नीदरलैंड्स युद्धपोत HNLMS डी रूयटर कोच्चि पहुँचा, मेजर जनरल रॉब डी विट के नेतृत्व में उच्चस्तरीय नौसैनिक प्रतिनिधिमंडल

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नीदरलैंड्स युद्धपोत HNLMS डी रूयटर कोच्चि पहुँचा, मेजर जनरल रॉब डी विट के नेतृत्व में उच्चस्तरीय नौसैनिक प्रतिनिधिमंडल

सारांश

रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना का अत्याधुनिक फ्रिगेट एचएनएलएमएस डी रूयटर कोच्चि पहुँचा है — और इसके साथ आया है एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, जो भारत-नीदरलैंड्स समुद्री संबंधों को नई गहराई देने की कोशिश में है। पाँच महीने की इंडो-पैसिफिक तैनाती के बीच यह दौरा प्रशिक्षण, शिपयार्ड सहयोग और सामरिक समन्वय — तीनों मोर्चों पर साझेदारी को आगे बढ़ाने का संकेत है।

मुख्य बातें

एचएनएलएमएस डी रूयटर (F804) , डी जेवेन प्रोविन्सियन श्रेणी का फ्रिगेट, 6 मई 2026 को कोच्चि बंदरगाह पहुँचा।
रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना के उप कमांडर मेजर जनरल रॉब डी विट और राजदूत मारिसा गेरार्ड्स के नेतृत्व में उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दौरे पर।
प्रतिनिधिमंडल ने रियर एडमिरल प्रकाश गोपालन से मुलाकात कर समुद्री सहयोग, प्रशिक्षण विस्तार पर चर्चा की।
युद्धपोत इंडो-पैसिफिक में पाँच महीने की तैनाती पर है और कोच्चि के बाद पैसेज एक्सरसाइज में भाग लेगा।
प्रतिनिधिमंडल कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का दौरा कर औद्योगिक सहयोग के अवसर तलाशेगा।
4 मई को नीदरलैंड्स के राष्ट्रीय स्मरण दिवस पर दक्षिणी नौसैनिक कमान के युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना का अत्याधुनिक फ्रिगेट एचएनएलएमएस डी रूयटर (F804) 6 मई 2026 को कोच्चि बंदरगाह पहुँचा, जहाँ भारतीय नौसेना के फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट ने इसे औपचारिक एस्कॉर्ट प्रदान किया। यह युद्धपोत डी जेवेन प्रोविन्सियन श्रेणी का है और वर्तमान में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पाँच महीने की लंबी तैनाती पर है। इस दौरे को भारत और नीदरलैंड्स के बीच गहराते समुद्री रक्षा संबंधों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन

युद्धपोत के साथ नीदरलैंड्स की राजदूत मारिसा गेरार्ड्स के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल दक्षिणी नौसैनिक कमान, कोच्चि के दौरे पर है। रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना के उप कमांडर मेजर जनरल (रॉयल मरीन्स) रॉब डी विट भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। कोच्चि बंदरगाह पर पहुँचने पर भारतीय नौसैनिक बैंड के साथ युद्धपोत और नीदरलैंड्स के अधिकारियों का औपचारिक स्वागत किया गया।

द्विपक्षीय वार्ता और सहयोग के मुद्दे

नौसेना के अनुसार, नीदरलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना की दक्षिणी नौसैनिक कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल प्रकाश गोपालन से मुलाकात की। इस बैठक में समुद्री क्षेत्र में आपसी सहयोग बढ़ाने, प्रशिक्षण के अवसरों का विस्तार करने और साझा हितों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। गौरतलब है कि मेजर जनरल रॉब डी विट इससे पहले फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम में आयोजित मिलन-26 नौसैनिक सम्मेलन में भी भाग ले चुके हैं, जहाँ वे इंडियन ओशन नेवल संगोष्ठी के प्रमुखों के सम्मेलन में शामिल हुए थे।

