पंचकूला स्कूल हिंसा: पीजीआईएमईआर से डिस्चार्ज हुई 6 वर्षीय पीड़िता, परिवार को मिली राहत
सारांश
मुख्य बातें
पंचकूला के एक स्कूल में सहपाठी द्वारा बेरहमी से पीटे जाने के बाद गंभीर रूप से घायल हुई 6 वर्षीय बच्ची को 4 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) से छुट्टी दे दी गई। 28 अक्टूबर को भर्ती कराई गई इस बच्ची के सफलतापूर्वक डिस्चार्ज होने से उसके परिवार और समाज ने राहत की सांस ली है।
क्या था पूरा घटनाक्रम
हरियाणा के पंचकूला के सेक्टर 20 स्थित एक स्कूल में तीसरी कक्षा के एक छात्र ने विशेष जरूरतों वाली इस बच्ची के साथ क्रूर मारपीट की थी। आरोप के अनुसार, उस छात्र ने कई बार बच्ची का सिर दीवार पर दे मारा और जब वह खून से लथपथ होकर क्लासरूम के फर्श पर बेहोश पड़ी थी, तब भी ईंट से उस पर हमला किया। घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था।
सरकार और अस्पताल की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाने और राज्यभर के स्कूलों में सुरक्षा का व्यापक ऑडिट कराने का वादा किया था। पीजीआईएमईआर ने भी अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बच्ची के परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं डाला और उसके निजी कमरे का खर्च भी संस्थान ने वहन किया, ताकि परिवार पूरी तरह बच्ची के स्वास्थ्य लाभ पर ध्यान दे सके।
पीजीआईएमईआर निदेशक की प्रतिक्रिया
पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल, जो अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान स्वयं बच्ची का हाल जानने गए थे, ने डिस्चार्ज पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'इस बच्ची का सुरक्षित डिस्चार्ज होना हम सभी के लिए बहुत राहत और खुशी की बात है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने हमें अंदर तक झकझोर दिया था। हमारी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि उसे पूरी संवेदना, आराम और भरोसे के माहौल में बेहतरीन चिकित्सा देखभाल मिले।'
उन्होंने आगे कहा, 'पीजीआईएमईआर में हमारा दृढ़ विश्वास है कि अच्छी स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।' प्रो. लाल ने इलाज के दौरान डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों द्वारा दिखाए गए समर्पण और संवेदनशीलता की भी सराहना की।
चिकित्सा दल का समन्वित प्रयास
बच्ची के उपचार में बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर जे.के. महाजन के मार्गदर्शन में एक समन्वित टीम ने काम किया। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. रमन शर्मा ने ट्रॉमा संबंधी पहलुओं का समन्वय किया, जबकि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रोफेसर अशोक कुमार ने संस्थागत सहयोग सुनिश्चित किया।
प्रोफेसर महाजन ने कहा, 'इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद एक छोटे बच्चे के इलाज के लिए न केवल क्लिनिकल विशेषज्ञता, बल्कि संवेदनशीलता, धैर्य और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण की भी आवश्यकता होती है।' उन्होंने आशा जताई कि बच्ची जल्द ही अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आएगी।
आगे क्या होगा
यह मामला हरियाणा के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की देखभाल को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। राज्य सरकार के सुरक्षा ऑडिट के वादे के क्रियान्वयन पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। बच्ची के परिवार और पीजीआईएमईआर दोनों ने उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।