3 जुलाई 2026
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नोएडा बाल चिकित्सा संस्थान में तीन नए सुपर स्पेशियलिटी विभाग मंजूर, इमरजेंसी सेवाएं होंगी शुरू

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नोएडा बाल चिकित्सा संस्थान में तीन नए सुपर स्पेशियलिटी विभाग मंजूर, इमरजेंसी सेवाएं होंगी शुरू

सारांश

उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा के बाल चिकित्सा संस्थान में इमरजेंसी, पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी और क्रिटिकल केयर के तीन नए विभागों को मंजूरी दी है। 13वीं शासी निकाय बैठक में लिए गए इन फैसलों से संस्थान सुपर स्पेशियलिटी बाल स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख केंद्र बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 जुलाई 2026 को नोएडा के बाल चिकित्सा एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान में तीन नए सुपर स्पेशियलिटी विभागों को मंजूरी दी।
मंजूर विभाग हैं — इमरजेंसी , पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी और पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर मेडिसिन ।
विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ जूनियर व सीनियर रेजीडेंट के नए पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई।
पीडियाट्रिक रीजनल एनेस्थीसिया फेलोशिप कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई।
नोएडा प्राधिकरण को संस्थान के निकट अतिरिक्त भूमि चिन्हित कर शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए।
बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव एस.पी.
गोयल ने की और 20 एजेंडा बिंदुओं पर चर्चा हुई।

उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा स्थित बाल चिकित्सा एवं स्नातकोत्तर शैक्षणिक संस्थान को सुपर स्पेशियलिटी बाल स्वास्थ्य सेवाओं के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है। 3 जुलाई 2026 को मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में आयोजित संस्थान की 13वीं शासी निकाय बैठक में इमरजेंसी, पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी और पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर मेडिसिन — तीन नए विभागों की स्थापना को औपचारिक स्वीकृति दी गई।

मुख्य घटनाक्रम

शासी निकाय की बैठक में चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, चिकित्सा शिक्षा और शोध गतिविधियों को सुदृढ़ करने से संबंधित 20 महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक में इमरजेंसी (आपातकालीन) विभाग, पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी विभाग और पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग शुरू करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई। इन विभागों के संचालन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ-साथ जूनियर और सीनियर रेजीडेंट पदों के सृजन को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

शिक्षा और शोध को नई गति

शासी निकाय ने पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए आवश्यक चिकित्सकीय पदों के सृजन को भी मंजूरी दी। इसके अतिरिक्त, पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विभाग में पीडियाट्रिक रीजनल एनेस्थीसिया फेलोशिप कार्यक्रम शुरू करने की अनुमति दी गई। यह कार्यक्रम सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देने और विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करने में सहायक होगा।

आम जनता और बच्चों पर असर

इन निर्णयों से संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और क्षमता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। गंभीर एवं आपातकालीन स्थिति में उपचार के लिए आने वाले बच्चों को अब एक ही परिसर में अत्याधुनिक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब उत्तर प्रदेश में बाल स्वास्थ्य सेवाओं की माँग और उनकी उपलब्धता के बीच की खाई को पाटने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है।

भविष्य के विस्तार की योजना

शासी निकाय ने संस्थान के दीर्घकालिक विस्तार की आवश्यकता पर भी विचार किया। इस संदर्भ में नोएडा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए कि संस्थान के निकट उपलब्ध उपयुक्त अतिरिक्त भूमि का शीघ्र चिन्हांकन कर उसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाए। इससे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप संस्थान का योजनाबद्ध विस्तार सुनिश्चित किया जा सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति की होगी। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेषज्ञ पदों की स्वीकृति और उनकी वास्तविक भर्ती के बीच अक्सर लंबा अंतराल देखा गया है। गौरतलब है कि पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर और इमरजेंसी सेवाएं वे क्षेत्र हैं जहाँ देरी सीधे बच्चों की जान पर असर डालती है। नोएडा प्राधिकरण को भूमि चिन्हांकन के निर्देश भविष्योन्मुखी सोच दर्शाते हैं, परंतु बिना समयबद्ध रोडमैप के ये घोषणाएं कागज़ी संकल्प बनकर रह सकती हैं।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नोएडा बाल चिकित्सा संस्थान में कौन-से तीन नए विभाग मंजूर किए गए हैं?
शासी निकाय की बैठक में इमरजेंसी (आपातकालीन) विभाग, पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजी विभाग और पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग शुरू करने को मंजूरी दी गई है। इन तीनों विभागों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों सहित जूनियर व सीनियर रेजीडेंट के पद भी सृजित किए जाएंगे।
13वीं शासी निकाय बैठक की अध्यक्षता किसने की और इसमें क्या हुआ?
बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने की। इसमें चिकित्सा सेवाओं के विस्तार, शिक्षा और शोध से जुड़े 20 महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर चर्चा हुई और कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
पीडियाट्रिक रीजनल एनेस्थीसिया फेलोशिप कार्यक्रम से क्या फायदा होगा?
यह फेलोशिप कार्यक्रम पीडियाट्रिक एनेस्थीसिया विभाग में शुरू किया जाएगा। इससे सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा और बाल चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार होंगे।
संस्थान के विस्तार के लिए क्या निर्देश दिए गए हैं?
नोएडा प्राधिकरण को निर्देश दिए गए हैं कि संस्थान के निकट उपलब्ध उपयुक्त अतिरिक्त भूमि का शीघ्र चिन्हांकन कर उसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाए। इससे भविष्य की जरूरतों के अनुसार संस्थान का योजनाबद्ध विस्तार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इन नए विभागों से नोएडा और आसपास के बच्चों को कैसे फायदा होगा?
इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर विभागों की स्थापना से गंभीर बीमारियों से पीड़ित बच्चों को एक ही परिसर में अत्याधुनिक और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी। अभी तक ऐसे मामलों में मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था, जिससे कीमती समय नष्ट होता था।
राष्ट्र प्रेस
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