सोमनाथ मंदिर: सीएम पुष्कर सिंह धामी बोले — सनातन संस्कृति और अदम्य आत्मबल का जीवंत प्रतीक
सारांश
मुख्य बातें
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7 मई 2026 को कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सनातन संस्कृति, अटूट आस्था और अदम्य आत्मबल का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हजारों वर्षों के इतिहास और अनेक आक्रमणों के बावजूद सोमनाथ आज भी पूरे विश्व को यह संदेश देता है कि भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की शक्ति अमर है।
विरासत वर्ष के 75 वर्ष: आयोजन का महत्व
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि 8 से 11 मई के बीच सोमनाथ मंदिर परिसर में आयोजित होने जा रहा 'विरासत वर्ष के 75 वर्ष' कार्यक्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है। उनके अनुसार यह भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय गौरव और आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश की समृद्ध परंपराओं और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक पुनर्जागरण
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और पुनरोद्धार के कार्य नई ऊर्जा और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, केदारनाथ एवं बद्रीनाथ सहित अनेक धार्मिक स्थलों के भव्य विकास को भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण यात्रा का प्रमाण बताया। यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण को नीतिगत प्राथमिकता दी जा रही है।
नई पीढ़ी और सांस्कृतिक जुड़ाव
धामी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी अपनी जड़ों, परंपराओं और भारतीय सभ्यता के मूल्यों से जुड़ रही है। साथ ही देशवासियों में सांस्कृतिक एकता, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक चेतना को भी नई मजबूती मिल रही है। गौरतलब है कि सोमनाथ मंदिर को इतिहास में 17 बार आक्रमणकारियों द्वारा ध्वस्त किए जाने और बार-बार पुनर्निर्माण किए जाने की गाथा भारतीय पुनरुत्थान की प्रतीक मानी जाती है।
सोमनाथ का वैश्विक संदेश
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सोमनाथ से जुड़ा यह विशेष आयोजन भारत की सनातन परंपरा और सांस्कृतिक गौरव को विश्व पटल पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करेगा। उनके अनुसार, इस तरह के सांस्कृतिक उत्सव भारत को एक आध्यात्मिक महाशक्ति के रूप में वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने में सहायक हैं। आने वाले दिनों में इस आयोजन से देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालुओं और सांस्कृतिक प्रतिनिधियों के सोमनाथ पहुँचने की उम्मीद है।