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सेंसेक्स-निफ्टी सपाट कारोबार में, ब्रेंट क्रूड 5 दिन में 16% टूटा; मानसून की कमी से महंगाई की चिंता

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सेंसेक्स-निफ्टी सपाट कारोबार में, ब्रेंट क्रूड 5 दिन में 16% टूटा; मानसून की कमी से महंगाई की चिंता

सारांश

तीन दिनों की तेजी के बाद बुधवार को सेंसेक्स-निफ्टी सपाट रहे। ब्रेंट क्रूड पाँच दिनों में 16% गिरकर ~$79/बैरल पर आया — भुगतान संतुलन के लिए राहत। लेकिन मानसून की कमी खाद्य महंगाई की चिंता बढ़ा रही है। बाजार की अगली दिशा मानसून और वैश्विक तेल कीमतों पर टिकी है।

मुख्य बातें

सेंसेक्स 17 जून को 8.58 अंक की बढ़त के साथ 76,817.58 पर और निफ्टी 1 अंक की गिरावट के साथ 23,988 पर सपाट कारोबार में रहे।
ब्रेंट क्रूड पिछले 5 दिनों में करीब 16 प्रतिशत गिरकर लगभग $79 प्रति बैरल पर आया; बुधवार को $78.39 पर था।
निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष प्रदर्शनकर्ता; निफ्टी मेटल 0.87 प्रतिशत सबसे अधिक गिरा।
मानसून की कमी से खाद्य मुद्रास्फीति की चिंता, हालांकि विशेषज्ञों को आने वाले दिनों में सुधार की उम्मीद।
हिंडाल्को , एनटीपीसी , ओएनजीसी , भारती एयरटेल और एक्सिस बैंक निफ्टी 50 के प्रमुख गिरावट वाले शेयर रहे।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी बुधवार, 17 जून को सुबह के कारोबारी सत्र में सपाट रुख के साथ कारोबार करते दिखे। पिछले तीन सत्रों की तेजी के बाद कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट और अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर बने आशावाद ने बाजार को ठहराव की स्थिति में रखा।

मुख्य सूचकांकों की स्थिति

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स मात्र 8.58 अंक यानी 0.01 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,817.58 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 1 अंक की मामूली गिरावट के साथ 23,988 पर था। दिन की शुरुआत में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 284.69 अंक यानी 0.37 प्रतिशत चढ़कर 77,093.17 के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंचा था, और 50 शेयरों वाला निफ्टी 58.89 अंक यानी 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,044.50 पर खुला था।

सेक्टोरल प्रदर्शन: कंज्यूमर ड्यूरेबल्स आगे, मेटल-रियल्टी पिछड़े

सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सूचकांक रहा। इसके बाद निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया का स्थान रहा। निफ्टी फार्मा 0.24 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में रहे।

दूसरी ओर, निफ्टी मेटल 0.87 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ दबाव में रहे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

निफ्टी 50 के शेयरों में हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, एनटीपीसी, ट्रेंट, ओएनजीसी, भारती एयरटेल, डॉ. रेड्डी लेबोरेट्री और एक्सिस बैंक प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे।

कच्चे तेल में गिरावट: भुगतान संतुलन के लिए राहत

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सकारात्मक पक्ष यह है कि ब्रेंट क्रूड पिछले पाँच दिनों में करीब 16 प्रतिशत टूटकर लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। इससे भारत के भुगतान संतुलन घाटे के बढ़ने की आशंकाएं कम हुई हैं। बुधवार को ब्रेंट क्रूड 0.72 प्रतिशत गिरकर 78.39 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 75.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

मानसून की कमी से खाद्य महंगाई की चिंता

नकारात्मक पक्ष पर, विशेषज्ञों ने कहा कि मानसून की कमी खाद्य मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ा रही है। हालांकि, उनका मानना है कि आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधि बेहतर हो सकती है, जैसा कि अतीत में भी देखा गया है। गौरतलब है कि मानसून की स्थिति सीधे कृषि उत्पादन और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) को प्रभावित करती है, जिस पर भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति भी टिकी होती है।

विशेषज्ञों ने यह भी संकेत दिया कि रुपये में लगातार मजबूती आ रही है और आगे भी इसके मजबूत बने रहने की संभावना है, जो बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है। निकट भविष्य में बाजार की दिशा काफी हद तक मानसून की प्रगति और वैश्विक कच्चे तेल के रुझान पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह राहत तभी टिकाऊ होगी जब मानसून समय पर और पर्याप्त रहे — क्योंकि खाद्य महंगाई का दबाव RBI की दर-कटौती की संभावनाओं को सीधे प्रभावित करता है। बाजार की यह सपाट चाल दरअसल दो परस्पर विरोधी संकेतों के बीच निवेशकों की असमंजस को दर्शाती है। अमेरिका-ईरान समझौते पर आशावाद और रुपये की मजबूती तात्कालिक सहारा दे रहे हैं, परंतु वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता और घरेलू मानसून की स्थिति आगे की राह तय करेगी।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

17 जून को सेंसेक्स और निफ्टी किस स्तर पर कारोबार कर रहे थे?
17 जून को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 8.58 अंक की बढ़त के साथ 76,817.58 पर और निफ्टी 1 अंक की मामूली गिरावट के साथ 23,988 पर था। दोनों प्रमुख सूचकांक सपाट रुख में कारोबार करते रहे।
कच्चे तेल की कीमतों में कितनी गिरावट आई और इसका भारत पर क्या असर होगा?
पिछले पाँच दिनों में ब्रेंट क्रूड करीब 16 प्रतिशत गिरकर लगभग $79 प्रति बैरल पर आ गया। विशेषज्ञों के अनुसार इससे भारत के भुगतान संतुलन घाटे की चिंता कम हुई है और रुपये को मजबूती मिल रही है।
मानसून की कमी शेयर बाजार को कैसे प्रभावित करती है?
मानसून की कमी से खाद्य उत्पादन घटता है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ती है और RBI पर ब्याज दरें ऊंची रखने का दबाव बनता है। यह निवेशकों की धारणा को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, विशेषकर FMCG और कृषि-संबद्ध क्षेत्रों में।
आज किस सेक्टर में सबसे अधिक तेजी और गिरावट रही?
निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.26 प्रतिशत की बढ़त के साथ शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहा, जबकि निफ्टी मेटल 0.87 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 0.68 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे अधिक दबाव में रहे।
अमेरिका-ईरान शांति समझौते का भारतीय बाजार पर क्या प्रभाव है?
अमेरिका-ईरान शांति समझौते को लेकर बने आशावाद से वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतें नरम हुई हैं। यह भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए सकारात्मक संकेत है, हालांकि समझौते की पुष्टि और क्रियान्वयन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
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