मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद: BJP प्रवक्ता भंडारी बोले — राहुल-प्रियंका कैंप की खींचतान से कमज़ोर हो रही कांग्रेस
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने 11 जून को कहा कि कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना पार्टी की आंतरिक गुटबाजी का नतीजा है, और इसके पीछे राहुल गांधी व प्रियंका गांधी वाड्रा के खेमों के बीच चल रही खींचतान ज़िम्मेदार है। उन्होंने चेतावनी दी कि कांग्रेस जितना बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी, भाजपा को उतना ही राजनीतिक लाभ मिलेगा।
नामांकन रद्द होने की पृष्ठभूमि
कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन एक कानूनी खामी के आधार पर रद्द किया गया। भंडारी के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय के 2013 के तीन न्यायाधीशों की पीठ के फैसले में यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी नामांकन में बड़ी त्रुटि पाई जाए, तो उसे रद्द किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नामांकन प्रक्रिया में जानबूझकर गलत तरीके से दस्तावेज़ दाखिल किए गए, और इसके पीछे कांग्रेस के ही कुछ भीतरी लोगों का हाथ है।
आंतरिक गुटबाजी पर भंडारी के आरोप
भंडारी ने कहा, 'कांग्रेस को प्रदर्शन करने से पहले यह पता लगाना चाहिए कि उनके घर का भेदी कौन है।' उनके अनुसार, राहुल कैंप और प्रियंका कैंप के बीच चल रहे संगठनात्मक टकराव ने पार्टी के आंतरिक निर्णयों को प्रभावित किया है, जिसके चलते नटराजन के नामांकन में यह चूक हुई।
उन्होंने तर्क दिया कि जो पार्टी अपने आंतरिक मामले नहीं संभाल सकती, वह देश के नेतृत्व का दावा नहीं कर सकती। गौरतलब है कि कांग्रेस इस घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश बता रही है और देशभर में विरोध प्रदर्शन की तैयारी में है।
राहुल गांधी पर BJP का रुख
भंडारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को 'राजनीतिक अराजकतावादी' बताते हुए आरोप लगाया कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा से असहज हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की जनता ने राहुल गांधी की राजनीतिक रणनीति को भली-भाँति समझ लिया है, यही कारण है कि वे विपक्ष में बैठे हैं।
आर्थिक प्रगति का हवाला
भंडारी ने दावा किया कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत 7.7 प्रतिशत की विकास दर के साथ दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उनके अनुसार, भारत वैश्विक अस्थिरता के दौर में स्थिरता और आर्थिक शक्ति के प्रतीक के रूप में उभरा है। आलोचकों का कहना है कि ये आँकड़े चुनावी संदर्भ में पेश किए जा रहे हैं।
आगे क्या
कांग्रेस के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा के बाद यह विवाद और गहरा होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नामांकन रद्द होने का मुद्दा अब केवल एक कानूनी प्रश्न नहीं रहा — यह कांग्रेस की आंतरिक एकजुटता और संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा बन चुका है।