साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण में MoSPI की भूमिका पर राव इंद्रजीत सिंह का राज्यसभा में बयान
सारांश
मुख्य बातें
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने 20 जुलाई को राज्यसभा में बताया कि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) प्रमुख आर्थिक और सामाजिक सूचकांकों का संकलन करता है और घरेलू सर्वेक्षणों के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता से जुड़ी नीतियों के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मंत्रालय सरकार की साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण प्रक्रिया की रीढ़ है।
मंत्रालय के प्रमुख सांख्यिकीय कार्य
राव इंद्रजीत सिंह ने सदन को बताया कि MoSPI सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुमान, मासिक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) तैयार करता है। इसके अतिरिक्त मंत्रालय श्रम बल, सामाजिक उपभोग, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषयों पर नियमित घरेलू सर्वेक्षणों के ज़रिए आधिकारिक आँकड़े और प्रशासनिक डेटा भी जारी करता है।
मंत्री ने कहा, 'ये सर्वेक्षण सामाजिक और आर्थिक विकास के विभिन्न आयामों पर साक्ष्य उपलब्ध कराते हैं, जो लोगों के जीवन की गुणवत्ता का आकलन करने में महत्वपूर्ण हैं।'
सतत विकास लक्ष्यों की निगरानी में भूमिका
MoSPI सतत विकास लक्ष्यों (SDG) के लिए राष्ट्रीय संकेतक ढाँचे की निगरानी करने वाला नोडल मंत्रालय भी है। इस ढाँचे में स्वास्थ्य, शिक्षा, लैंगिक समानता, पर्यावरणीय स्थिरता और नागरिकों के कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण संकेतक शामिल हैं।
राव इंद्रजीत सिंह ने कहा, 'ये संकेतक और विभिन्न आधिकारिक सांख्यिकीय सर्वेक्षणों से प्राप्त आँकड़े साक्ष्य-आधारित नीतियाँ बनाने में मदद करते हैं और नागरिकों के समग्र कल्याण में हुई प्रगति का आकलन करने में सक्षम बनाते हैं।'
सेवा उत्पादन सूचकांक: एक ऐतिहासिक कदम
गौरतलब है कि इसी महीने मंत्रालय ने घोषणा की थी कि भारत के पहले सेवा उत्पादन सूचकांक की रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया गया है। यह देश के सेवा क्षेत्र के अधिक सटीक और व्यापक आकलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत के सकल मूल्य वर्धन में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है। यह क्षेत्र बड़े पैमाने पर रोज़गार उपलब्ध कराता है और आर्थिक वृद्धि, निवेश तथा निर्यात का प्रमुख इंजन बन चुका है।
GST डेटा से सांख्यिकीय प्रणाली को मज़बूती
मंत्रालय के अनुसार, वस्तु एवं सेवा कर (GST) के आँकड़ों की उपलब्धता ने भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को काफी सुदृढ़ किया है। इससे लाखों कारोबारियों द्वारा रिपोर्ट की जाने वाली बाहरी आपूर्ति की मासिक जानकारी प्राप्त होती है, जिससे आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक आकलन संभव हो पाया है।
आगे चलकर सेवा उत्पादन सूचकांक के लागू होने से नीति-निर्माताओं को सेवा क्षेत्र की वास्तविक स्थिति की बेहतर समझ मिलेगी, जो भारत की अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।