एसएसबी पेपर लीक पर उमर अब्दुल्ला का जेपी नड्डा को करारा जवाब: '2022 में एलजी चला रहे थे जम्मू-कश्मीर'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 24 जुलाई 2024 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के उस दावे का तीखा खंडन किया, जिसमें नड्डा ने एसएसबी पेपर लीक के लिए जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस-कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि यह घटना 2022 की है, जब राज्य में उपराज्यपाल (एलजी) का शासन था, न कि उनकी पार्टी की सरकार।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का पलटवार
गुरुवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लिखा, 'जेपी नड्डा जी, जम्मू-कश्मीर में एसएसबी पेपर लीक के बारे में आपकी बात बिल्कुल सही है, लेकिन आपने तारीख गलत बताई है। यह 2022 की बात है।' उन्होंने आगे कहा कि उस समय सत्ता में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस की नहीं, बल्कि लेफ्टिनेंट गवर्नर के नेतृत्व में सरकार थी।
उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा, 'इस नाकामी की तरफ सबका ध्यान दिलाने के लिए आपका धन्यवाद।' उन्होंने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की उन टिप्पणियों और आदेशों का भी उल्लेख किया जो इस मामले से जुड़े थे, और नड्डा से माँग की कि वे अपनी अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस में हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट के बारे में जानकारी साझा करें।
जेपी नड्डा की प्रेस कॉन्फ्रेंस और दावे
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने बुधवार देर शाम नीट पेपर लीक विवाद पर विपक्ष के हंगामे के संदर्भ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस दौरान उन्होंने गैर-एनडीए शासित राज्यों में पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख किया और जम्मू-कश्मीर को भी इस सूची में शामिल किया। नड्डा ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (SSB) परीक्षा का पेपर लीक हुआ, जहाँ 'कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार है।'
नड्डा ने हिमाचल प्रदेश, झारखंड, तेलंगाना, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पंजाब, केरल और कर्नाटक में भी पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ियों का उल्लेख किया।
राहुल गांधी पर नड्डा का सवाल
नड्डा ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में करीब 150 पेपर लीक का उल्लेख किया, लेकिन उन्होंने यूपीए और यूपीए-समर्थित सरकारों के दौरान हुई लीक घटनाओं पर चुप्पी साधी। नड्डा ने कहा, 'जाँच के आधार पर सत्य सामने लाया जाएगा, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।'
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक को लेकर संसद में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक जारी है। उमर अब्दुल्ला का यह पलटवार राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर केंद्र द्वारा नियुक्त एलजी प्रशासन की जवाबदेही का सवाल उठाता है। गौरतलब है कि 2022 में जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य का दर्जा खो चुका था और केंद्र शासित प्रदेश के रूप में एलजी के अधीन था। हाईकोर्ट की टिप्पणियों और हाई-लेवल कमेटी की रिपोर्ट के भविष्य पर अभी भी स्पष्टता नहीं है, जो इस विवाद को और गहरा बनाती है।