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पप्पू यादव की संसद में पुजारी वेशभूषा पर हिंदू सेना का विरोध, लोकसभा सदस्यता रद्द करने की माँग

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पप्पू यादव की संसद में पुजारी वेशभूषा पर हिंदू सेना का विरोध, लोकसभा सदस्यता रद्द करने की माँग

सारांश

संसद परिसर में पुजारी वेश धारण कर आने पर हिंदू सेना ने लोकसभा सांसद पप्पू यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर सदस्यता रद्द करने की माँग की है, इसे सनातन संस्कृति का अपमान बताया है।

मुख्य बातें

हिंदू सेना ने लोकसभा सांसद पप्पू यादव की संसदीय सदस्यता तत्काल रद्द करने की माँग की है।
संगठन का आरोप है कि यादव संसद परिसर में पुजारी का वेश धारण कर आए, जो सनातन धर्म की भावनाओं का अपमान है।
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की।
संगठन ने इस कृत्य को राजनीतिक स्टंट करार देते हुए संसद की मर्यादा के उल्लंघन का आरोप लगाया।
हिंदू सेना की स्थापना 10 अगस्त 2011 को विष्णु गुप्ता ने की थी।

लोकसभा सांसद पप्पू यादव द्वारा संसद परिसर में पुजारी का वेश धारण करने पर हिंदुत्ववादी संगठन हिंदू सेना ने कड़ी आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इस कृत्य से सनातन संस्कृति और करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं, और उसने लोकसभा अध्यक्ष से यादव की संसदीय सदस्यता तत्काल रद्द करने की माँग की है।

मुख्य घटनाक्रम

हाल ही में संपन्न संसदीय सत्र के दौरान पप्पू यादव केसरिया वस्त्र पहनकर संसद परिसर में उपस्थित हुए। हिंदू सेना ने इसे एक सुनियोजित राजनीतिक स्टंट करार दिया। संगठन के अनुसार, पवित्र केसरिया वस्त्र, भगवान श्री राम से जुड़े पूजनीय प्रतीकों और सनातन धर्म की आस्था का इस प्रकार राजनीतिक उपयोग अस्वीकार्य है।

लोकसभा अध्यक्ष को पत्र

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने लोकसभा अध्यक्ष को औपचारिक पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की है। पत्र में उन्होंने कहा कि संसद देश की सर्वोच्च संस्था है और यहाँ गरिमा व अनुशासन बनाए रखना प्रत्येक सांसद का संवैधानिक दायित्व है। उनके अनुसार, पप्पू यादव के इस आचरण से संसद की मर्यादा का खुला उल्लंघन हुआ है।

संगठन की माँग

पत्र में विष्णु गुप्ता ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए सांसद पप्पू यादव की संसदीय सदस्यता तत्काल रद्द की जाए। संगठन का तर्क है कि ऐसी कार्रवाई से ही संसद की पवित्रता सुरक्षित रहेगी और आहत धार्मिक भावनाओं को शांति मिलेगी। हिंदू सेना ने यह भी चेताया कि यदि संसद के भीतर ऐसे कृत्य बिना दंड के होते रहे, तो आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भरोसा कमज़ोर होगा।

हिंदू सेना: एक परिचय

हिंदू सेना एक भारतीय दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी संगठन है, जिसकी स्थापना 10 अगस्त 2011 को विष्णु गुप्ता ने की थी। गुप्ता वर्तमान में इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। यह संगठन समय-समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराता रहा है।

आगे क्या

लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि संसद सचिवालय इस शिकायत को किस श्रेणी में रखता है और क्या इस पर कोई औपचारिक जाँच शुरू होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि वेशभूषा किसी सांसद को अयोग्य ठहराने का संवैधानिक आधार नहीं बनती। असली सवाल यह है कि क्या यह घटना संसदीय आचार संहिता की परिधि में आती है — और इसका उत्तर लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय को देना होगा, न कि किसी बाहरी संगठन को।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पप्पू यादव और हिंदू सेना के बीच विवाद क्या है?
लोकसभा सांसद पप्पू यादव के संसद परिसर में पुजारी का वेश धारण कर आने पर हिंदू सेना ने आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इससे सनातन संस्कृति और करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।
हिंदू सेना ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र क्यों लिखा?
हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पप्पू यादव की संसदीय सदस्यता तत्काल रद्द करने की माँग की है। संगठन का तर्क है कि इस कृत्य से संसद की मर्यादा का उल्लंघन हुआ है।
हिंदू सेना क्या है और इसकी स्थापना कब हुई?
हिंदू सेना एक भारतीय दक्षिणपंथी हिंदुत्ववादी संगठन है। इसकी स्थापना 10 अगस्त 2011 को विष्णु गुप्ता ने की थी, जो वर्तमान में इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
क्या लोकसभा अध्यक्ष ने इस मामले में कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि इस शिकायत पर कोई औपचारिक कार्रवाई होगी या नहीं।
पप्पू यादव की संसदीय सदस्यता रद्द हो सकती है?
संसदीय सदस्यता रद्द करना एक जटिल संवैधानिक प्रक्रिया है जो दल-बदल विरोधी कानून या न्यायालय के आदेश जैसे निर्धारित आधारों पर होती है। वेशभूषा को अयोग्यता का आधार बनाना संविधान के तहत अत्यंत कठिन है; अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष का होगा।
राष्ट्र प्रेस
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