राजौरी में पीएमईजीपी योजना के तहत 35 युवाओं ने आंत्रप्रेन्योरशिप ट्रेनिंग शुरू की, लोन पर सब्सिडी मिलेगी
सारांश
मुख्य बातें
राजौरी, 27 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। आत्मनिर्भर भारत मुहिम को जमीनी स्तर पर मजबूती प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में एक नया अध्याय आरंभ किया है।
यहां जम्मू और कश्मीर बैंक के रूरल सेल्फ एम्प्लॉयमेंट ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आरएसईटीआई) राजौरी में 35 शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए आंत्रप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (ईडीपी) की ट्रेनिंग का नया बैच शुरू किया गया है। यह ट्रेनिंग उन्हें स्वरोजगार की ओर बढ़ने और छोटे उद्योग स्थापित करने के लिए तैयार करेगी।
पीएमईजीपी एक केंद्रीय योजना है, जिसे खादी और विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन (केवीआईसी) द्वारा संचालित किया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में माइक्रो एंटरप्राइजेज के माध्यम से रोजगार सृजन करना है। केवीआईसी, डिस्ट्रिक्ट इंडस्ट्रीज सेंटर (डीआईसी) राजौरी और खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज बोर्ड (केवीआईबी) के सहयोग से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे उम्मीदवारों को बिजनेस मैनेजमेंट, प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करना, फाइनेंशियल प्लानिंग, मार्केटिंग स्ट्रेटेजी और बैंक से सब्सिडी वाली मदद प्राप्त करने की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है।
आरएसईटीआई राजौरी के निदेशक सुनील शर्मा ने प्रशिक्षण की शुरुआत पर उम्मीदवारों को संबोधित करते हुए कहा कि आंत्रप्रेन्योरशिप में सफलता के लिए कमिटमेंट, समय की पाबंदी, इनोवेशन और आत्मविश्वास बहुत आवश्यक हैं। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि इस ट्रेनिंग को लंबे समय तक वित्तीय स्वतंत्रता और समुदाय विकास की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखें।
उन्होंने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "हमारे पास प्रशिक्षण के लिए आए युवाओं का धन्यवाद। जिले के बेरोजगार युवा अब नौकरी की तलाश छोड़कर स्वरोजगार की ओर बढ़ रहे हैं, और भविष्य में वे दूसरों को रोजगार देंगे। यह 10 दिवसीय एंटरप्राइज डेवलपमेंट प्रोग्राम है, जिसमें बेसिक बिजनेस स्किल्स सिखाई जाती हैं। पीएमईजीपी एक पुरानी और सफल योजना है, जिसने पूरे देश में व्यापक परिवर्तन लाया है। योजना के अंतर्गत सेवा क्षेत्र में 20 लाख रुपए और मैन्युफैक्चरिंग में 50 लाख तक का लोन दिया जाता है, जिसमें अधिकतम 35 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध है।"
ट्रेनिंग ले रही महिला उम्मीदवार आरती शर्मा ने कहा, "मैंने केवीआईसी से लोन लिया है और राजौरी में प्रशिक्षण के लिए आई हूं। इस ट्रेनिंग से मुझे व्यापार चलाने की सम्पूर्ण जानकारी मिलेगी। सरकार 35 प्रतिशत सब्सिडी दे रही है, इसके लिए आभारी हूं।"
एक अन्य उम्मीदवार मुख्तार अहमद ने बताया, "पीएमईजीपी के तहत प्रशिक्षण मेरे लिए बेहद उपयोगी है। मैंने बिजनेस के लिए लोन के लिए आवेदन किया है। सरकार की इस सहायता के लिए मैं आभारी हूं।"
राकेश रैना, जिनका पहले से छोटा व्यवसाय है, ने कहा, "मैं प्रिंटिंग प्रेस स्थापित करना चाहता हूं। योजना के बारे में जानकारी मिली तो मैंने सरकार से संपर्क किया। हमें 10 लाख रुपए का लोन स्वीकृत हुआ है और प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। यहां बिजनेस चलाने का तरीका सिखाया जा रहा है। बेरोजगार युवाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाना चाहिए। भारत सरकार का धन्यवाद।"
पीएमईजीपी के तहत उम्मीदवारों को लोन पर 35 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है। यह योजना न केवल व्यक्तिगत स्तर पर आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान करती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाती है। राजौरी जैसे सीमांत जिले में यह पहल युवाओं में उत्साह भरा है और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में सहायता कर रही है।