ममता बनर्जी 27 जुलाई को नई दिल्ली में नीट पेपर लीक विरोध में होंगी शामिल, सौगत रॉय बने TMC के उपनेता
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 27 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में नीट परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरुद्ध कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में चल रहे विरोध प्रदर्शन में भाग लेंगी। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर 24 परगना जिले के दमदम निर्वाचन क्षेत्र से चार बार के लोकसभा सांसद सौगत रॉय को लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस का उपनेता नियुक्त किया है।
मुख्य घटनाक्रम
21 जुलाई 2026 को कोलकाता में तृणमूल कांग्रेस की शहीद दिवस रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने सीजेपी के नेतृत्व वाले आंदोलन के प्रति एकजुटता व्यक्त की थी और कहा था कि वे जल्द ही विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगी। उनकी 27 जुलाई की दिल्ली यात्रा उसी घोषणा की पुष्टि है।
हालाँकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वे जंतर-मंतर पर धरने में केवल सांकेतिक उपस्थिति दर्ज कराएंगी या सक्रिय रूप से भाग लेंगी। इसके अतिरिक्त, यह भी अनिश्चित है कि वे विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं — विशेषकर कांग्रेस नेतृत्व — से मुलाकात करेंगी या नहीं।
सौगत रॉय की नियुक्ति और पार्टी में बदलाव
सौगत रॉय ने बीरभूम निर्वाचन क्षेत्र से चार बार की लोकसभा सांसद शताब्दी रॉय का स्थान लिया है। शताब्दी रॉय उन 20 पूर्व तृणमूल कांग्रेस सांसदों में शामिल हैं, जो हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल चुनावों के बाद त्रिपुरा स्थित राष्ट्रवादी नागरिक पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में शामिल हो गई हैं।
इन 20 लोकसभा सदस्यों के एनसीपीआई में जाने के बाद लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस की संख्या घटकर मात्र आठ रह गई है। वर्तमान में लोकसभा में TMC के नेता ममता बनर्जी के भतीजे हैं, जो दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार के लोकसभा सांसद हैं।
विपक्षी एकजुटता की अपील
21 जुलाई को ममता बनर्जी ने सभी विपक्षी दलों से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विरुद्ध संयुक्त राष्ट्रव्यापी आंदोलन के लिए इंडिया (भारतीय राष्ट्रीय विकास समावेशी गठबंधन) ब्लॉक के तहत एकजुट होने का आह्वान किया था। उनकी दिल्ली यात्रा इस रणनीतिक पहल का विस्तार मानी जा रही है।
आम जनता पर असर
नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों को प्रभावित करता है। ममता बनर्जी जैसे वरिष्ठ विपक्षी नेता का इस आंदोलन में शामिल होना इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर और अधिक प्रमुखता दे सकता है।
क्या होगा आगे
ममता बनर्जी की 27 जुलाई की दिल्ली यात्रा से पहले यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि वे इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के साथ किस स्तर की बैठकें करती हैं। TMC की संसदीय संख्या में आई गिरावट के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व पुनर्गठन की दिशा भी स्पष्ट होती दिख रही है।