ओडिशा कैबिनेट ने 11 प्रस्तावों को स्वीकृति दी, राज्यभर में आधुनिक बस स्टैंड का निर्माण होगा
सारांश
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भुवनेश्वर, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। ओडिशा कैबिनेट ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पांच विभागों के अंतर्गत 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी है।
कैबिनेट के इस निर्णय में सबसे प्रमुख 'अटल बस स्टैंड' योजना के तहत पूरे राज्य में आधुनिक सुविधाओं से लैस बस स्टैंडों का निर्माण करना शामिल है।
सरकार ने जानकारी दी कि ओडिशा में सार्वजनिक परिवहन ढांचे और सुविधाओं को सुधारने के लिए 'अटल बस स्टैंड' योजना को लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रदेश में बस स्टैंडों का निर्माण, विकास, नवीनीकरण, संचालन, रखरखाव और प्रबंधन करना है।
इस योजना के जरिए ओडिशा के सभी सार्वजनिक बस स्टैंडों को एकीकृत किया जाएगा, जिसमें पहले से मौजूद योजनाएं और शहरी स्थानीय निकायों के तहत आने वाले बस स्टैंड भी शामिल हैं। इससे पूरे राज्य में एक समान मानक और बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा।
अटल बस स्टैंड योजना के अंतर्गत जिला मुख्यालयों, उप-मंडल मुख्यालयों, ब्लॉक मुख्यालयों, शहरी स्थानीय निकायों, पर्यटन स्थलों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर बस स्टैंड विकसित किए जाएंगे।
बस स्टैंडों को जरूरत के अनुसार तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा, जो उस क्षेत्र में बस यातायात और सुविधाओं की आवश्यकता पर आधारित होगा।
यह योजना ओडिशा राज्य सड़क परिवहन निगम द्वारा वाणिज्य एवं परिवहन विभाग के तहत लागू की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2031–32 तक कुल 3,400 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों पर जानकारी देते हुए ओडिशा के मुख्य सचिव अनु गर्ग ने बताया कि जल संसाधन विभाग से जुड़े पांच बड़े प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी गई है, जो राज्य के बुनियादी ढांचे और किसानों के सशक्तिकरण पर सरकार के ध्यान केंद्रित करने को दर्शाते हैं।
उन्होंने बताया कि इनमें से एक प्रमुख योजना के तहत कटक जिले में 135 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजना को स्वीकृति दी गई है, जिससे 76 गांवों की 3,641 हेक्टेयर भूमि को भूमिगत पाइपलाइन प्रणाली के जरिए सिंचाई की सुविधा मिलेगी। यह परियोजना सूक्ष्म सिंचाई को भी बढ़ावा देगी।
इस परियोजना के अंतर्गत कटक जिले के खरड़ गांव के पास हदुआ नदी पर एक जलाशय का निर्माण किया जाएगा और एक व्यापक वितरण प्रणाली विकसित की जाएगी, ताकि नरसिंहपुर, बादम्बा और टिगिरिया ब्लॉकों के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती योग्य भूमि को सुनिश्चित सिंचाई मिल सके।
पेयजल प्रबंधन पर जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि पंचायती राज और पेयजल विभाग ने ग्रामीण पेयजल आपूर्ति के लिए एक व्यापक संचालन एवं रखरखाव नीति-2026 शुरू की है।
इस नीति में ग्राम स्तर की समितियों, ग्राम पंचायतों और स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी होगी, ताकि पानी की गुणवत्ता, वितरण और ढांचे के रखरखाव को बेहतर बनाया जा सके।
ऊर्जा क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण ढांचा परियोजना को स्वीकृति दी गई है, जिसके अंतर्गत क्योंझर जिले के बासुदेवपुर में 2x500 एमवीए ग्रिड सबस्टेशन की स्थापना की जाएगी, जिसकी लागत 1,647 करोड़ रुपए होगी।
यह परियोजना तीन वर्षों में पूरी होगी और इससे क्योंझर और सुंदरगढ़ जिलों में बिजली की आपूर्ति को मजबूत किया जाएगा।
मुख्य सचिव गर्ग ने कहा कि ये कैबिनेट के फैसले राज्य सरकार के बुनियादी ढांचे के विकास, सिंचाई विस्तार, बेहतर सार्वजनिक सेवाओं और प्रशासनिक सुधारों को प्राथमिकता देने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।