29 अगस्त 2026
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साजिद रशीदी का बयान: आरएसएस पर देश-विदेश में उठते हैं सवाल, जासूसी मामलों में तेज़ कार्रवाई की माँग

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साजिद रशीदी का बयान: आरएसएस पर देश-विदेश में उठते हैं सवाल, जासूसी मामलों में तेज़ कार्रवाई की माँग

सारांश

मुस्लिम नेता साजिद रशीदी ने एक साथ कई संवेदनशील मुद्दों पर बोलते हुए कहा कि आरएसएस को लेकर देश और विदेश में सवाल उठते रहे हैं। मलाला विवाद, कथित जासूसी गिरफ्तारी, महाराष्ट्र भाषा संघर्ष और राहुल गांधी से जुड़ी शिकायत — सभी पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया दी।

मुख्य बातें

मुस्लिम नेता साजिद रशीदी ने 28 अगस्त को आरएसएस की विचारधारा और सार्वजनिक छवि पर सवाल उठाए।
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के संदर्भ में कहा कि संगठन को लेकर देश-विदेश में विरोध सामने आता रहा है।
नई दिल्ली में कथित आईएसआई जासूस की गिरफ्तारी पर त्वरित कानूनी कार्रवाई की माँग की।
अहमदाबाद में मलाला यूसुफज़ई की किताब पढ़ने पर कथित मारपीट के मामले में कड़ी कार्रवाई माँगी।
महाराष्ट्र में हिंदीभाषी नागरिकों और ऑटो चालकों के साथ भाषाई भेदभाव को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताया।
राहुल गांधी के खिलाफ नाज़िया खान की शिकायत पर शिकायतकर्ता की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।

मुस्लिम नेता साजिद रशीदी ने 28 अगस्त को कई अहम मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी — जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत का न्यूयॉर्क कार्यक्रम, नई दिल्ली में कथित आईएसआई जासूसी नेटवर्क, अहमदाबाद में मलाला यूसुफज़ई की किताब पढ़ने पर कथित मारपीट, महाराष्ट्र का भाषा विवाद और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज शिकायत शामिल हैं। रशीदी ने आरएसएस की विचारधारा और संगठनात्मक स्वरूप पर सवाल उठाते हुए कथित जासूसी मामलों में त्वरित कानूनी कार्रवाई की माँग की।

आरएसएस पर उठे सवाल

मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के संदर्भ में रशीदी ने कहा कि आरएसएस को लेकर देश और विदेश में समय-समय पर विरोध सामने आता रहा है। उन्होंने भागवत के विभिन्न बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन को लेकर लोगों के मन में अलग-अलग धारणाएँ बनती हैं, और इसी कारण देश के भीतर तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस पर सवाल उठते रहते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब आरएसएस की वैश्विक उपस्थिति और उसकी सार्वजनिक छवि को लेकर बहस तेज़ हो रही है।

कथित जासूसी मामले में कार्रवाई की माँग

नई दिल्ली में कथित आईएसआई जासूस की गिरफ्तारी पर रशीदी ने कहा कि ऐसे मामलों में जाँच एजेंसियों को तेज़ी से कदम उठाने चाहिए। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जासूसी गतिविधियों में दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया शीघ्र पूरी होनी चाहिए। गौरतलब है कि हाल के महीनों में कथित जासूसी नेटवर्क से जुड़ी गिरफ्तारियाँ सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता बनी हुई हैं।

मलाला की किताब विवाद और महाराष्ट्र भाषा संघर्ष

अहमदाबाद में मलाला यूसुफज़ई की किताब पढ़ने वाले लोगों के साथ कथित मारपीट के मामले पर रशीदी ने कहा कि भारत में भी अनेक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनके जीवन और विचारों को पढ़ा जाना चाहिए। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के तनावपूर्ण संबंधों का हवाला देते हुए मलाला की किताब पढ़ने पर आपत्ति जताई और मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की।

