प्रदीप भंडारी का राहुल गांधी से सवाल: 1980 में सोनिया गांधी नागरिक नहीं थीं, तो वोट कैसे डाला?
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता प्रदीप भंडारी ने 22 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता सोनिया गांधी पर 1980 में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मतदान करने का गंभीर आरोप लगाया। भंडारी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से सीधे सवाल पूछते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब देने की माँग की।
संवैधानिक आधार पर उठाया सवाल
भंडारी ने अपने आरोपों की नींव भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 पर रखी। उन्होंने कहा कि इन दोनों प्रावधानों के अनुसार, भारत में मतदान करने के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य शर्त है। उनका आरोप है कि 1980 में सोनिया गांधी भारत की नागरिक नहीं थीं, फिर भी उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज कराया गया।
भंडारी के अनुसार, इस संबंध में एक याचिका अदालत में दायर की गई थी। दिल्ली सेशन कोर्ट ने कथित तौर पर मजिस्ट्रेट अदालत को मामले की जाँच करने का निर्देश दिया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या कोई संज्ञेय अपराध हुआ है और क्या फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया था।
कानूनी दाँव-पेच और संभावित सजा
BJP नेता ने कहा कि यदि नकली दस्तावेज बनाए गए, तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 337 के तहत दोषी को 7 वर्ष तक की सजा हो सकती है और यह एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। उन्होंने 1991 के एक अन्य प्रसंग का भी उल्लेख किया, जिसमें उनके अनुसार सोनिया गांधी के मतदान करने की फोटो सामने आई थी।
गौरतलब है कि ये आरोप पूरी तरह से भंडारी के दावों और एक लंबित अदालती याचिका पर आधारित हैं। अदालत ने अभी तक इन आरोपों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया है।
राहुल गांधी पर निशाना
भंडारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे जेब में संविधान की प्रति लेकर चलते हैं, ऐसे में उन्हें इस प्रश्न का उत्तर देना चाहिए कि 1980 में उनके परिवार शासनकाल में 'लोकतंत्र की चोरी' कैसे हुई। उन्होंने कहा, 'एक तरफ कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाती है, वहीं दूसरी तरफ खुद से जुड़े फर्जी दस्तावेजों के मामले पर मौन है।'
भंडारी ने यह भी कहा कि कांग्रेस एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) के विरोध के नाम पर घुसपैठियों का समर्थन करती दिखती है, जबकि अपने नेताओं पर लगे आरोपों पर चुप्पी साधे है।
विपक्ष की प्रतिक्रिया और आगे की स्थिति
इस प्रेस वार्ता तक कांग्रेस की ओर से भंडारी के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। यह ऐसे समय में आया है जब देश में विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के बीच संवैधानिक मुद्दों और नागरिकता संबंधी बहसें तेज हो रही हैं। अदालत में लंबित याचिका का परिणाम ही इस विवाद को कानूनी दिशा देगा।