27 जून 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राम मंदिर दान गबन: सोमन्ना बोले 'भगवान राम देंगे सजा', प्रियंक खड़गे ने मोदी-योगी से माँगा जवाब

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राम मंदिर दान गबन: सोमन्ना बोले 'भगवान राम देंगे सजा', प्रियंक खड़गे ने मोदी-योगी से माँगा जवाब

सारांश

अयोध्या राम मंदिर दान गबन विवाद अब सीधे राजनीतिक अखाड़े में उतर आया है। एक तरफ केंद्रीय मंत्री सोमन्ना ईश्वरीय न्याय की बात कर रहे हैं, दूसरी तरफ कर्नाटक के मंत्री खड़गे ₹500 करोड़ गबन का आरोप लगाकर मोदी और योगी से सीधा जवाब माँग रहे हैं — और ट्रस्ट के दो शीर्ष पदाधिकारी इस्तीफा दे चुके हैं।

मुख्य बातें

अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं के दान में कथित गबन को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की है।
दान प्रबंधन से जुड़े 8 लोगों के विरुद्ध आपराधिक विश्वासघात और गबन की प्राथमिकी दर्ज।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की जानकारी दी।
कर्नाटक मंत्री प्रियंक खड़गे ने ₹500 करोड़ गबन का आरोप लगाते हुए PM मोदी और CM योगी से जवाब माँगा।
सोमन्ना ने कहा — 'भगवान राम उनके नाम पर धोखाधड़ी करने वालों को दंड देंगे।' विपक्ष के कुछ दल सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जाँच की माँग कर रहे हैं।

अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामले पर राजनीतिक संग्राम तेज हो गया है। केंद्रीय जल शक्ति एवं रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना ने 27 जून 2026 को दावणगेरे में पत्रकारों से कहा कि भगवान राम के नाम पर धोखाधड़ी करने वालों को स्वयं भगवान राम दंड देंगे। वहीं, कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण की माँग की है।

मुख्य घटनाक्रम

दावणगेरे में शनिवार को मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री वी. सोमन्ना ने कहा, 'जिस किसी ने भी गलत किया है, उसने गलत किया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (एसआईटी) का गठन किया है। भगवान के नाम पर इस तरह का कृत्य करना पाप है। भगवान राम उनके नाम पर धोखाधड़ी करने वालों को दंड देंगे।' उनका यह बयान सत्तारूढ़ दल की ओर से इस मामले पर पहली सार्वजनिक स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान प्रबंधन से जुड़ी कथित अनियमितताएँ सामने आने के बाद ट्रस्ट ने स्वयं जाँच की माँग की थी, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की। एसआईटी की प्रारंभिक जाँच के आधार पर दान की गणना और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों सहित आठ लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन पर आपराधिक विश्वासघात और मंदिर दान में गबन के आरोप लगाए गए हैं।

प्रियंक खड़गे की माँग

कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्र किए गए दान का उपयोग किस प्रकार किया गया। सार्वजनिक योगदान के इस्तेमाल में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।' उन्होंने इस मामले की व्यापक जाँच कर सच्चाई देश के सामने लाने की माँग की।

खड़गे ने आरोप लगाया, 'मैं पहले भी कह चुका हूँ कि भाजपा धोखाधड़ी कर रही है। पाँच वर्षों में ₹500 करोड़ की लूट हुई है। भगवान राम के नाम पर भाजपा लोगों के साथ धोखा कर रही है। इस मामले में बड़े लोगों की भी भूमिका है।' उन्होंने केंद्र सरकार से जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की, ताकि लोगों का भरोसा बना रहे।

ट्रस्ट में इस्तीफे और जाँच की स्थिति

विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफे की जानकारी दी है, हालाँकि मामले की जाँच अभी जारी है। यह इस्तीफा इस बात का संकेत है कि कथित अनियमितताओं की गंभीरता को ट्रस्ट के भीतर भी स्वीकार किया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि मामले की जाँच विधिक प्रक्रिया के तहत की जा रही है। एसआईटी की रिपोर्ट का इंतजार है, जो इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी।

विपक्ष की माँग और आगे की राह

विपक्षी दल सार्वजनिक दान के उपयोग में अधिक पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं, और कुछ दल सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में जाँच चाहते हैं। यह मामला अब केवल धार्मिक न रहकर राजनीतिक और प्रशासनिक जवाबदेही का सवाल बन चुका है। एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया ही यह तय करेगी कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ट्रस्ट के दो शीर्ष पदाधिकारियों का इस्तीफा यह संकेत देता है कि मामला सतह से गहरा है। असली सवाल यह है कि जिस मंदिर को राजनीतिक पहचान का केंद्र बनाया गया, उसके दान प्रबंधन में पारदर्शिता का ढाँचा पहले क्यों नहीं बना? सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी की माँग इसीलिए वज़न रखती है — क्योंकि जब जाँचकर्ता और सरकार एक ही पक्ष हों, तो स्वतंत्र निगरानी ही विश्वसनीयता की एकमात्र गारंटी है।
RashtraPress
27 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या राम मंदिर दान गबन मामला क्या है?
यह मामला अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए नकद दान और बहुमूल्य वस्तुओं के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में प्रबंधन संबंधी कथित अनियमितताएँ सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की और दान प्रबंधन से जुड़े 8 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई।
एसआईटी जाँच में अब तक क्या हुआ है?
एसआईटी की प्रारंभिक जाँच के आधार पर दान की गणना और प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों सहित 8 लोगों के विरुद्ध आपराधिक विश्वासघात और गबन के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की जाँच अभी जारी है और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट आनी बाकी है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा क्यों दिया?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने दान गबन विवाद में नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफे की जानकारी दी है। हालाँकि मामले की जाँच अभी जारी है और उन पर सीधे आरोप नहीं लगाए गए हैं।
प्रियंक खड़गे ने कितने रुपये के गबन का आरोप लगाया है?
कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खड़गे ने आरोप लगाया है कि पाँच वर्षों में ₹500 करोड़ की लूट हुई है। यह उनका राजनीतिक आरोप है और एसआईटी जाँच में इसकी पुष्टि अभी होनी बाकी है।
विपक्ष इस मामले में क्या माँग कर रहा है?
विपक्षी दल सार्वजनिक दान के उपयोग में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। कुछ दल सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जाँच चाहते हैं, जबकि कर्नाटक मंत्री प्रियंक खड़गे ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सार्वजनिक स्पष्टीकरण माँगा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 4 दिन पहले
  3. 5 दिन पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 सप्ताह पहले