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बरेली में सीएम योगी ने किया पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का अनावरण, घर को म्यूजियम बनाने का ऐलान

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बरेली में सीएम योगी ने किया पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का अनावरण, घर को म्यूजियम बनाने का ऐलान

सारांश

बरेली में सीएम योगी ने हिन्दी साहित्य के महान नाटककार पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का अनावरण किया और उनके घर को म्यूजियम बनाने का ऐलान किया। 17 वर्ष की आयु में रचित 'राधेश्याम रामायण' की पौने दो करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिकी थीं — आज उन्हें वह सम्मान मिला जो दशकों से प्रतीक्षित था।

मुख्य बातें

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 30 जून 2026 को बरेली में पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया।
पंडित राधेश्याम का जन्म 25 नवम्बर 1890 को बरेली के बिहारीपुर मोहल्ले में हुआ था; निधन 1983 में।
उनकी कृति 'राधेश्याम रामायण' 25 खण्डों में पद्यबद्ध है और पौने दो करोड़ से अधिक प्रतियाँ बिकीं।
प्रथम राष्ट्रपति डॉ.
राजेन्द्र प्रसाद ने उन्हें राष्ट्रपति भवन बुलाकर 15 दिनों तक राम कथा सुनी थी।
सीएम योगी ने पंडित जी के घर को पर्यटन विभाग के माध्यम से म्यूजियम बनाने की घोषणा की।
योगी ने पंडित राधेश्याम को आधुनिक काल में तुलसीदास और वाल्मीकि की परंपरा का वाहक बताया।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 जून 2026 को बरेली स्थित पंडित राधेश्याम कथावाचक स्मृति भवन ऑडिटोरियम में हिन्दी साहित्य और लोकनाट्य परंपरा के महान नाटककार एवं कथावाचक पंडित राधेश्याम कथावाचक की प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। इस अवसर पर उन्होंने पंडित जी के घर को पर्यटन विभाग के माध्यम से संग्रहालय (म्यूजियम) बनाने की घोषणा भी की, जिसमें राज्य सरकार का सहयोग रहेगा।

'सीयावर रामचंद्र की जय' से हुई संबोधन की शुरुआत

मुख्यमंत्री योगी ने 'सीयावर रामचंद्र की जय' के उद्घोष के साथ अपना संबोधन आरंभ किया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय और मंचासीन अतिथियों का अभिनंदन करते हुए पंडित राधेश्याम के साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान को नमन किया। उन्होंने कहा, 'मुझे प्रसन्नता है कि जिनकी कथा सुनते-सुनते हम बड़े हुए, आज उनकी प्रतिमा का अनावरण करने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ।'

उन्होंने यह भी कहा कि जो समाज अपनी विरासत का सम्मान और संरक्षण करता है, उसी का विकास का मार्ग प्रशस्त होता है। उनके अनुसार, 'विरासत का सम्मान हमारी प्रगति का आधार है।'

तुलसीदास और वाल्मीकि की परंपरा में पंडित राधेश्याम

मुख्यमंत्री ने पंडित राधेश्याम कथावाचक की तुलना महर्षि वाल्मीकि और गोस्वामी तुलसीदास से करते हुए कहा कि त्रेतायुग में महर्षि वाल्मीकि ने, मध्यकाल में तुलसीदास ने और आधुनिक काल में पंडित राधेश्याम जी ने राम कथा के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि 'सनातन भारत की आत्मा है, और जिस महापुरुष ने इस आत्मा को मजबूती दी, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना हमारी जिम्मेदारी है।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पंडित जी के संवाद आज भी रामलीला मंचन का आधार बने हुए हैं और उन्होंने रामायण को लोक व्यवहार की सरल भाषा में प्रस्तुत किया।

पंडित राधेश्याम कथावाचक: जीवन और साहित्यिक विरासत

कार्यक्रम में बताया गया कि पंडित राधेश्याम कथावाचक का जन्म 25 नवम्बर 1890 को बरेली के बिहारीपुर मोहल्ले में पंडित बांकेलाल के परिवार में हुआ था। उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय कृति 'राधेश्याम रामायण' है, जिसे उन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में खड़ीबोली और लोकनाट्य शैली में 25 खण्डों में पद्यबद्ध किया। उनके जीवनकाल में ही इस कृति की हिन्दी और उर्दू में मिलाकर पौने दो करोड़ से अधिक प्रतियाँ प्रकाशित एवं विक्रय हुईं।

