रक्षा निर्यात नियमों में बड़ा सुधार: OGEL दायरा 41 से बढ़ाकर सभी देशों तक, MSMEs को सीधा फायदा
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग ने 28 अगस्त 2026 को रक्षा निर्यात की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और ओपन जनरल एक्सपोर्ट लाइसेंस (ओजीईएल) व्यवस्था में व्यापक सुधार लागू किए हैं। इन बदलावों का मकसद प्रक्रियागत बोझ घटाकर भारतीय कंपनियों — विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) — को वैश्विक रक्षा बाज़ार में तेज़ी से प्रवेश दिलाना है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच चुके हैं।
मुख्य सुधार: क्या-क्या बदला
नई व्यवस्था के तहत अधिकांश देशों को गैर-घातक रक्षा सामान के निर्यात के लिए हितधारक परामर्श की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय निविदाओं और रक्षा प्रदर्शनियों के लिए सभी श्रेणियों के रक्षा सामान के निर्यात में भी परामर्श की बाध्यता हटा दी गई है। इससे भारतीय कंपनियाँ विदेशी निविदाओं में पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ी से भाग ले सकेंगी और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद कम प्रक्रियागत विलंब के साथ प्रदर्शित कर सकेंगी।
गौरतलब है कि पहले तीन अलग-अलग ओजीईएल एसओपी लागू थीं — प्रमुख रक्षा प्लेटफॉर्म और उपकरणों के लिए, कलपुर्जों एवं घटकों के लिए, और कंपनियों के बीच तकनीक हस्तांतरण के लिए। अब इन तीनों को मिलाकर एक एकीकृत ओजीईएल एसओपी बनाई गई है, जिससे निर्यातकों को एकसमान और सरल नियमों के तहत काम करने की सुविधा मिलेगी।
ओजीईएल की वैधता और दायरे में विस्तार
सरकार ने ओजीईएल की वैधता अवधि 2 साल से बढ़ाकर 3 साल कर दी है। इससे कंपनियों को बार-बार लाइसेंस नवीनीकरण की प्रक्रिया से नहीं गुज़रना पड़ेगा और अनुपालन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे भी बड़ा बदलाव ओजीईएल के भौगोलिक दायरे में हुआ है — पहले यह सुविधा केवल 41 देशों तक सीमित थी, अब इसे सभी देशों तक विस्तारित कर दिया गया है।
हालाँकि, नकारात्मक या संवेदनशील देशों तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा प्रतिबंधित या हथियार प्रतिबंध झेल रहे देशों को इस विस्तार से बाहर रखा गया है। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संवेदनशील रक्षा सामान, महत्वपूर्ण तकनीक और संवेदनशील देशों से जुड़े निर्यात के लिए सभी आवश्यक सुरक्षा प्रावधान पूर्ववत लागू रहेंगे।
FOEM अनुबंध वाली कंपनियों के लिए विशेष प्रावधान
नई व्यवस्था में उन भारतीय कंपनियों के लिए विशेष सुविधा दी गई है जिनके विदेशी मूल उपकरण निर्माताओं (FOEM) के साथ दीर्घकालिक अनुबंध या समझौते हैं। निर्धारित शर्तें पूरी करने पर ऐसे निर्यातकों को संबंधित FOEM और पात्र सामान के लिए ओजीईएल दिया जा सकेगा, जिसकी वैधता संबंधित अनुबंध की अवधि के अनुरूप रखी जा सकेगी। इसके अतिरिक्त, छोटे कैलिबर के हथियारों के कुछ निर्धारित कलपुर्जों-घटकों और सुरक्षा उपकरणों के नागरिक उपयोग हेतु निर्यात की भी अनुमति दी गई है।
रक्षा उत्पादन और निर्यात का रिकॉर्ड संदर्भ
ये सुधार भारत की रक्षा क्षेत्र में बढ़ती महत्वाकांक्षाओं की पृष्ठभूमि में आए हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँचा, जबकि रक्षा निर्यात ₹38,424 करोड़ का रिकॉर्ड बना। यह ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार देश को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण एवं निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है।
रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इन सुधारों का उद्देश्य निर्यात नियमों को पूरी तरह शिथिल करना नहीं, बल्कि नियमित और कम जोखिम वाले मामलों में अनावश्यक प्रक्रियाओं को हटाना है। आने वाले समय में इन बदलावों के क्रियान्वयन पर उद्योग जगत की नज़र बनी रहेगी।