आरपीएफ स्थापना दिवस 2026: 1882 से 20 सितंबर 1985 तक, रेलवे सुरक्षा बल का ऐतिहासिक सफर
सारांश
मुख्य बातें
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) हर वर्ष 20 सितंबर को अपना स्थापना दिवस मनाता है — एक ऐसे बल का उत्सव जिसकी जड़ें 1882 में जमी थीं और जिसे 20 सितंबर 1985 को संसद के ज़रिए संघ के सशस्त्र बल का दर्जा मिला। आज यह बल न केवल रेलवे संपत्तियों की रक्षा करता है, बल्कि करोड़ों रेल यात्रियों की सुरक्षा और संरक्षण का भी ज़िम्मा उठाता है।
1854 से 1882 तक: बिखरी हुई सुरक्षा व्यवस्था
भारतीय रेलवे में सुरक्षा की चुनौतियाँ लगभग उतनी ही पुरानी हैं जितना रेलवे का इतिहास। इन चुनौतियों से निपटने के प्रयासों का पता 1854 तक लगाया जा सकता है, जब पूर्वी भारतीय रेलवे ने पुलिस अधिनियम-1861 को लागू किया। उस शुरुआती दौर में निजी रेलवे कंपनियाँ अपने कर्मचारियों को 'पुलिस' के रूप में नामित करती थीं, जो संपत्ति की निगरानी करते थे।
रेलवे पुलिस समिति-1872 की सिफारिशों के बाद रेलवे पुलिस को 'सरकारी' रूप में संगठित किया गया। 1882 तक यह बल दो हिस्सों में बँट गया — 'सरकारी पुलिस' और 'निजी (कंपनी) पुलिस' — जहाँ रेलवे कंपनियों ने अपनी संपत्ति और यात्रियों के सामान की सुरक्षा का भार सीधे अपने कंधों पर लिया। इसीलिए 1882 को आरपीएफ के इतिहास का आधार वर्ष माना जाता है।
1940 से 1957: 'वॉच एंड वार्ड' से वैधानिक निकाय तक
1940 के दशक के मध्य तक रेलवे कंपनियों के नियंत्रण में बचे 'वॉच एंड वार्ड' कर्मचारी संपत्तियों और माल की चोरी रोकने में काफी हद तक असफल रहे। इसके बावजूद यह व्यवस्था 1954 तक बनी रही।
1954 में तत्कालीन खुफिया ब्यूरो निदेशक की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई, जिसने 'वॉच एंड वार्ड' को एक वैधानिक निकाय के रूप में पुनर्गठित करने की सिफारिश की। इसी के परिणामस्वरूप आरपीएफ अधिनियम-1957 लागू हुआ, जो आधुनिक रेलवे सुरक्षा बल की विधिक नींव बना।
स्वतंत्रता के बाद: व्यापक पुनर्गठन और नई चुनौतियाँ
स्वतंत्रता के बाद निजी रेलवे कंपनियों को पुनर्गठित कर नौ क्षेत्रीय रेलवे का गठन किया गया। इस बड़े ढाँचागत बदलाव के साथ सुरक्षा की ज़रूरतें भी बदलीं। बेहतर कानूनी ढाँचे की आवश्यकता को देखते हुए रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम 1966 में पारित किया गया, जिसने अतिक्रमण और अवैध कब्ज़े के विरुद्ध कड़े प्रावधान किए।
गौरतलब है कि इस दौर में भी यह बल पूरी तरह से सशस्त्र बल का दर्जा पाने से वंचित था। रेलवे संचालन के विस्तार के साथ-साथ यह कमी और अधिक स्पष्ट होती गई।
20 सितंबर 1985: सशस्त्र बल का ऐतिहासिक दर्जा
लगातार यह महसूस किया जा रहा था कि रेलवे सुरक्षा बल को 'संघ के एक सशस्त्र बल' का दर्जा दिया जाना चाहिए। अंततः संसद में आरपीएफ अधिनियम में संशोधन कर 20 सितंबर 1985 को यह ऐतिहासिक दर्जा प्रदान किया गया।
इस संशोधन से आरपीएफ को अन्य सुरक्षा बलों के साथ समन्वय में काम करने का अवसर मिला। राज्य पुलिस बलों की सहायता के लिए नियमित तैनाती से यह बल और अधिक परिपक्व हुआ तथा इसके कामकाज में आमूलचूल बदलाव आया।
आज का आरपीएफ: यात्री सुरक्षा का भरोसेमंद स्तंभ
वर्तमान में रेलवे सुरक्षा बल महज़ संपत्ति की रक्षा तक सीमित नहीं रहा। यह बल रेल यात्रियों — विशेषकर महिलाओं, बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों — की सुरक्षा, मानव तस्करी की रोकथाम और आपदा प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह ऐसे समय में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है जब भारत रेलवे नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। 20 सितंबर 2026 को आरपीएफ का 41वाँ स्थापना दिवस है — एक बल की यात्रा जो 1882 की कंपनी चौकीदारी से आज एक संगठित, सशस्त्र और बहुआयामी सुरक्षा बल बनने तक पहुँची है।