27 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी बरी हुए तो कोर्ट सही, हारे तो बिकाऊ? संजय निरुपम ने कांग्रेस के दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल

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राहुल गांधी बरी हुए तो कोर्ट सही, हारे तो बिकाऊ? संजय निरुपम ने कांग्रेस के दोहरे मापदंड पर उठाए सवाल

सारांश

राहुल गांधी के मानहानि मामले में बरी होते ही शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस से पूछा — जब जीते तो अदालत सही, जब हारे तो बिकाऊ? एक ही बयान में उन्होंने भीमाशंकर बिजली परियोजना का बचाव किया और जरांगे पाटिल ऑडियो क्लिप की एसआईटी जाँच का भी स्वागत किया।

मुख्य बातें

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 27 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस पर न्यायपालिका के प्रति दोहरे मापदंड का आरोप लगाया।
सुल्तानपुर एमपी/एमएलए कोर्ट ने मानहानि मामले में राहुल गांधी को राहत दी, जिसके बाद यह विवाद उठा।
भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के पास टोरंटो कंपनी की प्रस्तावित बिजली परियोजना से 25 हज़ार मेगावाट उत्पादन और 8-10 लाख रोज़गार का दावा।
काटे जाने वाले पेड़ों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक पेड़ लगाने का प्रावधान।
मुंबई पुलिस ने मनोज जरांगे पाटिल के ऑडियो क्लिप की जाँच के लिए एसआईटी गठित की, निरुपम ने स्वागत किया।

शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 27 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कांग्रेस पर न्यायपालिका के प्रति दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। सुल्तानपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट द्वारा मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को राहत दिए जाने के बाद निरुपम ने कहा कि कांग्रेस को अदालतों पर राजनीतिक दबाव में काम करने के आरोप लगाने से बाज़ आना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस लंबे समय से यह आरोप लगाती रही है कि न्यायपालिका पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और एनडीए का प्रभाव है।

न्यायपालिका पर दोहरे रवैये का आरोप

निरुपम ने कहा कि जब भी कांग्रेस या उसके नेताओं को अदालत में हार मिलती है, तो वे न्यायपालिका को 'बिकाऊ' और 'दबाव में काम करने वाली' बताने लगते हैं, लेकिन जीत मिलते ही वही अदालत उन्हें स्वतंत्र और निष्पक्ष नज़र आने लगती है। उन्होंने कहा, 'किसी भी मामले में फैसला सबूतों और केस की स्थिति के आधार पर होता है — यदि मामला मजबूत है तो जीत मिलती है, कमज़ोर है तो हार भी।' निरुपम के अनुसार, कांग्रेस को न्यायपालिका के प्रति अपना रवैया बदलना चाहिए।

भीमाशंकर बिजली परियोजना का बचाव

निरुपम ने भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के निकट प्रस्तावित बिजली संयंत्र का पुरज़ोर समर्थन किया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने टोरंटो कंपनी को यह संयंत्र स्थापित करने की अनुमति दी है। उनके अनुसार इस परियोजना से लगभग 25 हज़ार मेगावाट बिजली उत्पादन और 8 से 10 लाख लोगों को रोज़गार मिलने की संभावना है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संयंत्र अभयारण्य के जंगलों के भीतर नहीं, बल्कि उसकी सीमा से बाहर स्थापित किया जाएगा।

पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर निरुपम ने कहा कि परियोजना को पर्यावरणीय आकलन के बाद ही अनुमति दी गई है। उन्होंने स्वीकार किया कि परियोजना के लिए कुछ पेड़ काटे जाएंगे, लेकिन कंपनी को काटे गए पेड़ों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक पेड़ लगाने के निर्देश दिए गए हैं। परियोजना का विरोध करने वालों पर उन्होंने महाराष्ट्र के विकास और युवाओं के रोज़गार में बाधा डालने का आरोप लगाया।

