सेंसेक्स-निफ्टी सपाट कारोबार में, ब्रेंट क्रूड 5 दिन में 16% टूटा; मानसून की कमी से महंगाई की चिंता
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी बुधवार, 17 जून को सुबह के कारोबारी सत्र में सपाट रुख के साथ कारोबार करते दिखे। पिछले तीन सत्रों की तेजी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट और अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर बने आशावाद ने बाजार को ठहराव की स्थिति में रखा।
मुख्य सूचकांकों की स्थिति
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स मात्र 8.58 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,817.58 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 1 अंक की मामूली गिरावट के साथ 23,988 पर था। दिन की शुरुआत में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 284.69 अंक यानी 0.37 प्रतिशत चढ़कर 77,093.17 के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंचा था, और 50 शेयरों वाला निफ्टी 58.89 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,044.50 पर खुला था।
सेक्टोरल प्रदर्शन: कंज्यूमर ड्यूरेबल्स आगे, मेटल-रियल्टी पिछड़े
सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा। इसके बाद निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया का स्थान रहा। निफ्टी फार्मा 0.24 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में रहे।
दूसरी ओर, निफ्टी मेटल 0.87 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ दबाव में रहे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।
निफ्टी 50 के शेयरों में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, ट्रेंट, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डी लेबोरेट्री और एक्सिस बैंक प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।
कच्चे तेल में गिरावट: भुगतान संतुलन के लिए राहत
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सकारात्मक पक्ष यह है कि ब्रेंट क्रूड पिछले पाँच दिनों में करीब 16 प्रतिशत टूटकर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इससे भारत के भुगतान संतुलन घाटे के बढ़ने की आशंकाएं कम हुई हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 0.72 प्रतिशत गिरकर 78.39 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
मानसून की कमी से खाद्य महंगाई की चिंता
नकारात्मक पक्ष पर, विशेषज्ञों ने कहा कि मानसून की कमी खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ा रही है। हालांकि, उनका मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधि बेहतर हो सकती है, जैसा कि अतीत में भी देखा गया है। गौरतलब है कि मानसून की स्थिति सीधे कृषि उत्पादन और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) को प्रभावित करती है, जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति भी टिकी होती है।
विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया कि रुपये में लगातार मजबूती आ रही है और आगे भी इसके मजबूत बने रहने की संभावना है, जो बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। निकट भविष्य में बाजार की दिशा काफी हद तक मानसून की प्रगति और वैश्विक कच्चे तेल के रुझान पर निर्भर करेगी।