4 नवंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

पंचकूला स्कूल हिंसा: पीजीआईएमईआर से डिस्चार्ज हुई 6 वर्षीय पीड़िता, परिवार को मिली राहत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
पंचकूला स्कूल हिंसा: पीजीआईएमईआर से डिस्चार्ज हुई 6 वर्षीय पीड़िता, परिवार को मिली राहत

सारांश

पंचकूला के सेक्टर 20 के एक स्कूल में सहपाठी द्वारा क्रूरता से पीटी गई 6 वर्षीय बच्ची को पीजीआईएमईआर से छुट्टी मिल गई है। अस्पताल ने बिना कोई शुल्क लिए इलाज किया। अब सवाल यह है कि हरियाणा सरकार के स्कूल सुरक्षा ऑडिट का वादा कब और कैसे पूरा होगा।

मुख्य बातें

पंचकूला के सेक्टर 20 के एक स्कूल में तीसरी कक्षा के एक छात्र ने विशेष जरूरतों वाली 6 वर्षीय बच्ची के साथ बेरहमी से मारपीट की थी।
बच्ची को 28 अक्टूबर 2026 को पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया था और 4 नवंबर 2026 को छुट्टी दी गई।
पीजीआईएमईआर ने बच्ची का इलाज और निजी कमरे का खर्च पूरी तरह निःशुल्क उठाया।
हरियाणा सरकार ने इलाज का पूरा खर्च उठाने और राज्यभर के स्कूलों में सुरक्षा ऑडिट कराने का वादा किया था।
बच्ची के उपचार में प्रो.
अशोक कुमार के नेतृत्व में समन्वित चिकित्सा दल ने कार्य किया।

पंचकूला के एक स्कूल में सहपाठी द्वारा बेरहमी से पीटे जाने के बाद गंभीर रूप से घायल हुई 6 वर्षीय बच्ची को 4 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ स्थित पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) से छुट्टी दे दी गई। 28 अक्टूबर को भर्ती कराई गई इस बच्ची के सफलतापूर्वक डिस्चार्ज होने से उसके परिवार और समाज ने राहत की सांस ली है।

क्या था पूरा घटनाक्रम

हरियाणा के पंचकूला के सेक्टर 20 स्थित एक स्कूल में तीसरी कक्षा के एक छात्र ने विशेष जरूरतों वाली इस बच्ची के साथ क्रूर मारपीट की थी। आरोप के अनुसार, उस छात्र ने कई बार बच्ची का सिर दीवार पर दे मारा और जब वह खून से लथपथ होकर क्लासरूम के फर्श पर बेहोश पड़ी थी, तब भी ईंट से उस पर हमला किया। घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था।

सरकार और अस्पताल की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाने और राज्यभर के स्कूलों में सुरक्षा का व्यापक ऑडिट कराने का वादा किया था। पीजीआईएमईआर ने भी अपनी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बच्ची के परिवार पर कोई आर्थिक बोझ नहीं डाला और उसके निजी कमरे का खर्च भी संस्थान ने वहन किया, ताकि परिवार पूरी तरह बच्ची के स्वास्थ्य लाभ पर ध्यान दे सके।

पीजीआईएमईआर निदेशक की प्रतिक्रिया

पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रो. विवेक लाल, जो अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान स्वयं बच्ची का हाल जानने गए थे, ने डिस्चार्ज पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा, 'इस बच्ची का सुरक्षित डिस्चार्ज होना हम सभी के लिए बहुत राहत और खुशी की बात है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने हमें अंदर तक झकझोर दिया था। हमारी पहली प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना था कि उसे पूरी संवेदना, आराम और भरोसे के माहौल में बेहतरीन चिकित्सा देखभाल मिले।'

उन्होंने आगे कहा, 'पीजीआईएमईआर में हमारा दृढ़ विश्वास है कि अच्छी स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच किसी व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।' प्रो. लाल ने इलाज के दौरान डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों द्वारा दिखाए गए समर्पण और संवेदनशीलता की भी सराहना की।

चिकित्सा दल का समन्वित प्रयास

बच्ची के उपचार में बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर जे.के. महाजन के मार्गदर्शन में एक समन्वित टीम ने काम किया। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. रमन शर्मा ने ट्रॉमा संबंधी पहलुओं का समन्वय किया, जबकि मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रोफेसर अशोक कुमार ने संस्थागत सहयोग सुनिश्चित किया।

प्रोफेसर महाजन ने कहा, 'इस तरह की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद एक छोटे बच्चे के इलाज के लिए न केवल क्लिनिकल विशेषज्ञता, बल्कि संवेदनशीलता, धैर्य और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण की भी आवश्यकता होती है।' उन्होंने आशा जताई कि बच्ची जल्द ही अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट आएगी।

आगे क्या होगा

यह मामला हरियाणा के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों की देखभाल को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। राज्य सरकार के सुरक्षा ऑडिट के वादे के क्रियान्वयन पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं। बच्ची के परिवार और पीजीआईएमईआर दोनों ने उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल अब भी अनुत्तरित है — हरियाणा के स्कूलों में विशेष जरूरतों वाले बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस व्यवस्था कब बनेगी? सरकार ने सुरक्षा ऑडिट का वादा किया, परंतु उसकी समयसीमा और क्रियान्वयन का कोई स्पष्ट खाका सामने नहीं आया है। यह पहली बार नहीं है जब स्कूल परिसर में हिंसा की घटना के बाद बड़े वादे किए गए और फिर फाइलों में दब गए। पीजीआईएमईआर की संवेदनशीलता और निःशुल्क इलाज सराहनीय है, किंतु यह संस्थागत विफलता की भरपाई नहीं कर सकता — जवाबदेही स्कूल प्रशासन और राज्य सरकार की है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचकूला स्कूल हिंसा में क्या हुआ था?
हरियाणा के पंचकूला के सेक्टर 20 स्थित एक स्कूल में तीसरी कक्षा के एक छात्र ने विशेष जरूरतों वाली 6 वर्षीय बच्ची के साथ क्रूर मारपीट की। आरोप के अनुसार, उसने कई बार बच्ची का सिर दीवार पर दे मारा और बेहोश पड़ी बच्ची पर ईंट से भी हमला किया।
बच्ची को पीजीआईएमईआर से कब छुट्टी मिली?
बच्ची को 4 नवंबर 2026 को पीजीआईएमईआर, चंडीगढ़ से छुट्टी दी गई। उसे 28 अक्टूबर 2026 को भर्ती कराया गया था, यानी वह करीब एक सप्ताह अस्पताल में रही।
पीजीआईएमईआर ने बच्ची के इलाज के लिए परिवार से शुल्क लिया?
नहीं। पीजीआईएमईआर ने बच्ची का सम्पूर्ण इलाज निःशुल्क किया और निजी कमरे का खर्च भी संस्थान ने स्वयं वहन किया। निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि अच्छी स्वास्थ्य सेवा आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।
हरियाणा सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली हरियाणा सरकार ने बच्ची के इलाज का पूरा खर्च उठाने और राज्यभर के स्कूलों में सुरक्षा का व्यापक ऑडिट कराने की घोषणा की थी। हालांकि, ऑडिट की समयसीमा और विस्तृत कार्ययोजना अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।
बच्ची के इलाज में पीजीआईएमईआर की किस टीम ने भूमिका निभाई?
बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. जे.के. महाजन के मार्गदर्शन में एक समन्वित दल ने बच्ची का इलाज किया। ट्रॉमा सेंटर के प्रभारी डॉ. रमन शर्मा और मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. अशोक कुमार ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 3 दिन पहले
  3. 4 दिन पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले