राष्ट्रभक्ति की परिभाषा: नाजिया इलाही खान का लेंसकार्ट विवाद पर कड़ा बयान
सारांश
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पुणे, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लेंसकार्ट के कर्मचारियों के ड्रेस कोड और ग्रूमिंग पॉलिसी को लेकर विवाद में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की नेता नाजिया इलाही खान ने ठोस कदम उठाया है। इस संदर्भ में, नाजिया ने मुंबई के अंधेरी स्थित लेंसकार्ट स्टोर का दौरा किया और प्रबंधक मोहसिन खान से सीधे संवाद किया।
राष्ट्र प्रेस से विशेष बातचीत में नाजिया ने कहा कि यह वास्तव में दुखद और विरोधाभासी है कि भारत में 120 करोड़ से अधिक हिंदुओं की जनसंख्या होने के बावजूद, हमारे हिंदू भाई-बहन रुद्राक्ष पहनने, तिलक लगाने, टीका करने, मंगलसूत्र पहनने और विवाहित बेटियों द्वारा सिंदूर लगाने से वंचित हैं।
उन्होंने यह भी पूछा कि हम अपने कानूनी अधिकारों की मांग कहां करें? क्या यूएई या पाकिस्तान में?
नाजिया ने बताया कि उन्होंने अंधेरी के लेंसकार्ट स्टोर सहित कई दुकानों का दौरा किया। जब वह अंधेरी के लेंसकार्ट स्टोर गईं, तो उन्होंने प्यार और सम्मान से प्रबंधक से पूछा। उन्होंने देखा कि अधिकांश स्टोर में मुसलमान प्रबंधक हैं जो केवल 10वीं कक्षा पास हैं। यह दर्शाता है कि एक स्ट्रेटेजी मौजूद है।
उन्होंने प्रबंधक से पूछा कि क्या वे इफ्तार करते हैं और नमाज पढ़ते हैं। जब उन्होंने सकारात्मक उत्तर दिया, तो नाजिया ने कहा, “आप नमाज पढ़ लेते हैं और इफ्तार करते हैं, लेकिन लेंसकार्ट के मालिक अपने हैंडबिल पर हिजाब की अनुमति दे रहे हैं। क्या उन्हें भारतीय संस्कृति से कोई दुश्मनी है?” उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों, राज्य सरकार और पुलिस से सभी शोरूम बंद करने और जांच करने की मांग की।
नाजिया ने कहा कि जिस प्रकार TCS का मामला सामने आया है, लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई के मॉड्यूल का भंडाफोड़ हो रहा है, तो यह भी एक प्रॉक्सी तरीका हो सकता है शरिया लागू करने का।
उन्होंने कहा कि अगर कंपनी के मालिक ने तुरंत कोई स्टेटमेंट नहीं दिया और सरकार ने कार्रवाई नहीं की, तो वह 72 घंटों में सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करेंगी। उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक पूरी जांच न हो, मुसलमानों को नई नौकरियां नहीं दी जानी चाहिए।
नाजिया ने आगे कहा कि वह एक संवैधानिक मुसलमान हैं और भारत में नमाज पढ़ती हैं। उन्होंने कहा कि जो रेडिकल मुसलमान जिहाद के नाम पर देश का नुकसान कर रहे हैं, वे न तो देश के हैं और न ही इस्लाम के। उन्होंने कहा कि उनका अभियान निरंतर चल रहा है और उन्हें लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई से धमकियां मिलती रहती हैं। लेकिन, राष्ट्रभक्ति में सिर तन से जुदा हो जाए तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता।