उत्तर बंगाल चाय बागान भ्रष्टाचार: मंत्री शंकर घोष का TMC पर आरोप, जमीन बिक्री की जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में उत्तरी बंगाल के चाय बागानों की कई ज़मीनें कथित तौर पर गैर-कानूनी ढंग से बेची गईं और उस बिक्री से प्राप्त धनराशि TMC के पार्टी फंड में स्थानांतरित की गई। घोष के अनुसार, इस धन का उपयोग राज्य में TMC के चुनाव प्रचार के लिए किया गया।
मुख्य आरोप और जांच की मांग
सिलीगुड़ी से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक और पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल के दौरान चाय बागान की ज़मीनों के हस्तांतरण की विस्तृत जांच की मांग की। उन्होंने इसे 'संस्थागत भ्रष्टाचार' करार दिया।
घोष ने कहा कि वे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध करेंगे कि ज़मीन हस्तांतरण, लीज़ और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े सभी मामलों की जांच पहले से गठित आयोग के माध्यम से कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में यह भी देखा जाएगा कि चाय बागान की ज़मीनों का उपयोग किसके हित में और किस प्रकार किया गया।
जांच आयोग की भूमिका
गौरतलब है कि वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सरकार ने पहले ही विभिन्न सरकारी क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता में एक आयोग का गठन किया है। पर्यटन मंत्री का प्रस्ताव है कि चाय बागान भूमि से जुड़े मामलों को भी इसी आयोग के दायरे में लाया जाए।
चाय पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना
भ्रष्टाचार के आरोपों के साथ-साथ, घोष ने उत्तरी बंगाल के चाय बागानों में चाय पर्यटन (टी टूरिज्म) को प्रोत्साहित करने की विस्तृत योजना भी सामने रखी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार चाय बागान मालिकों और संगठनों के साथ समझौते कर पुराने बंगलों में पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था करेगी।
मंत्री ने कहा, 'हमारी योजना चाय बागानों के मजदूरों और निवासियों को पर्यटन उद्योग से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की है। इस सिस्टम पर जोर दिया जाएगा, ताकि स्थानीय लोगों और चाय बागान के मजदूरों को पर्यटन से सीधा फायदा हो।'
आम जनता और मजदूरों पर असर
पुराने बंगलों के अतिरिक्त, चाय बागानों के भीतर होमस्टे निर्माण की भी योजना है। राज्य सरकार का लक्ष्य चाय बागानों को केवल चाय उत्पादन क्षेत्रों तक सीमित न रखकर उन्हें महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करना है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पर्यटन के विस्तार से चाय बागानों की मूल पहचान और चाय उद्योग के हितों को कोई नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा। इसके साथ ही, मौजूदा सरकार ने चाय बागान क्षेत्र के 15 प्रतिशत हिस्से को व्यावसायिक उपयोग के लिए अनुमति देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्ववर्ती TMC सरकार के कार्यकाल की जांच तेज़ हो रही है। पर्यटन मंत्री के मुख्यमंत्री को लिखे जाने वाले पत्र और आयोग की कार्रवाई पर अब सबकी नज़रें टिकी हैं।