रांची पुलिस ने 15 साल बाद पकड़ा TSPC का सब जोनल कमांडर विक्रम राम, 25 से अधिक मामलों में था वांटेड
सारांश
मुख्य बातें
रांची पुलिस ने प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के खिलाफ 4 मई 2026 को एक बड़ी सफलता हासिल की, जब संगठन के सब जोनल कमांडर विरम राम उर्फ विक्रम उर्फ अरविंद को लातेहार जिले के चंदवा स्थित धोबी टोला में उसके आवास से गिरफ्तार किया गया। 42 वर्षीय इस उग्रवादी के खिलाफ रांची के विभिन्न थानों में 25 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं और वह पिछले 15 वर्षों से पुलिस की तलाश में था।
कैसे हुई गिरफ्तारी
वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), रांची को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण के निर्देशन और डीएसपी खलारी के नेतृत्व में एक विशेष छापामारी दल गठित किया गया। पुलिस की घेराबंदी देख विक्रम राम ने घर के पीछे से भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने उसे धर दबोचा। इस अभियान में बुढ़मू और ठाकुरगांव के थाना प्रभारियों के साथ-साथ तकनीकी शाखा के सदस्य भी शामिल थे।
बरामद हथियार और सामग्री
पुलिस ने विक्रम राम की निशानदेही पर बुढ़मू के छापर गांव स्थित एक अर्धनिर्मित मकान से भारी मात्रा में सामग्री जब्त की। बरामद सामान में एक 9 एमएम पिस्टल, एक मैग्जीन, सात जिंदा कारतूस, दो राउटर और मोबाइल फोन शामिल हैं।
आरोपी की आपराधिक पृष्ठभूमि
पूछताछ के दौरान विक्रम राम ने बुढ़मू थाना क्षेत्र स्थित ईंट भट्ठे पर हुई फायरिंग सहित कई हिंसक वारदातों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार, वह बुढ़मू, ठाकुरगांव, खलारी, कांके और पिपरवार सहित रांची व चतरा जिले के कई थाना क्षेत्रों में सक्रिय था। उसके खिलाफ दर्ज मामलों में मुख्य रूप से आर्म्स एक्ट, सीएलए एक्ट और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।
रंगदारी का नेटवर्क
जाँच में सामने आया है कि विक्रम राम संगठन के लिए जमीन कारोबारियों, ठेकेदारों, ईंट भट्ठा मालिकों और कोयला व्यवसायियों को फोन पर धमकी देकर लेवी (रंगदारी) की माँग करता था। रंगदारी न देने पर वह अपने दस्ते के साथ मिलकर फौजी कार्रवाई के नाम पर गोलीबारी और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देता था। गौरतलब है कि टीएसपीसी झारखंड के कई जिलों में रंगदारी और हिंसा के ज़रिए अपना प्रभाव बनाए हुए है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस का दावा है कि विक्रम राम के दस्ते के कई सदस्य पहले ही पकड़े जा चुके हैं। शेष सदस्यों के साथ-साथ उग्रवादियों की मदद करने वाले असामाजिक तत्वों की भी पहचान कर ली गई है, जिनके खिलाफ जल्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह गिरफ्तारी झारखंड में नक्सल विरोधी अभियानों की बढ़ती सफलता की कड़ी में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।