16 जुलाई 2026
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नासिक के तीन धार्मिक ट्रस्टों में प्रशासनिक बदलाव: महाराष्ट्र सरकार ने 29 मई को जारी किया राजपत्र

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नासिक के तीन धार्मिक ट्रस्टों में प्रशासनिक बदलाव: महाराष्ट्र सरकार ने 29 मई को जारी किया राजपत्र

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने 29 मई 2026 के असाधारण राजपत्र के ज़रिए नासिक के तीन प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों — श्री कालाराम मंदिर, सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी ट्रस्ट और त्र्यंबकेश्वर संस्थान ट्रस्ट — के प्रशासनिक अधिकार स्थानीय धर्मादाय अधिकारियों को सौंपे, जिससे प्रबंधन में विकेंद्रीकरण और पारदर्शिता लाने का लक्ष्य है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 29 मई 2026 को असाधारण राजपत्र जारी कर नासिक के तीन धार्मिक ट्रस्टों के प्रशासनिक अधिकारों में बदलाव किया।
श्री कालाराम मंदिर संस्थान, पंचवटी के अधिकार अब संयुक्त धर्मादाय आयुक्त-2, नासिक को सौंपे गए।
श्री सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी ट्रस्ट, कलवन तालुका के अधिकार वरिष्ठ धर्मादाय सह आयुक्त, नासिक को हस्तांतरित।
श्री त्र्यंबकेश्वर संस्थान ट्रस्ट (12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल) के अधिकार वरिष्ठ संयुक्त धर्मादाय आयुक्त, नासिक को दिए गए।
यह बदलाव महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 8(2) के तहत किया गया है।

महाराष्ट्र सरकार ने नासिक जिले के तीन प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों के प्रशासनिक ढाँचे में अहम फेरबदल किया है। राज्य के विधि एवं न्याय विभाग द्वारा 29 मई 2026 को जारी असाधारण राजपत्र के ज़रिए इन ट्रस्टों के प्रबंधन से जुड़े कुछ अधिकार धर्मादाय आयुक्त से संबंधित स्थानीय अधिकारियों को हस्तांतरित किए गए हैं। यह निर्णय महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 8(2) के तहत लिया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं के अनुसार, तीनों ट्रस्टों के लिए अलग-अलग अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। पंचवटी स्थित श्री कालाराम मंदिर संस्थान के संबंध में महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम की धारा 50बी(ब) के अंतर्गत धर्मादाय आयुक्त के सभी अधिकार और कर्तव्य अब संयुक्त धर्मादाय आयुक्त-2, नासिक को सौंपे गए हैं।

कलवन तालुका स्थित श्री सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी ट्रस्ट के मामले में धर्मादाय आयुक्त के अधिकार अब वरिष्ठ धर्मादाय सह आयुक्त, नासिक को हस्तांतरित किए गए हैं। इस ट्रस्ट से जुड़े धारा 50बी(ब) के अंतर्गत सभी प्रशासनिक और वैधानिक कार्य उक्त अधिकारी के माध्यम से संपादित होंगे।

त्र्यंबकेश्वर ट्रस्ट में बदलाव

देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल त्र्यंबकेश्वर मंदिर का संचालन करने वाले श्री त्र्यंबकेश्वर संस्थान ट्रस्ट के संबंध में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है। अधिसूचना के अनुसार, इस ट्रस्ट से जुड़े धर्मादाय आयुक्त के अधिकारों और कर्तव्यों का निर्वहन अब वरिष्ठ संयुक्त धर्मादाय आयुक्त, नासिक द्वारा किया जाएगा। गौरतलब है कि त्र्यंबकेश्वर मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसके प्रशासनिक मामले राज्य सरकार की निगरानी में रहे हैं।

विकेंद्रीकरण का उद्देश्य

महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि अधिकारों के इस विकेंद्रीकरण से ट्रस्टों के प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि इससे धार्मिक संस्थानों के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ेगी।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में धार्मिक ट्रस्टों के प्रशासन को लेकर पारदर्शिता की माँग लंबे समय से उठती रही है। अधिकारों का स्थानीय स्तर पर हस्तांतरण नासिक जैसे तीर्थ-नगर के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं।

आगे क्या

नई व्यवस्था के तहत संबंधित अधिकारी अपने-अपने ट्रस्टों के प्रशासनिक और वैधानिक कार्यों का संचालन करेंगे। माना जा रहा है कि इस बदलाव से स्थानीय स्तर पर शिकायतों के निपटारे और प्रबंधन संबंधी निर्णयों में तेज़ी आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — क्या स्थानीय अधिकारियों के पास पर्याप्त संसाधन और स्वायत्तता होगी? त्र्यंबकेश्वर और सप्तश्रृंगी जैसे ट्रस्टों में करोड़ों रुपये का चढ़ावा और भूमि-संपत्ति प्रबंधन शामिल है, जो पहले भी विवादों का विषय रहा है। अधिकारों का हस्तांतरण तभी अर्थपूर्ण होगा जब इसके साथ स्पष्ट जवाबदेही तंत्र और ऑडिट प्रक्रियाएँ भी सुनिश्चित की जाएँ।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार ने नासिक के धार्मिक ट्रस्टों में क्या बदलाव किया है?
महाराष्ट्र सरकार ने 29 मई 2026 के असाधारण राजपत्र के ज़रिए नासिक के तीन प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों — श्री कालाराम मंदिर संस्थान, श्री सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी ट्रस्ट और श्री त्र्यंबकेश्वर संस्थान ट्रस्ट — के प्रशासनिक अधिकार धर्मादाय आयुक्त से स्थानीय धर्मादाय अधिकारियों को हस्तांतरित किए हैं। यह बदलाव महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 8(2) के तहत किया गया है।
श्री त्र्यंबकेश्वर संस्थान ट्रस्ट के प्रशासन में क्या परिवर्तन हुआ?
अधिसूचना के अनुसार, श्री त्र्यंबकेश्वर संस्थान ट्रस्ट से जुड़े धर्मादाय आयुक्त के सभी अधिकार और कर्तव्य अब वरिष्ठ संयुक्त धर्मादाय आयुक्त, नासिक द्वारा निभाए जाएंगे। त्र्यंबकेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है।
श्री कालाराम मंदिर संस्थान के अधिकार किसे सौंपे गए हैं?
पंचवटी स्थित श्री कालाराम मंदिर संस्थान के संबंध में महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम की धारा 50बी(ब) के अंतर्गत धर्मादाय आयुक्त के सभी अधिकार और कर्तव्य अब संयुक्त धर्मादाय आयुक्त-2, नासिक को सौंपे गए हैं।
इस विकेंद्रीकरण से धार्मिक ट्रस्टों को क्या फायदा होगा?
सरकार का मानना है कि अधिकारों के स्थानीय स्तर पर हस्तांतरण से ट्रस्टों के प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, निर्णय प्रक्रिया प्रभावी बनेगी और वित्तीय प्रबंधन में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ेगी। शिकायतों के स्थानीय स्तर पर त्वरित निपटारे की भी उम्मीद जताई गई है।
श्री सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी ट्रस्ट के अधिकार किसे मिले हैं?
कलवन तालुका स्थित श्री सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी ट्रस्ट के मामले में धर्मादाय आयुक्त के अधिकार वरिष्ठ धर्मादाय सह आयुक्त, नासिक को सौंपे गए हैं। धारा 50बी(ब) के अंतर्गत आने वाले सभी प्रशासनिक और वैधानिक कार्य अब इन्हीं अधिकारी के माध्यम से होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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