4 जुलाई 2026
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महाकाल का त्रिनेत्र दर्शन: आषाढ़ चतुर्थी पर भस्म आरती में बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष माला से भव्य शृंगार

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महाकाल का त्रिनेत्र दर्शन: आषाढ़ चतुर्थी पर भस्म आरती में बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष माला से भव्य शृंगार

सारांश

आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल ने त्रिनेत्र खोलकर भक्तों को अलौकिक दर्शन दिए। पंचामृत अभिषेक और बेल पत्र, मुकुट, रुद्राक्ष माला से भव्य शृंगार के बाद 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।

मुख्य बातें

4 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल ने त्रिनेत्र खोलकर भक्तों को दर्शन दिए।
बाबा का दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया।
बेल पत्र, मुकुट, रजत आभूषण और रुद्राक्ष की माला अर्पित कर भव्य शृंगार संपन्न हुआ।
अब भस्म आरती में कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग होता है।
भस्म आरती में पुरुषों के लिए धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी अनिवार्य है।
बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात्रि से ही कतारबद्ध रहे; व्यापक पुलिस तैनाती की गई।

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 4 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल ने भव्य भस्म आरती के दौरान त्रिनेत्र खोलकर श्रद्धालुओं को अलौकिक दर्शन दिए। इस दिव्य क्षण के साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से आए भक्त देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतारबद्ध हो गए थे।

कपाट खुलने का क्रम और दिव्य वातावरण

शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, समूचा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वेदमंत्रों के उच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

पंचामृत अभिषेक और भव्य शृंगार

कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को हरि ओम जल भी अर्पित किया गया। तत्पश्चात रजत आभूषण, ओम चिह्न, बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित कर बाबा का भव्य शृंगार किया गया।

भस्म आरती की परंपरा और विशेषता

जानकारी के अनुसार, प्राचीन काल में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान के साथ महाआरती संपन्न कराई।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था

बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है, जिसके दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में भक्त रात्रि से ही पंक्तिबद्ध होकर दर्शन की प्रतीक्षा में रहे। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।

आगे के दर्शन और धार्मिक महत्व

आषाढ़ माह को शिव उपासना के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब सावन माह की तैयारियाँ भी जोरों पर हैं और महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन निरंतर बढ़ रहा है। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अनुरोध किया है कि वे दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग का उपयोग करें ताकि भीड़ प्रबंधन सुचारु रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उज्जैन की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का केंद्र बन चुकी है — सावन से पहले आषाढ़ में ही श्रद्धालुओं की यह भीड़ बताती है कि धार्मिक पर्यटन किस तेज़ी से बढ़ रहा है। परंपरा में बदलाव — श्मशान भस्म की जगह कपिला गाय के गोबर से तैयार भस्म — यह दर्शाता है कि मंदिर प्रशासन आस्था और आधुनिक स्वास्थ्य-सुरक्षा मानकों में संतुलन बना रहा है। हालाँकि, बढ़ती भीड़ के साथ भक्तों की सुरक्षा और दर्शन की सुगमता एक स्थायी प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है, जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाकाल का त्रिनेत्र दर्शन क्या होता है?
त्रिनेत्र दर्शन वह विशेष क्षण होता है जब भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल की प्रतिमा पर तीसरी आँख (त्रिनेत्र) को विशेष शृंगार के साथ प्रकट किया जाता है। यह दर्शन अत्यंत दुर्लभ और पवित्र माना जाता है, जिसके लिए श्रद्धालु रात्रि से ही कतार में लग जाते हैं।
महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती कब होती है?
भस्म आरती प्रतिदिन तड़के सूर्योदय से पूर्व होती है और इसे महाकाल मंदिर का सबसे प्रमुख अनुष्ठान माना जाता है। इसमें भाग लेने के लिए ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है और पुरुषों को धोती-सोला तथा महिलाओं को साड़ी पहनना आवश्यक है।
भस्म आरती में किस भस्म का उपयोग होता है?
जानकारी के अनुसार, पहले श्मशान की राख का उपयोग होता था, लेकिन अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह परिवर्तन परंपरा और स्वास्थ्य मानकों के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से किया गया है।
आषाढ़ चतुर्थी पर महाकाल के शृंगार में क्या-क्या अर्पित किया गया?
4 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी पर बाबा महाकाल को पंचामृत (दूध, दही, घी, शक्कर, फलों का रस) से अभिषेक के बाद रजत आभूषण, ओम चिह्न, बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई।
महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए कैसे बुकिंग करें?
महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से ऑनलाइन बुकिंग का उपयोग करने का अनुरोध किया है ताकि भीड़ प्रबंधन सुचारु रहे। विशेष अवसरों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी भी तैनात रहते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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