मंतेश्वर चुनाव 2026: BJP के सैकत पांजा ने TMC मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी को 14,798 मतों से हराया

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मंतेश्वर चुनाव 2026: BJP के सैकत पांजा ने TMC मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी को 14,798 मतों से हराया

सारांश

पाँच साल पहले 31,508 वोटों से हारे सैकत पांजा ने इस बार 14,798 मतों से TMC के वरिष्ठ मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी को पराजित कर मंतेश्वर में बड़ा उलटफेर कर दिया। यह जीत पश्चिम बंगाल में BJP की बढ़ती पैठ और TMC के गढ़ों में बदलते राजनीतिक समीकरण का संकेत है।

मुख्य बातें

BJP के सैकत पांजा ने मंतेश्वर विधानसभा सीट पर TMC के सिद्दीकुल्लाह चौधरी को 14,798 मतों के अंतर से हराया।
पांजा को 96,559 वोट , चौधरी को 81,761 वोट और CPI(M) के अनुपम घोष को 18,192 वोट मिले।
2021 में इसी सीट पर चौधरी ने पांजा को 31,508 वोटों के बड़े अंतर से हराया था।
सिद्दीकुल्लाह चौधरी पश्चिम बंगाल सरकार में जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवाओं के प्रभारी मंत्री रहे हैं।
मंतेश्वर सीट पर मुस्लिम मतदाता 32.30% , अनुसूचित जाति 23.88% और अनुसूचित जनजाति 8.41% हैं।

पश्चिम बंगाल की मंतेश्वर विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार सैकत पांजा ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवाओं के प्रभारी मंत्री रहे सिद्दीकुल्लाह चौधरी को 14,798 मतों के अंतर से पराजित कर दिया। 4 मई 2026 को घोषित इस परिणाम ने पांजा की 2021 की उस हार का हिसाब चुकता कर दिया, जिसमें चौधरी ने उन्हें 31,508 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी थी।

मतगणना के प्रमुख आँकड़े

मंतेश्वर सीट पर हुई मतगणना में BJP के सैकत पांजा को 96,559 वोट मिले, जबकि TMC के सिद्दीकुल्लाह चौधरी को 81,761 वोट प्राप्त हुए। तीसरे स्थान पर रहे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के उम्मीदवार अनुपम घोष को 18,192 वोट मिले। 76 वर्षीय सिद्दीकुल्लाह चौधरी पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति ₹1.8 करोड़ बताई गई है, जबकि उन पर कोई देनदारी नहीं है। उन पर एक आपराधिक मामला दर्ज होने की भी जानकारी है।

सैकत पांजा की राजनीतिक यात्रा

कभी TMC के सक्रिय सदस्य रहे सैकत पांजा ने 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP का दामन थामा था। उस चुनाव में उन्हें सिद्दीकुल्लाह चौधरी के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था। गौरतलब है कि इससे पहले 2016 के उपचुनाव में पांजा ने TMC की टिकट पर इसी सीट से बड़ी जीत दर्ज की थी। पांजा के BJP में शामिल होने से इस सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय हो गया था और BJP को यहाँ एक प्रमुख चुनौती के रूप में उभरने का अवसर मिला।

मंतेश्वर सीट का राजनीतिक इतिहास

1951 में अस्तित्व में आई मंतेश्वर विधानसभा सीट पूर्व बर्धमान जिले में स्थित है और 2009 के परिसीमन के बाद यह बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा बनी। इससे पहले यह कटवा लोकसभा सीट के अंतर्गत आती थी। अब तक हुए 19 विधानसभा चुनावों (2016 के उपचुनाव सहित) में वाम मोर्चे ने 11 बार जीत दर्ज की — जिसमें सीपीआई(एम) की 10 और 1962 में अविभाजित सीपीआई की एक जीत शामिल है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने यहाँ तीन-तीन बार जीत हासिल की, जबकि एक बार एक निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा।

निर्वाचन क्षेत्र की सामाजिक और भौगोलिक संरचना

यह निर्वाचन क्षेत्र मंतेश्वर सामुदायिक विकास खंड की 10 ग्राम पंचायतों और मेमारी 2 ब्लॉक की 7 ग्राम पंचायतों को मिलाकर बना है, जो इसके पूर्णतः ग्रामीण चरित्र को दर्शाता है। 2021 में यहाँ 2,42,229 पंजीकृत मतदाता थे। सामाजिक संरचना की दृष्टि से मुस्लिम मतदाता 32.30% के साथ सबसे बड़ा वर्ग हैं, जबकि अनुसूचित जाति के 23.88% और अनुसूचित जनजाति के 8.41% मतदाता हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र बर्धमान के उपजाऊ मैदानों में बसा है, जहाँ धान, जूट, सरसों और सब्जियों की खेती प्रमुख आजीविका है। ब्रिटिश काल में निर्मित दामोदर नहर आज भी सिंचाई की रीढ़ है।

आगे क्या

इस जीत के साथ BJP ने मंतेश्वर में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और TMC के एक अनुभवी मंत्री का किला ढहा दिया है। यह परिणाम पश्चिम बंगाल में BJP की बढ़ती उपस्थिति का संकेत देता है और आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर देखा जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पश्चिम बंगाल में TMC के उस अभेद्य समझे जाने वाले ढाँचे में दरार का प्रतीक है, जो 2021 में भाजपा की बड़ी चुनौती के बावजूद टिका रहा था। सिद्दीकुल्लाह चौधरी जैसे अनुभवी और अल्पसंख्यक समुदाय में गहरी पैठ रखने वाले नेता की हार यह संकेत देती है कि TMC का पारंपरिक वोट बैंक अब उतना अटूट नहीं रहा। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कई मोर्चों पर TMC सरकार आलोचनाओं के घेरे में है। BJP के लिए असली परीक्षा यह होगी कि वह इस जीत को एक स्थायी राजनीतिक उपस्थिति में बदल पाती है या नहीं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंतेश्वर विधानसभा सीट का 2026 चुनाव परिणाम क्या रहा?
BJP के सैकत पांजा ने मंतेश्वर सीट पर TMC के सिद्दीकुल्लाह चौधरी को 14,798 मतों के अंतर से हराया। पांजा को 96,559 और चौधरी को 81,761 वोट मिले।
सैकत पांजा ने 2021 में मंतेश्वर सीट क्यों गँवाई थी?
2021 में TMC छोड़कर BJP में शामिल हुए सैकत पांजा को TMC के सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने 31,508 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। उस चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय था।
सिद्दीकुल्लाह चौधरी कौन हैं?
सिद्दीकुल्लाह चौधरी TMC के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में जन शिक्षा विस्तार एवं पुस्तकालय सेवाओं के प्रभारी मंत्री रहे हैं। 76 वर्षीय चौधरी पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उनकी कुल संपत्ति ₹1.8 करोड़ बताई गई है।
मंतेश्वर सीट का राजनीतिक इतिहास क्या है?
1951 में अस्तित्व में आई इस सीट पर अब तक 19 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें वाम मोर्चे ने 11 बार जीत दर्ज की। कांग्रेस और TMC ने तीन-तीन बार यह सीट जीती है।
मंतेश्वर सीट की सामाजिक संरचना कैसी है?
मंतेश्वर सीट पर मुस्लिम मतदाता 32.30% के साथ सबसे बड़ा वर्ग हैं, जबकि अनुसूचित जाति के 23.88% और अनुसूचित जनजाति के 8.41% मतदाता हैं। 2021 में यहाँ कुल 2,42,229 पंजीकृत मतदाता थे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 सप्ताह पहले