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अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस: 69 लोगों की हत्या का इतिहास और वर्तमान में नस्लीय भेदभाव

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अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस: 69 लोगों की हत्या का इतिहास और वर्तमान में नस्लीय भेदभाव

सारांश

हर साल 21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। यह दिन रंगभेद के खिलाफ एकजुटता और जागरूकता का प्रतीक है। जानें शार्पविल नरसंहार की कहानी और आज के हालात।

मुख्य बातें

21 मार्च को अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस मनाया जाता है।
शार्पविल नरसंहार ने रंगभेद के खिलाफ संघर्ष को तेज किया।
आईसीईआरडी ने नस्लीय भेदभाव को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।
आज भी नस्लीय भेदभाव कई रूपों में विद्यमान है।
सरकारें और समाज को मिलकर इसे समाप्त करने के प्रयास करने होंगे।

नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। हर वर्ष 21 मार्च को विश्वभर में अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमें एकजुट होने और रंगभेदी प्रवृत्तियों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करता है। आज लोग इस मुद्दे के प्रति काफी जागरूक हैं, लेकिन ऐसा हमेशा नहीं था।

इस दिन का इतिहास 1960 के शार्पविल नरसंहार से जुड़ा हुआ है, जो दक्षिण अफ्रीका के लिए एक महत्वपूर्ण घटना थी। उस समय, शार्पविल में नागरिक शांतिपूर्वक रंगभेद से संबंधित कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन पर गोलियां चला दीं, जिससे 69 निर्दोष लोग मारे गए।

संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को इसलिए चुना ताकि यह घटना लोगों की यादों में बनी रहे और नस्लीय भेदभाव और रंगभेदी रवैये के खिलाफ जागरूकता फैले। यह सिर्फ एक स्मरण दिवस नहीं है, बल्कि यह एक स्पष्ट संदेश है कि किसी भी समाज में रंग, जाति या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव अस्वीकार्य है।

इसके बाद, 1965 में नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीईआरडी) की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य था कि हर देश अपने कानूनों और नीतियों के माध्यम से नस्लीय भेदभाव को खत्म करे। इस सम्मेलन ने यह भी बताया कि सभी मनुष्य जन्म से स्वतंत्र और समान हैं, चाहे उनकी रंगत, जाति या जन्म स्थान कुछ भी हो।

1979 में, आम सभा ने नस्लवाद और नस्लीय भेदभाव का मुकाबला करने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें सदस्य देशों को हर वर्ष 21 मार्च से नस्लवाद के खिलाफ संघर्षरत लोगों के साथ एकजुटता का एक सप्ताह मनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस अगेंस्ट रेसिज़्म (2001) में डरबन डिक्लेरेशन और प्रोग्राम ऑफ एक्शन (डीडीपीए) को अपनाया गया, जो नस्लीय न्याय और समानता को बढ़ावा देने के लिए एक वैश्विक योजना का कार्य करता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफ्रीकी वंश के लोगों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय दशक की शुरुआत की गई है। 2015 से 2024 तक का पहला दशक और 2025 से शुरू होने वाला दूसरा दशक इस बात पर जोर देता है कि नस्लीय भेदभाव से प्रभावित समुदायों को पहचान, न्याय और विकास मिलना चाहिए।

सवाल यह है कि क्या नस्लीय भेदभाव पूर्णतः समाप्त हो गया है? बिल्कुल नहीं। आज भी दुनिया के कई हिस्सों में, चाहे वह मीडिया हो, राजनीति, खेल या डिजिटल दुनिया, नस्लवाद और भेदभाव विद्यमान हैं। प्रवासियों और अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए आवश्यक है कि सरकारें, मीडिया, संस्थाएं और आम लोग मिलकर कानून बनाएं, शिक्षा में सुधार करें, डेटा एकत्र करें और प्रभावित समुदायों को निर्णयों में शामिल करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह एक गंभीर सामाजिक मुद्दे पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर है। यह हमें याद दिलाता है कि समाज में भेदभाव को समाप्त करना हमारी जिम्मेदारी है।
RashtraPress
16 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अंतरराष्ट्रीय रंगभेद उन्मूलन दिवस कब मनाया जाता है?
यह दिन हर साल 21 मार्च को मनाया जाता है।
इस दिन का महत्व क्या है?
यह दिन रंगभेद के खिलाफ जागरूकता और एकजुटता का प्रतीक है।
शार्पविल नरसंहार क्या था?
1960 में दक्षिण अफ्रीका के शार्पविल में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा 69 लोगों की हत्या की गई थी।
क्या आज भी नस्लीय भेदभाव मौजूद है?
हाँ, आज भी कई क्षेत्रों में नस्लीय भेदभाव और भेदभाव की घटनाएं देखने को मिलती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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