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PM मोदी का ‘सुभाषितम’ संदेश: योग को दिनचर्या में शामिल करने की अपील, पतञ्जलि श्लोक साझा

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PM मोदी का ‘सुभाषितम’ संदेश: योग को दिनचर्या में शामिल करने की अपील, पतञ्जलि श्लोक साझा

सारांश

पीएम मोदी ने ‘सुभाषितम’ शृंखला में योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की और महर्षि पतञ्जलि को नमन करने वाला संस्कृत श्लोक साझा किया। यह संदेश अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले की तैयारियों के बीच आया, जो परंपरा और जीवनशैली को जोड़ने की उनकी निरंतर रणनीति का हिस्सा है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 4 जून को एक्स पर ‘सुभाषितम’ संदेश साझा किया।
उन्होंने योग को दिनचर्या में शामिल करने की अपील की, कहा कि यह तन-मन को संतुलित रखता है।
संदेश के साथ महर्षि पतञ्जलि को नमन करने वाला संस्कृत श्लोक साझा।
एक दिन पहले बुधवार को मोदी ने एकजुटता पर केंद्रित ‘सुभाषितम’ पोस्ट साझा की थी।
यह पहल 21 जून के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के बीच आई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 4 जून को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक ‘सुभाषितम’ संदेश साझा करते हुए नागरिकों से योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि योग का नियमित अभ्यास तन को स्वस्थ और मन को शांत रखता है, जिससे जीवन संतुलित एवं ऊर्जावान बनता है। यह संदेश 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले की वैश्विक तैयारियों के बीच आया है।

मुख्य संदेश

पीएम मोदी ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा, ‘योग का नियमित अभ्यास तन को स्वस्थ और मन को शांत रखता है। इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से जीवन संतुलित और ऊर्जावान बनता है।’ संदेश का स्वर सलाहकारी रहा, जिसमें योग को जीवनशैली से जुड़ी आदत के रूप में अपनाने पर ज़ोर दिया गया।

पतञ्जलि को नमन

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश के साथ संस्कृत का एक श्लोक भी साझा किया — ‘योगेन चित्तस्य पदेन वाचां मलं शरीरस्य च वैद्यकेन। योऽपाकरोत् तं प्रवरं मुनीनां पतञ्जलिं प्राञ्जलिरानतोऽस्मि॥’ इसका भावार्थ है कि मन की चित्तवृत्तियों को योग से, वाणी को व्याकरण से और शरीर की अशुद्धियों को आयुर्वेद से शुद्ध करने वाले मुनिश्रेष्ठ महर्षि पतञ्जलि को दोनों हाथ जोड़कर नमन। यह श्लोक भारतीय ज्ञान परंपरा में योग की पुरातन भूमिका को रेखांकित करता है।

एकजुटता पर पिछला संदेश

इससे एक दिन पहले बुधवार को मोदी ने ‘सुभाषितम’ शृंखला के अंतर्गत एकजुटता पर केंद्रित प्रेरणादायी संदेश साझा किया था। उन्होंने लिखा था कि जब नागरिक एकजुटता और आपसी सहयोग के सूत्र में बंधते हैं, तो राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है, और इसी सामूहिक संकल्प से देश उन्नति की नित-नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।

उस पोस्ट में साझा श्लोक — ‘धूमायन्ते व्यपेतानि ज्वलन्ति सहितानि च। धृतराष्ट्रोल्मुकानीव ज्ञातयो भरतर्षभ॥’ — का आशय है कि जैसे अलग-अलग लकड़ियाँ पूरी ऊर्जा प्रकट नहीं कर पातीं किन्तु एकत्र होने पर प्रज्वलित होकर प्रकाश व ऊष्मा देती हैं, वैसे ही किसी राज्य की समृद्धि उसके नागरिकों की एकता और सामूहिक संकल्प पर आधारित होती है।

व्यापक संदर्भ

‘सुभाषितम’ शृंखला के माध्यम से प्रधानमंत्री संस्कृत श्लोकों और उनके समकालीन अर्थों को सार्वजनिक संवाद का हिस्सा बनाते रहे हैं। योग पर ताज़ा पोस्ट ऐसे समय आई है जब भारत 2026 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के एक और संस्करण की तैयारियों में जुटा है। आगामी दिनों में योग दिवस से जुड़ी और घोषणाएँ अपेक्षित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे भारत ने 2014 के बाद से वैश्विक सॉफ्ट पावर के औज़ार के रूप में स्थापित किया है। आलोचक तर्क देते हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए योग की अपील के साथ ज़मीनी स्वास्थ्य ढाँचे में निवेश की समान गति आवश्यक है, ताकि सांकेतिकता ठोस परिणामों में बदले।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी का ‘सुभाषितम’ संदेश क्या है?
‘सुभाषितम’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक्स पर साझा किए जाने वाले संस्कृत श्लोक-आधारित प्रेरणादायी संदेशों की शृंखला है। 4 जून के संस्करण में उन्होंने योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की।
मोदी ने योग पर पोस्ट में कौन-सा श्लोक साझा किया?
उन्होंने महर्षि पतञ्जलि को समर्पित श्लोक ‘योगेन चित्तस्य पदेन वाचां…’ साझा किया। इसका भावार्थ है कि योग चित्त को, व्याकरण वाणी को और आयुर्वेद शरीर को शुद्ध करता है, और इन्हें प्रतिपादित करने वाले पतञ्जलि को वे नमन करते हैं।
पीएम मोदी ने एकजुटता पर क्या कहा था?
बुधवार को साझा ‘सुभाषितम’ पोस्ट में मोदी ने कहा था कि नागरिकों की एकजुटता और आपसी सहयोग से राष्ट्र की शक्ति कई गुना बढ़ जाती है। उन्होंने ‘धूमायन्ते व्यपेतानि…’ श्लोक के माध्यम से लकड़ियों के संग जलने के दृष्टांत से सामूहिक संकल्प की शक्ति समझाई।
यह संदेश इस समय क्यों मायने रखता है?
यह संदेश 21 जून को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस से पहले आया है, जिसे भारत 2015 से वैश्विक स्तर पर बढ़ावा दे रहा है। ऐसे संदेश योग को सार्वजनिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक नैरेटिव दोनों में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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