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नवरात्रि का तीसरा दिन: तृतीया तिथि पर गणगौर का महत्व और शुभ-अशुभ समय

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नवरात्रि का तीसरा दिन: तृतीया तिथि पर गणगौर का महत्व और शुभ-अशुभ समय

सारांश

नवरात्रि का तीसरा दिन खास है क्योंकि इस दिन गणगौर का पर्व मनाया जाता है। जानें इस दिन के शुभ-अशुभ समय और पूजा विधि के बारे में।

मुख्य बातें

नवरात्रि का तीसरा दिन विशेष पूजन का दिन है।
गणगौर में शिव-पार्वती की पूजा का महत्व है।
शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक है।
अशुभ समय में कोई नया कार्य न करें।
ब्रज क्षेत्र में गणगौर की विशेष मान्यता है।

नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। शक्ति की पूजा के लिए समर्पित नवरात्रि का तीसरा दिन शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन को विशेष रूप से गणगौर के रूप में जाना जाता है, जिसमें देवाधिदेव महादेव और माता गौरा का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शिव-पार्वती की आराधना से कन्याओं को मनचाहा वर और विवाहिताओं को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

दृक पंचांग के अनुसार, शनिवार को चैत्र मास, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है, जिसे गणगौर के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से ब्रज क्षेत्र में प्रसिद्ध है। गणगौर में 'गण' का अर्थ भगवान शिव और 'गौर' का अर्थ माता पार्वती से है। विभिन्न क्षेत्रों में शिव को 'ईसर जी' और पार्वती को 'गौरा माता' या 'गवरजा जी' के नाम से पूजा जाता है। इस व्रत और पूजन का विशेष महत्व है। अविवाहित कन्याएं पूर्ण श्रद्धा से व्रत रखकर मनचाहा वर प्राप्ति की कामना करती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए पूजा करती हैं। गणगौर की पूजा में महिलाएं विधि-विधान से पूजन करती हैं।

नवरात्र के तीसरे दिन सूर्योदय 6:24 बजे और सूर्यास्त शाम 6:33 बजे होगा। शुक्ल तृतीया रात 11:56 बजे तक है। नक्षत्र अश्विनी 21 तारीख को पूरे दिन और 22 मार्च की रात 12:37 बजे तक रहेगा। योग इन्द्र शाम 7:01 बजे तक और करण तैतिल दोपहर 1:14 बजे तक है।

21 मार्च के शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:49 बजे से 5:37 बजे तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:04 बजे से 12:53 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2:30 बजे से 3:18 बजे तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6:32 बजे से 6:55 बजे तक है। वहीं, अमृत काल शाम 5:58 बजे से 7:27 बजे तक रहेगा।

अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। इस दिन राहुकाल सुबह 9:26 बजे से 10:57 बजे तक, यमगंड दोपहर 2:00 बजे से 3:31 बजे तक और गुलिक काल सुबह 6:24 बजे से 7:55 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई नया या शुभ कार्य करना वर्जित रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो शक्ति और समर्पण का प्रतीक है। यह दिन न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गणगौर का पर्व कब मनाया जाता है?
गणगौर का पर्व नवरात्रि के तीसरे दिन मनाया जाता है।
गणगौर की पूजा में क्या किया जाता है?
गणगौर की पूजा में महिलाएं विधि-विधान से पूजा करती हैं और अपने पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य की कामना करती हैं।
इस दिन शुभ समय कब है?
इस दिन का शुभ समय सुबह 4:49 बजे से लेकर 7:27 बजे तक है।
गणगौर का महत्व क्या है?
गणगौर का महत्व कन्याओं को मनचाहा वर और विवाहिताओं को सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए है।
राष्ट्र प्रेस
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