवाब नहीं मिला है। उन्होंने माँग की कि सरकार स्पष्ट करे कि लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं। उनके अनुसार, यदि सरकार कहती है कि संपत्तियाँ वैध हैं और कोई वित्तीय अनियमितता नहीं हुई, तो वे उस जवाब को स्वीकार करने को तैयार हैं — लेकिन चुप्पी उन्हें मंजूर नहीं।

अन्य मुद्दों पर भी हमला

सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की उस अपील पर भी निशाना साधा जिसमें आर्थिक रूप से सक्षम लोगों से मुफ्त बिजली का लाभ छोड़ने को कहा गया था। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय सरकार ने सभी के लिए मुफ्त बिजली का वादा किया था और कोई शर्त नहीं रखी थी। अब सत्ता में आने के बाद इस तरह की अपील को उन्होंने बिहार की खराब वित्तीय स्थिति का संकेत बताया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठियों से जुड़े बयान पर सांसद ने सवाल किया कि यदि तीन करोड़ घुसपैठिए हैं, तो उनकी पहचान अब तक क्यों नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत चुनाव आयोग से पूछे जाने पर बिहार और पश्चिम बंगाल दोनों के लिए रोहिंग्या व बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की संख्या शून्य बताई गई।

क्या होगा आगे

सुधाकर सिंह ने स्पष्ट किया है कि वे उच्च न्यायालय और केंद्रीय एजेंसियों दोनों के समक्ष यह मामला उठाएँगे। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में राजनीतिक वातावरण पहले से ही गरमाया हुआ है। यदि जाँच एजेंसियाँ इस मामले का संज्ञान लेती हैं, तो यह बिहार पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक परीक्षण साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी सांसदों ने बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों पर इस तरह के दावे किए हों — और पिछले कई मामलों में जाँच आगे नहीं बढ़ी। असली परीक्षा यह होगी कि क्या केंद्रीय एजेंसियाँ — जिन पर अक्सर राजनीतिक दबाव के आरोप लगते हैं — किसी सत्तारूढ़ गठबंधन से जुड़े प्रशासनिक ढाँचे में कार्यरत अधिकारी की जाँच में स्वतंत्र रह पाएँगी। बिहार में लोकायुक्त व्यवस्था की निष्क्रियता — जिसकी शिकायत खुद सिंह तीन वर्षों से कर रहे हैं — यह भी दर्शाती है कि राज्य में जवाबदेही तंत्र की जड़ें कितनी कमज़ोर हैं।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कुंदन कृष्णन पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
राजद सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया है कि बिहार STF के महानिदेशक कुंदन कृष्णन की घोषित और अघोषित संपत्ति कथित तौर पर ₹180 करोड़ तक है, जबकि उनकी सेवाकालीन आय मात्र ₹5 करोड़ बताई जाती है। पारिवारिक संपत्ति घटाने के बाद भी लगभग ₹150 करोड़ की बेनामी संपत्ति का सवाल उठाया गया है।
रितेश सिंह उर्फ बिट्टू सिंह की इस मामले में क्या भूमिका बताई जा रही है?
सुधाकर सिंह के अनुसार, रितेश सिंह उर्फ बिट्टू सिंह के नाम पर कथित तौर पर लगभग ₹175 करोड़ की संपत्ति लिखवाई गई है। दावा है कि जब कुंदन कृष्णन पटना के एसएसपी थे, तब एक खाते और प्लॉट से जुड़े लेनदेन में सफेद और काले धन का इस्तेमाल कर यह संपत्ति रितेश सिंह के नाम दर्ज कराई गई। सांसद का कहना है कि उनके पास संबंधित दस्तावेज़ मौजूद हैं।
सुधाकर सिंह ने जाँच के लिए किन-किन संस्थाओं से माँग की है?
सांसद ने लोकायुक्त, केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), केंद्रीय लोकायुक्त तथा अन्य केंद्रीय एजेंसियों से जाँच की माँग की है। इसके अलावा उन्होंने गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी पत्र लिखे हैं और अदालत का दरवाजा खटखटाने की भी बात कही है।
बिहार सरकार की इस मामले में क्या प्रतिक्रिया रही है?
सुधाकर सिंह के अनुसार मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पहले शिकायत करने के बावजूद सरकार की ओर से अब तक कोई लिखित जवाब नहीं मिला है। उन्होंने माँग की है कि सरकार स्पष्ट करे कि आरोप सही हैं या नहीं।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
सुधाकर सिंह ने उच्च न्यायालय और केंद्रीय एजेंसियों दोनों के समक्ष यह मामला उठाने की घोषणा की है। यदि केंद्रीय एजेंसियाँ संज्ञान लेती हैं, तो यह बिहार पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक परीक्षण बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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