राष्ट्रीय स्मरण दिवस पर श्रद्धांजलि

नीदरलैंड्स के राष्ट्रीय स्मरण दिवस (4 मई) के अवसर पर मेजर जनरल रॉब डी विट और राजदूत मारिसा गेरार्ड्स ने दक्षिणी नौसैनिक कमान के युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। नौसेना ने इसे एक भावपूर्ण और सम्मानजनक क्षण बताया, जो दोनों देशों के बीच साझा मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है।

प्रशिक्षण संस्थानों और शिपयार्ड का दौरा

प्रतिनिधिमंडल के कार्यक्रम में दक्षिणी नौसैनिक कमान के विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों का दौरा शामिल है, जहाँ सदस्य आधुनिक सिमुलेटर और अत्याधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं का अवलोकन करेंगे। इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडल कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का भी दौरा करेगा, जहाँ भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं को समझने और औद्योगिक सहयोग के नए अवसरों की तलाश की जाएगी। दोनों नौसेनाओं के कर्मियों के बीच पेशेवर और सामाजिक स्तर पर भी कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

पैसेज एक्सरसाइज और आगे की राह

कोच्चि से प्रस्थान के बाद एचएनएलएमएस डी रूयटर भारतीय नौसेना के एक जहाज के साथ पैसेज एक्सरसाइज में भाग लेगा। नौसेना के अनुसार इस अभ्यास से दोनों देशों के बीच सामरिक समन्वय और परिचालन क्षमता को और मजबूती मिलेगी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपनी समुद्री साझेदारियों को व्यापक रूप से सुदृढ़ कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो चीन की समुद्री उपस्थिति के जवाब में तेज़ हो रही है। नीदरलैंड्स का कोचीन शिपयार्ड दौरा संकेत देता है कि बातचीत केवल अभ्यास तक सीमित नहीं, बल्कि औद्योगिक और तकनीकी साझेदारी की ओर भी बढ़ रही है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'आत्मनिर्भर भारत' रक्षा नीति के तहत जहाज निर्माण में विदेशी निवेश और तकनीक हस्तांतरण को प्राथमिकता दे रहा है। सवाल यह है कि क्या ये दौरे ठोस समझौतों में बदलेंगे या केवल कूटनीतिक संकेतों की श्रृंखला बनकर रह जाएंगे।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एचएनएलएमएस डी रूयटर युद्धपोत भारत क्यों आया है?
रॉयल नीदरलैंड्स नौसेना का यह फ्रिगेट इंडो-पैसिफिक में पाँच महीने की तैनाती के तहत कोच्चि पहुँचा है। यहाँ यह भारत सहित विभिन्न साझेदार देशों के साथ समुद्री अभ्यासों में शामिल होगा और द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग को मजबूत करेगा।
नीदरलैंड्स के प्रतिनिधिमंडल ने कोच्चि में किनसे मुलाकात की?
प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना की दक्षिणी नौसैनिक कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल प्रकाश गोपालन से मुलाकात की। बैठक में समुद्री सहयोग, प्रशिक्षण विस्तार और साझा हितों पर चर्चा हुई।
मेजर जनरल रॉब डी विट पहले भी भारत आ चुके हैं?
हाँ, मेजर जनरल रॉब डी विट फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम में आयोजित मिलन-26 नौसैनिक सम्मेलन में भाग ले चुके हैं। उस दौरान वे इंडियन ओशन नेवल संगोष्ठी के प्रमुखों के सम्मेलन में शामिल हुए थे।
कोच्चि दौरे के बाद HNLMS डी रूयटर क्या करेगा?
कोच्चि से प्रस्थान के बाद एचएनएलएमएस डी रूयटर भारतीय नौसेना के एक जहाज के साथ पैसेज एक्सरसाइज में भाग लेगा। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सामरिक समन्वय और परिचालन क्षमता को मजबूत करना है।
कोचीन शिपयार्ड दौरे का क्या महत्व है?
नीदरलैंड्स का प्रतिनिधिमंडल कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का दौरा कर भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं को समझेगा। इसका उद्देश्य औद्योगिक सहयोग के नए अवसर तलाशना है, जो दोनों देशों के रक्षा-औद्योगिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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