महाकाल का त्रिनेत्र दर्शन: आषाढ़ चतुर्थी पर भस्म आरती में बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष माला से भव्य शृंगार
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 4 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष चतुर्थी के पावन अवसर पर बाबा महाकाल ने भव्य भस्म आरती के दौरान त्रिनेत्र खोलकर श्रद्धालुओं को अलौकिक दर्शन दिए। इस दिव्य क्षण के साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से आए भक्त देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतारबद्ध हो गए थे।
कपाट खुलने का क्रम और दिव्य वातावरण
शनिवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, समूचा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा। घंटियों की टंकार, शंखध्वनि और वेदमंत्रों के उच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
पंचामृत अभिषेक और भव्य शृंगार
कपाट खुलते ही मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को हरि ओम जल भी अर्पित किया गया। तत्पश्चात रजत आभूषण, ओम चिह्न, बेल पत्र, मुकुट और रुद्राक्ष की माला अर्पित कर बाबा का भव्य शृंगार किया गया।
भस्म आरती की परंपरा और विशेषता
जानकारी के अनुसार, प्राचीन काल में महाकाल को श्मशान की राख अर्पित की जाती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। भस्म आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है। मंदिर के पुजारियों ने विधि-विधान के साथ महाआरती संपन्न कराई।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था
बाबा महाकाल की भस्म आरती देश-विदेश में विख्यात है, जिसके दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं से लेकर著名 हस्तियाँ भी उज्जैन पहुँचती हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में भक्त रात्रि से ही पंक्तिबद्ध होकर दर्शन की प्रतीक्षा में रहे। मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई।
आगे के दर्शन और धार्मिक महत्व
आषाढ़ माह को शिव उपासना के लिए विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब सावन माह की तैयारियाँ भी जोरों पर हैं और महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन निरंतर बढ़ रहा है। मंदिर प्रशासन ने भक्तों से अनुरोध किया है कि वे दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग का उपयोग करें ताकि भीड़ प्रबंधन सुचारु रहे।