नासिक के तीन धार्मिक ट्रस्टों में प्रशासनिक बदलाव: महाराष्ट्र सरकार ने 29 मई को जारी किया राजपत्र
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने नासिक जिले के तीन प्रमुख धार्मिक ट्रस्टों के प्रशासनिक ढाँचे में अहम फेरबदल किया है। राज्य के विधि एवं न्याय विभाग द्वारा 29 मई 2026 को जारी असाधारण राजपत्र के ज़रिए इन ट्रस्टों के प्रबंधन से जुड़े कुछ अधिकार धर्मादाय आयुक्त से संबंधित स्थानीय अधिकारियों को हस्तांतरित किए गए हैं। यह निर्णय महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम, 1950 की धारा 8(2) के तहत लिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचनाओं के अनुसार, तीनों ट्रस्टों के लिए अलग-अलग अधिकारियों को नई जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं। पंचवटी स्थित श्री कालाराम मंदिर संस्थान के संबंध में महाराष्ट्र सार्वजनिक न्यास अधिनियम की धारा 50बी(ब) के अंतर्गत धर्मादाय आयुक्त के सभी अधिकार और कर्तव्य अब संयुक्त धर्मादाय आयुक्त-2, नासिक को सौंपे गए हैं।
कलवन तालुका स्थित श्री सप्तश्रृंगी निवासिनी देवी ट्रस्ट के मामले में धर्मादाय आयुक्त के अधिकार अब वरिष्ठ धर्मादाय सह आयुक्त, नासिक को हस्तांतरित किए गए हैं। इस ट्रस्ट से जुड़े धारा 50बी(ब) के अंतर्गत सभी प्रशासनिक और वैधानिक कार्य उक्त अधिकारी के माध्यम से संपादित होंगे।
त्र्यंबकेश्वर ट्रस्ट में बदलाव
देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल त्र्यंबकेश्वर मंदिर का संचालन करने वाले श्री त्र्यंबकेश्वर संस्थान ट्रस्ट के संबंध में भी महत्वपूर्ण परिवर्तन किया गया है। अधिसूचना के अनुसार, इस ट्रस्ट से जुड़े धर्मादाय आयुक्त के अधिकारों और कर्तव्यों का निर्वहन अब वरिष्ठ संयुक्त धर्मादाय आयुक्त, नासिक द्वारा किया जाएगा। गौरतलब है कि त्र्यंबकेश्वर मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसके प्रशासनिक मामले राज्य सरकार की निगरानी में रहे हैं।
विकेंद्रीकरण का उद्देश्य
महाराष्ट्र सरकार का मानना है कि अधिकारों के इस विकेंद्रीकरण से ट्रस्टों के प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी। सरकार की ओर से यह भी कहा गया है कि इससे धार्मिक संस्थानों के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता तथा जवाबदेही बढ़ेगी।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में धार्मिक ट्रस्टों के प्रशासन को लेकर पारदर्शिता की माँग लंबे समय से उठती रही है। अधिकारों का स्थानीय स्तर पर हस्तांतरण नासिक जैसे तीर्थ-नगर के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहाँ प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं।
आगे क्या
नई व्यवस्था के तहत संबंधित अधिकारी अपने-अपने ट्रस्टों के प्रशासनिक और वैधानिक कार्यों का संचालन करेंगे। माना जा रहा है कि इस बदलाव से स्थानीय स्तर पर शिकायतों के निपटारे और प्रबंधन संबंधी निर्णयों में तेज़ी आएगी।