महाराष्ट्र में हिंदीभाषी लोगों और ऑटो-टैक्सी चालकों से जुड़े विवाद पर रशीदी ने सरकार के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मुंबई देशभर से आए लोगों का शहर है और प्रत्येक नागरिक को देश के किसी भी हिस्से में जाकर रोज़गार करने का संवैधानिक अधिकार है। उनके अनुसार, भाषा के आधार पर भेदभाव, मारपीट या रोज़ी-रोटी छीनने की कोई भी कोशिश अस्वीकार्य है और सरकार को ऐसे मामलों में सख्त रुख अपनाना चाहिए।

राहुल गांधी से जुड़ी शिकायत पर प्रतिक्रिया

राहुल गांधी के खिलाफ नाज़िया खान की शिकायत पर रशीदी ने शिकायतकर्ता के कथित पुराने विवादों का उल्लेख करते हुए उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि राजनीतिक नेताओं के बयानों का जवाब राजनीतिक और कानूनी दोनों तरीकों से दिया जाना चाहिए। रशीदी ने राहुल गांधी की मनुस्मृति पर की गई टिप्पणी को राजनीतिक मुद्दा करार देते हुए कहा कि हर दल अपने मतदाताओं को ध्यान में रखकर राजनीति करता है।

आगे की माँगें

रशीदी ने सरकार से शिकायतकर्ता के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जाँच और उसकी कानूनी योग्यता की भी जाँच कराने की माँग की। उनकी यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब देश में कई संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक मुद्दे एक साथ सुर्खियों में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मुद्दों पर विभिन्न समुदायों के नेताओं की प्रतिक्रियाएँ आने वाले समय में राजनीतिक विमर्श को आकार देंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे हर मुद्दे की गहराई कम हो जाती है। आरएसएस पर 'देश-विदेश में सवाल' का दावा तब तक अधूरा है जब तक कि ठोस उदाहरण या संस्थागत आलोचना सामने न आए। महाराष्ट्र भाषा विवाद पर उनका रुख संवैधानिक दृष्टि से सही है, लेकिन कथित जासूसी मामले और मलाला विवाद को एक ही साँस में जोड़ना विश्लेषणात्मक स्पष्टता को कमज़ोर करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि इस तरह के बहु-मुद्दा बयान अक्सर किसी एक मुद्दे पर जवाबदेही तय करने की बजाय राजनीतिक दृश्यता बनाने का काम करते हैं।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साजिद रशीदी ने आरएसएस के बारे में क्या कहा?
साजिद रशीदी ने कहा कि आरएसएस की विचारधारा और संगठनात्मक स्वरूप को लेकर देश और विदेश में समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने मोहन भागवत के न्यूयॉर्क कार्यक्रम के संदर्भ में यह बात कही और कहा कि संगठन को लेकर लोगों के मन में अलग-अलग धारणाएँ बनती हैं।
अहमदाबाद में मलाला की किताब को लेकर क्या विवाद हुआ?
अहमदाबाद में कथित तौर पर मलाला यूसुफज़ई की किताब पढ़ने वाले लोगों के साथ मारपीट की घटना सामने आई। साजिद रशीदी ने भारत-पाकिस्तान तनाव का हवाला देते हुए इस पर आपत्ति जताई और मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की।
महाराष्ट्र भाषा विवाद पर रशीदी का क्या रुख है?
रशीदी ने कहा कि मुंबई देशभर से आए लोगों का शहर है और हर नागरिक को देश में कहीं भी रोज़गार करने का अधिकार है। उन्होंने भाषा के आधार पर भेदभाव या मारपीट को अस्वीकार्य बताते हुए सरकार से सख्त कार्रवाई की माँग की।
राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर रशीदी ने क्या कहा?
नाज़िया खान की राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत पर रशीदी ने शिकायतकर्ता के कथित पुराने विवादों का उल्लेख करते हुए उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं के बयानों का जवाब राजनीतिक और कानूनी दोनों तरीकों से दिया जाना चाहिए।
दिल्ली में कथित आईएसआई जासूस की गिरफ्तारी पर रशीदी की क्या माँग है?
रशीदी ने कहा कि जासूसी गतिविधियों के मामलों में जाँच एजेंसियों को तेज़ी से कार्रवाई करनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर कानूनी प्रक्रिया शीघ्र पूरी होनी चाहिए। उन्होंने ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक बताया।
राष्ट्र प्रेस
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