जरांगे पाटिल ऑडियो क्लिप मामले में एसआईटी का स्वागत

मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख चेहरे मनोज जरांगे पाटिल की ओर से जारी ऑडियो क्लिप की जाँच के लिए मुंबई पुलिस द्वारा विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित किए जाने पर निरुपम ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि शिवसेना पहले ही इस मामले में जाँच की माँग कर चुकी थी और पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री से मिलकर फॉरेंसिक जाँच का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री के आदेश पर फॉरेंसिक जाँच शुरू हुई और अब एसआईटी गठित की गई है। निरुपम ने कहा कि क्लिप में बातचीत करने वाले लोगों से पूछताछ होनी चाहिए ताकि दावों की सच्चाई सामने आ सके।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार निरुपम का यह बयान महाराष्ट्र में शिवसेना-BJP गठबंधन की रणनीति का हिस्सा है, जो कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में लाने का प्रयास करता है। गौरतलब है कि राहुल गांधी की अयोग्यता और बाद में बहाली का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रहा है। आलोचकों का कहना है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर बहस केवल एक पक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रश्न समग्र राजनीतिक परिदृश्य में उठता रहा है। आगे देखना होगा कि कांग्रेस निरुपम के इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक वास्तविक संस्थागत प्रश्न को सामने रखता है — क्या राजनीतिक दल तभी न्यायपालिका की निष्पक्षता स्वीकारते हैं जब फ़ैसला उनके पक्ष में हो? यह विडंबना केवल कांग्रेस तक सीमित नहीं है; सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दल समय-समय पर अदालती फ़ैसलों को सुविधानुसार उद्धृत करते रहे हैं। भीमाशंकर परियोजना पर निरुपम का विकास-बनाम-पर्यावरण तर्क सतह पर तार्किक लगता है, पर '25 हज़ार मेगावाट और 10 लाख रोज़गार' जैसे आँकड़ों का स्वतंत्र सत्यापन ज़रूरी है। जरांगे पाटिल ऑडियो क्लिप मामले में एसआईटी गठन का स्वागत करना शिवसेना की उस रणनीति का हिस्सा है जो मराठा आरक्षण आंदोलन के इर्द-गिर्द अपनी स्थिति मज़बूत करना चाहती है।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल गांधी को सुल्तानपुर कोर्ट से किस मामले में राहत मिली?
सुल्तानपुर की एमपी/एमएलए कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को एक मानहानि मामले में राहत दी है। इसी फ़ैसले के बाद शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने कांग्रेस पर न्यायपालिका के प्रति दोहरे मापदंड का आरोप लगाया।
संजय निरुपम ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाया?
निरुपम ने कहा कि कांग्रेस अदालती हार पर न्यायपालिका को 'बिकाऊ' बताती है, लेकिन जीत मिलने पर उसी अदालत की तारीफ़ करती है। उनके अनुसार यह दोहरा मापदंड है और कांग्रेस को न्यायपालिका के प्रति अपना रवैया बदलना चाहिए।
भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के पास प्रस्तावित बिजली परियोजना क्या है?
महाराष्ट्र सरकार ने टोरंटो कंपनी को भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के निकट बिजली संयंत्र लगाने की अनुमति दी है। निरुपम के अनुसार इससे लगभग 25 हज़ार मेगावाट बिजली और 8 से 10 लाख लोगों को रोज़गार मिलने की संभावना है।
मनोज जरांगे पाटिल के ऑडियो क्लिप की जाँच के लिए एसआईटी क्यों बनाई गई?
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल से जुड़े एक ऑडियो क्लिप के विवादित दावों की सच्चाई परखने के लिए मुख्यमंत्री के आदेश पर फॉरेंसिक जाँच शुरू की गई थी। इसके बाद मुंबई पुलिस ने आगे की जाँच हेतु एसआईटी गठित की है।
क्या भीमाशंकर अभयारण्य के जंगल में संयंत्र लगाया जाएगा?
निरुपम के अनुसार संयंत्र भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य के जंगलों के भीतर नहीं, बल्कि उसकी सीमा से बाहर स्थापित किया जाएगा। साथ ही कंपनी को काटे जाने वाले पेड़ों की तुलना में दो से तीन गुना अधिक पेड़ लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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