स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने उन्हें राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर 15 दिनों तक राम कथा श्रवण किया था। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए धन संग्रह के दौरान उन्होंने अपनी एक वर्ष की संपूर्ण आय महामना मदन मोहन मालवीय को समर्पित कर दी थी। उन्होंने अपनी आत्मकथा 'मेरा नाटक काल' का लेखन जीवन के अंतिम चरण में किया। 1983 में उनका निधन हुआ।

म्यूजियम और सम्मान की घोषणा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 1983 में पंडित राधेश्याम के निधन के बाद उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जो आज प्राप्त हुआ। उन्होंने घोषणा की कि पंडित जी के घर को पर्यटन विभाग के माध्यम से म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें उनकी समस्त स्मृतियाँ संग्रहित की जाएंगी ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी उनसे लाभान्वित हो सकें।

कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ

इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार, सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, महापौर डॉ. उमेश गौतम, सांसद बरेली छत्रपाल सिंह गंगवार सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। पंडित राधेश्याम के परिवार से उनकी पौत्री शारदा भार्गव, पौत्र काशीनाथ शर्मा एवं अन्य परिजन भी कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम का संचालन अवनीश कुमार ने किया और महापौर डॉ. उमेश गौतम ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

यह आयोजन बरेली की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, और म्यूजियम की स्थापना से आने वाली पीढ़ियों को पंडित राधेश्याम की अमर परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन दशकों बाद उनके घर को म्यूजियम बनाने की घोषणा यह सवाल उठाती है कि सांस्कृतिक विभूतियों को सम्मान के लिए राजनीतिक अवसर की प्रतीक्षा क्यों करनी पड़ती है। पंडित जी ने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अपनी एक वर्ष की आय दान की थी — यह त्याग उनकी विरासत का केंद्र है, जिसे सरकारी संग्रहालय से कहीं अधिक पाठ्यक्रम में स्थान मिलना चाहिए। म्यूजियम की घोषणा स्वागतयोग्य है, परंतु क्रियान्वयन की समयसीमा और बजट अभी स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंडित राधेश्याम कथावाचक कौन थे?
पंडित राधेश्याम कथावाचक हिन्दी साहित्य के महान नाटककार और कथावाचक थे, जिनका जन्म 25 नवम्बर 1890 को बरेली के बिहारीपुर मोहल्ले में हुआ था। उन्होंने मात्र 17 वर्ष की आयु में 'राधेश्याम रामायण' की रचना की, जिसकी पौने दो करोड़ से अधिक प्रतियाँ उनके जीवनकाल में ही बिकीं।
बरेली में पंडित राधेश्याम की प्रतिमा का अनावरण कब और किसने किया?
30 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बरेली स्थित पंडित राधेश्याम कथावाचक स्मृति भवन ऑडिटोरियम में उनकी प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया। इस अवसर पर वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना सहित कई वरिष्ठ मंत्री और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सीएम योगी ने पंडित राधेश्याम के घर के बारे में क्या घोषणा की?
मुख्यमंत्री योगी ने घोषणा की कि पंडित राधेश्याम कथावाचक के घर को पर्यटन विभाग के माध्यम से म्यूजियम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें राज्य सरकार सहयोग करेगी। इस म्यूजियम में पंडित जी की समस्त स्मृतियाँ संग्रहित की जाएंगी ताकि आने वाली पीढ़ियाँ लाभान्वित हो सकें।
'राधेश्याम रामायण' क्या है और इसका महत्व क्यों है?
'राधेश्याम रामायण' पंडित राधेश्याम कथावाचक की सर्वाधिक लोकप्रिय कृति है, जिसे उन्होंने खड़ीबोली और लोकनाट्य शैली में 25 खण्डों में पद्यबद्ध किया था। यह कृति रामलीला मंचन का आधार बनी और इसकी हिन्दी व उर्दू में पौने दो करोड़ से अधिक प्रतियाँ उनके जीवनकाल में ही प्रकाशित एवं विक्रय हुईं।
पंडित राधेश्याम कथावाचक का राष्ट्रपति भवन से क्या संबंध था?
स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने पंडित राधेश्याम कथावाचक को राष्ट्रपति भवन आमंत्रित कर 15 दिनों तक उनसे राम कथा श्रवण किया था। यह उनकी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और प्रतिष्ठा का प्रमाण है।
राष्ट्र प्रेस
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