एसएससी भर्ती परीक्षा धांधली: STF ने मॉडिफाइड स्क्रीन सप्लायर लोकेश को अलवर से किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विशेष कार्यबल (STF) ने 30 जुलाई 2026 को कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की CAPF/SSF कांस्टेबल (जनरल ड्यूटी) एवं असम राइफल्स राइफलमैन भर्ती परीक्षा-2026 में हाईटेक धांधली कराने वाले गिरोह के फरार सदस्य लोकेश पुत्र लालाराम, निवासी कृष्णा कॉलोनी, देसूला, जिला अलवर (राजस्थान) को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के घर से 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन सहित भारी मात्रा में हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
इस पूरे प्रकरण का पर्दाफाश 22 मई 2026 को हुआ था, जब गौतमबुद्धनगर के थाना नॉलेज पार्क क्षेत्र स्थित बालाजी डिजिटल जोन परीक्षा केंद्र पर छापेमारी में गिरोह के मुख्य आरोपी व केंद्र संचालक प्रदीप चौहान, हैकर अमित राणा समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस कार्रवाई में करीब ₹50 लाख नकद, प्रॉक्सी सर्वर और अन्य डिजिटल उपकरण भी बरामद हुए थे।
इसके बाद 6 जुलाई 2026 को गिरोह के एक अन्य वांछित सदस्य इन्द्रजीत उर्फ योगी को गिरफ्तार किया गया। 16 जुलाई 2026 को जेल में बंद आरोपियों से पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान पूछताछ में मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन के नेटवर्क का खुलासा हुआ, जिसमें लोकेश का नाम सामने आया। इसके बाद से वह फरार था, जिसे अब दबोच लिया गया है।
बरामद उपकरण और तकनीकी तरीका
STF के अनुसार, आरोपी लोकेश के कब्जे से बरामद सामग्री में 92 मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन, 45 वीजीए कार्ड, 20 वीजीए-टू-एचडीएमआई कार्ड, 14 रास्पबेरी पाई डिवाइस, 12 मेमोरी कार्ड, 15 टाइप-सी केबल, 10 यूएसबी केबल, 5 वीजीए स्विच, एक लेनोवो लैपटॉप, वाई-फाई डोंगल, हीट सिंक और सोल्डरिंग उपकरण शामिल हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, ये मॉडिफाइड स्क्रीन देखने में सामान्य मॉनिटर जैसी लगती थीं, लेकिन इनके भीतर रास्पबेरी पाई और विशेष नेटवर्किंग उपकरण छिपाए जाते थे। परीक्षा के दौरान स्क्रीन पर दिखने वाले प्रश्नपत्र को वाई-फाई डोंगल और विशेष राउटर की मदद से परीक्षा केंद्र के बाहर बैठे सॉल्वर तक लाइव प्रसारित किया जाता था, और सॉल्वर तत्काल उत्तर अभ्यर्थी को पहुँचाता था। गौरतलब है कि इसके लिए ऐसे उन्नत राउटर और डोंगल का इस्तेमाल किया जाता था जो परीक्षा केंद्रों में लगे जैमर की फ्रीक्वेंसी से परे काम करते थे।
आरोपी की पृष्ठभूमि और आपराधिक भूमिका
पूछताछ में लोकेश ने बताया कि वह बीए पास है और वर्ष 2013 में कंप्यूटर हार्डवेयर एवं नेटवर्किंग का प्रशिक्षण लेने के बाद मानसी इन्फोटेक के नाम से दुकान चला रहा था। वर्ष 2017 में नेटवर्किंग और सीसीटीवी कार्य के दौरान हरियाणा निवासी अंकुर ने उसे पहली बार मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन का नमूना दिया था। इसके बाद उसने स्वयं यह तकनीक विकसित कर ली और उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान तथा महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में ऐसे उपकरण सप्लाई करने लगा।
STF के अनुसार, एक मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन तैयार करने में लगभग ₹40,000 की लागत आती थी, जबकि आरोपी प्रत्येक स्क्रीन को मॉडिफाई करने के एवज में अलग से करीब ₹5,000 वसूलता था।
आगे की कार्रवाई
गिरफ्तार आरोपी लोकेश को थाना नॉलेज पार्क में दर्ज मुकदमे के तहत न्यायालय में पेश किया जा रहा है। STF ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच अभी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं और भर्ती परीक्षाओं में तकनीकी कदाचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।