22 जुलाई 2026
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राजस्थान में एससी-एसटी अत्याचार मामलों में 28% की गिरावट, 60 दिनों में निपटारा 68% तक पहुँचा

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राजस्थान में एससी-एसटी अत्याचार मामलों में 28% की गिरावट, 60 दिनों में निपटारा 68% तक पहुँचा

सारांश

राजस्थान में एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में 2023 से 2025 के बीच 28% की गिरावट आई है और 60 दिनों में निपटारे की दर 35% से उछलकर 68% तक पहुँच गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में सतर्कता समिति की बैठक में यह आंकड़े पेश करते हुए 45 जिलों में एससी-एसटी प्रकोष्ठ स्थापित करने की जानकारी दी।

मुख्य बातें

राजस्थान में 2023 से 2025 के बीच एससी-एसटी अत्याचार मामलों में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
2024 की तुलना में 2025 में मामलों में 15.88% और 2026 की पहली छमाही में 15.49% की अतिरिक्त कमी आई।
60 दिनों में मामलों के निपटारे की दर 2023 के 35.16% से बढ़कर जुलाई 2026 तक 67.88% हो गई।
जांच का औसत समय 128 दिनों से घटकर 53 दिन रह गया।
राज्य के 45 पुलिस जिलों में एससी-एसटी प्रकोष्ठ स्थापित; शेष 6 जिलों में शीघ्र स्थापना होगी।
बंद मामलों के यादृच्छिक सत्यापन की सीमा 10% से बढ़ाकर 20% की गई।

राजस्थान में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के विरुद्ध दर्ज अत्याचार के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच इन मामलों में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि 2026 की पहली छमाही में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 15.49 प्रतिशत की और कमी आई है। राज्य सरकार ने इस सुधार का श्रेय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के सख्त क्रियान्वयन और मामलों की कड़ी निगरानी को दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 22 जुलाई 2026 को जयपुर में राज्य स्तरीय सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि एससी-एसटी समुदायों की सुरक्षा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने पुलिस और अभियोजन विभाग को निर्देश दिया कि दोषसिद्धि दर बढ़ाने के लिए आपसी समन्वय के साथ काम किया जाए।

आंकड़ों की तस्वीर

बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, 2024 की तुलना में 2025 में अत्याचार के मामलों में 15.88 प्रतिशत की गिरावट आई। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि मामलों के निपटारे की गति में तेज़ी से सुधार हुआ है — 60 दिनों के भीतर निपटाए गए मामलों का प्रतिशत 2023 के 35.16 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में लगभग 47 प्रतिशत और जुलाई 2026 तक 67.88 प्रतिशत हो गया। वहीं, जांच और निपटारे में लगने वाला औसत समय 128 दिनों से घटकर मात्र 53 दिन रह गया है।

संस्थागत सुधार

मुख्यमंत्री शर्मा ने बताया कि राज्य के 45 पुलिस जिलों में एससी-एसटी प्रकोष्ठ स्थापित किए जा चुके हैं और शेष छह जिलों में भी शीघ्र ऐसे प्रकोष्ठ बनाए जाएंगे। इसके अलावा, अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगाकर बंद किए गए मामलों के यादृच्छिक सत्यापन की सीमा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे जवाबदेही और निगरानी में सुधार हुआ है।

पीड़ितों को वित्तीय सहायता

बैठक में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि एफआईआर दर्ज होने से लेकर अदालत के अंतिम फैसले तक हर पात्र चरण में पीड़ितों को समय पर मुआवज़ा मिले। हेल्पलाइन, हेल्प डेस्क और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से शिकायत निपटारे की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।

आगे की दिशा

मुख्यमंत्री ने जिला और उपमंडल स्तर पर नियमित सतर्कता समिति बैठकें आयोजित करने तथा वर्ष में दो बार पंचायत स्तर पर निगरानी बैठकें करने के निर्देश दिए। एक वर्ष से अधिक समय से लंबित मामलों की जांच में तेज़ी लाने के लिए विशेष अभियान चलाने को भी कहा गया। बैठक में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेधम, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इन्हें सावधानी से पढ़ा जाना चाहिए — मामलों में गिरावट का अर्थ सदैव अपराध में कमी नहीं होता; कभी-कभी यह कम दर्ज होने वाली एफआईआर का भी संकेत हो सकता है। 60 दिनों में निपटारे की दर का 35% से 68% तक पहुँचना निस्संदेह प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, परंतु दोषसिद्धि दर का उल्लेख न होना एक महत्वपूर्ण अनुत्तरित प्रश्न छोड़ता है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के ऐतिहासिक आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान एससी-एसटी अत्याचार मामलों में शीर्ष राज्यों में रहा है — इस संदर्भ में 28% की गिरावट सराहनीय है, पर पर्याप्त नहीं। असली कसौटी यह होगी कि पीड़ितों को समय पर मुआवज़ा और न्याय मिल रहा है या नहीं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में एससी-एसटी अत्याचार मामलों में कितनी कमी आई है?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2023 से 2025 के बीच राजस्थान में एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। 2024 की तुलना में 2025 में 15.88% और 2026 की पहली छमाही में 15.49% की अतिरिक्त कमी आई है।
राजस्थान में एससी-एसटी मामलों के निपटारे में कितना सुधार हुआ है?
60 दिनों के भीतर मामलों के निपटारे की दर 2023 के 35.16 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई 2026 तक 67.88 प्रतिशत हो गई है। जांच का औसत समय भी 128 दिनों से घटकर 53 दिन रह गया है।
राजस्थान में एससी-एसटी प्रकोष्ठ कितने जिलों में स्थापित हैं?
राज्य के 45 पुलिस जिलों में एससी-एसटी प्रकोष्ठ स्थापित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने निर्देश दिया है कि शेष छह जिलों में भी शीघ्र ऐसे प्रकोष्ठ बनाए जाएं।
सतर्कता एवं निगरानी समिति की बैठक में और क्या निर्णय लिए गए?
22 जुलाई 2026 को जयपुर में हुई बैठक में बंद मामलों के यादृच्छिक सत्यापन की सीमा 10% से बढ़ाकर 20% करने, जिला-उपमंडल स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित करने और लंबित मामलों के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। पीड़ितों को एफआईआर से अंतिम फैसले तक समय पर वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एससी-एसटी सुरक्षा पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि एससी-एसटी समुदायों की सुरक्षा, सम्मान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने पुलिस, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग और अभियोजन विभाग को आपसी समन्वय और संवेदनशीलता के साथ काम करने के निर्देश दिए।
राष्ट्र प्रेस
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