सोनम वांगचुक का 8वां हेल्थ बुलेटिन: हालत स्थिर, पर ब्लड शुगर व पोटैशियम सामान्य से कम
सारांश
मुख्य बातें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 21 जुलाई 2026 को सुबह 9 बजे आठवां हेल्थ बुलेटिन जारी किया। बुलेटिन के अनुसार, उनके समस्त महत्वपूर्ण शारीरिक मानक फिलहाल स्थिर हैं, किंतु ब्लड शुगर और सीरम पोटैशियम का स्तर अब भी सामान्य सीमा से नीचे बना हुआ है। वांगचुक का उपचार वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) एवं सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली में विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहु-विषयक टीम की निगरानी में जारी है।
मुख्य चिकित्सीय स्थिति
रविवार रात लिए गए रक्त नमूने की जांच में वांगचुक का सीरम पोटैशियम स्तर 3.2 मिलीमोल प्रति लीटर पाया गया है। चिकित्सा मानकों के अनुसार, वयस्कों में पोटैशियम का सामान्य स्तर 3.5 से 5.0 मिलीमोल प्रति लीटर होना चाहिए — अर्थात वांगचुक का स्तर सामान्य सीमा से नीचे है। इसके अतिरिक्त, उनका ब्लड शुगर स्तर भी अभी सामान्य से कम बना हुआ है।
बुलेटिन में यह भी उल्लेख किया गया है कि वांगचुक में पैनसाइटोपीनिया की समस्या लगातार बनी हुई है — एक ऐसी स्थिति जिसमें शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (एनीमिया), श्वेत रक्त कोशिकाओं (ल्यूकोसाइट्स) और प्लेटलेट्स तीनों की संख्या एक साथ कम हो जाती है। डॉक्टरों ने इन सभी चिकित्सीय और प्रयोगशाला संकेतकों की कड़ी निगरानी को अनिवार्य बताया है।
उपचार की स्थिति और वांगचुक का रुख
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, वांगचुक को फिलहाल ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन और पोटैशियम सप्लीमेंट दिए जा रहे हैं। हालांकि, डॉक्टरों की बार-बार सलाह के बावजूद वे इंट्रावेनस (IV) फ्लूइड और ग्लूकोज लेने से इनकार कर रहे हैं। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि दीर्घकालिक उपवास के कारण शरीर पर पड़ रहे प्रभाव, हल्के से मध्यम स्तर के डिहाइड्रेशन और लगातार सामने आ रही प्रयोगशाला असामान्यताओं को देखते हुए यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
चिकित्सा टीम की संरचना
वांगचुक की देखभाल के लिए VMMC, सफदरजंग अस्पताल और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली के विशेषज्ञों की एक संयुक्त बहु-विषयक टीम गठित की गई है। अस्पताल ने स्पष्ट किया है कि वांगचुक को सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उनकी स्थिति पर चौबीसों घंटे नज़र रखी जा रही है।
आगे का उपचार
डॉक्टरों के अनुसार, आगे का उपचार वांगचुक की चिकित्सकीय प्रगति और लगातार होने वाली प्रयोगशाला जांच की रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब उनके उपवास की अवधि लंबी होती जा रही है और शरीर पर इसके संचयी प्रभाव चिकित्सकों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। गौरतलब है कि यह लगातार आठवाँ बुलेटिन है, जो दर्शाता है कि उनकी स्थिति पर सरकारी स्तर पर निरंतर निगरानी जारी है।