4 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

नासिक TCS धर्मांतरण-अत्याचार मामला: रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी समेत तीन आरोपियों की जमानत खारिज

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
नासिक TCS धर्मांतरण-अत्याचार मामला: रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी समेत तीन आरोपियों की जमानत खारिज

सारांश

नासिक TCS धर्मांतरण-अत्याचार मामले में सत्र न्यायालय ने तीन आरोपियों की जमानत एक बार फिर खारिज कर दी। बचाव पक्ष अब उच्च न्यायालय का रुख करेगा, जबकि तीन अन्य आरोपियों की जमानत पर 6 जुलाई को सुनवाई होनी है। SIT दो चार्जशीट और आठ FIR के साथ जांच जारी रखे हुए है।

मुख्य बातें

नासिक जिला एवं सत्र न्यायालय ने 4 जुलाई 2026 को रजा मेमन , शाहरुख कुरैशी और अश्विनी चेनानी की जमानत याचिकाएं खारिज कीं।
तीनों की जमानत इससे पहले निचली अदालत भी खारिज कर चुकी थी; अब बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने की संभावना।
निदा खान , दानिश शेख और तौसीफ अत्तार की जमानत याचिकाओं पर 6 जुलाई को सुनवाई।
SIT ने आठ FIR से जुड़ी दो चार्जशीट दाखिल कीं — दूसरी 29 मई को, पहली 22 मई को ( 1,500 पृष्ठ )।
पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच उत्पीड़न हुआ और HR विभाग ने शिकायतें नज़रअंदाज़ कीं।

महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ (TCS) से जुड़े कथित जबरन धर्मांतरण एवं अत्याचार प्रकरण में नासिक जिला एवं सत्र न्यायालय ने 4 जुलाई 2026 को आरोपी रजा रफीक मेमन, शाहरुख हुसैन कुरैशी और अश्विनी अशोक चेनानी की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। न्यायालय ने आरोपों की गंभीरता और चल रही जांच की स्थिति को आधार बनाकर राहत देने से इनकार किया।

जमानत क्यों खारिज हुई

तीनों आरोपियों की जमानत अर्जियां इससे पहले निचली अदालत भी खारिज कर चुकी थी। सत्र न्यायालय ने भी उसी निर्णय को बरकरार रखा। अदालत ने माना कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं और जांच अभी पूरी नहीं हुई है। बचाव पक्ष के वकीलों ने संकेत दिया है कि अब इन तीनों की ओर से बॉम्बे उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की जाएगी।

अन्य आरोपियों की सुनवाई 6 जुलाई को

इस मामले के अन्य आरोपी निदा एजाज खान, दानिश एजाज शेख और तौसीफ बिलाल अत्तार की जमानत याचिकाओं पर 6 जुलाई 2026 को सुनवाई निर्धारित है। इन तीनों का नाम दोनों चार्जशीट में दर्ज है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब सामने आया जब नासिक स्थित TCS कार्यालय में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने अपने सहकर्मी दानिश शेख के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप है कि शेख पहले से विवाहित होने के बावजूद शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। जांच आगे बढ़ने पर कई अन्य महिलाओं ने भी नासिक शाखा के वरिष्ठ कर्मचारियों पर उत्पीड़न के आरोप लगाए। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच उन्हें मानसिक और यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी शिकायतों को कंपनी के मानव संसाधन विभाग ने नज़रअंदाज़ किया।

दो चार्जशीट दाखिल, आठ FIR दर्ज

इस प्रकरण में अब तक दो चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं। विशेष जांच दल (SIT) ने 29 मई को अदालत में दूसरा आरोपपत्र दायर किया, जो मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज आठ FIR से संबंधित है। इस आरोपपत्र में रजा रफीक मेमन, शाहरुख हुसैन कुरैशी, अश्विनी अशोक चेनानी, तौसीफ बिलाल अत्तार, शफी भीखन शेख, दानिश एजाज शेख, निदा एजाज खान और अन्य को आरोपी बनाया गया है।

इससे पहले 22 मई को SIT ने देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में BNS और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराओं के तहत दर्ज एक अलग मामले में 1,500 पृष्ठों की चार्जशीट दाखिल की थी। उस आरोपपत्र में दानिश एजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा एजाज खान और मतीन मजीद पटेल को आरोपी बनाया गया था।

आगे क्या होगा

जिन तीन आरोपियों की जमानत खारिज हुई है, उनके उच्च न्यायालय जाने की संभावना है। 6 जुलाई को शेष आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद इस मामले की न्यायिक दिशा और स्पष्ट होगी। SIT की जांच जारी है और अदालती प्रक्रिया अगले कई सप्ताहों तक निर्णायक मोड़ पर रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

आठ FIR और धर्मांतरण के आरोप इसे कहीं अधिक जटिल बनाते हैं। सबसे गंभीर सवाल यह है कि कथित तौर पर फरवरी 2022 से मार्च 2026 तक चले उत्पीड़न के दौरान TCS का आंतरिक HR तंत्र क्यों निष्क्रिय रहा — यह बड़ी कॉर्पोरेट जवाबदेही की माँग उठाता है। अदालतों का बार-बार जमानत नामंज़ूर करना संकेत देता है कि साक्ष्य का भार आरोपियों के विरुद्ध भारी है, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया की लंबाई को देखते हुए पीड़ित महिलाओं के लिए न्याय की राह अभी लंबी है।
RashtraPress
4 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नासिक TCS धर्मांतरण-अत्याचार मामला क्या है?
यह मामला नासिक स्थित TCS कार्यालय में कार्यरत महिला कर्मचारियों द्वारा सहकर्मियों पर लगाए गए यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण और अत्याचार के आरोपों से जुड़ा है। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ा और HR विभाग ने शिकायतें नज़रअंदाज़ कीं।
किन तीन आरोपियों की जमानत खारिज हुई और क्यों?
नासिक जिला एवं सत्र न्यायालय ने रजा रफीक मेमन, शाहरुख हुसैन कुरैशी और अश्विनी अशोक चेनानी की जमानत खारिज की। अदालत ने आरोपों की गंभीरता और जांच की अधूरी स्थिति को आधार बनाया; इससे पहले निचली अदालत भी इनकार कर चुकी थी।
इस मामले में अब तक कितनी चार्जशीट दाखिल हुई हैं?
SIT ने अब तक दो चार्जशीट दाखिल की हैं। पहली 22 मई को 1,500 पृष्ठों की थी, जो देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में BNS और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज मामले से संबंधित थी। दूसरी 29 मई को मुंबई नाका पुलिस स्टेशन की आठ FIR से जुड़ी दाखिल हुई।
अन्य आरोपियों की जमानत पर सुनवाई कब होगी?
निदा एजाज खान, दानिश एजाज शेख और तौसीफ बिलाल अत्तार की जमानत याचिकाओं पर 6 जुलाई 2026 को सुनवाई निर्धारित है। इन तीनों का नाम दोनों चार्जशीट में दर्ज है।
जमानत खारिज होने के बाद आरोपियों के पास क्या विकल्प है?
बचाव पक्ष के वकीलों ने संकेत दिया है कि जिन तीन आरोपियों की जमानत सत्र न्यायालय ने खारिज की है, वे अब बॉम्बे उच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर करेंगे। उच्च न्यायालय का निर्णय इस मामले की आगामी न्यायिक दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले