14 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

इरोड में तूफान से 10,000 से अधिक केले के पौधे तबाह, किसानों को ₹50 लाख का नुकसान

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
इरोड में तूफान से 10,000 से अधिक केले के पौधे तबाह, किसानों को ₹50 लाख का नुकसान

सारांश

इरोड में एक रात की आँधी ने सात महीने की मेहनत मिट्टी में मिला दी — 10,000 से अधिक नेन्द्रन केले के पौधे, फल देने की दहलीज पर, जमींदोज हो गए। ₹50 लाख के नुकसान के साथ पहले से कर्जदार किसान अब सरकारी मुआवजे की राह देख रहे हैं।

मुख्य बातें

14 सितंबर 2026 की शाम तूफान और भारी बारिश ने इरोड जिले के कई गाँवों में केले के बागानों को तबाह कर दिया।
10,000 से अधिक केले के पौधे उखड़ गए, जिनमें अधिकांश नेन्द्रन किस्म के थे।
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार कुल नुकसान ₹50 लाख से अधिक; अंतिम आकलन अभी बाकी।
प्रभावित गाँवों में बूथपड़ी , अन्ना नगर , पूनाची , केम्मियम्पट्टी , पटलूर और मुलियानूर शामिल हैं।
पौधे सात महीने की खेती के बाद फल देने की अवस्था में थे — नुकसान विशेष रूप से गंभीर।
किसानों ने तमिलनाडु सरकार से तत्काल मुआवजे और राहत की माँग की है।

तमिलनाडु के इरोड जिले में 14 सितंबर 2026 की शाम से आधी रात के बीच आए तूफान और भारी बारिश ने 10,000 से अधिक केले के पौधे उखाड़ दिए, जिससे क्षेत्र के किसानों को प्रारंभिक अनुमान के अनुसार ₹50 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। तेज हवाओं और मूसलाधार बारिश के कारण फसल उस समय नष्ट हुई जब पौधे फल देने की अवस्था में थे, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और निवेश बर्बाद हो गया।

प्रभावित क्षेत्र और किसान

आँधी-तूफान का सबसे अधिक असर अम्मापेट्टई के पास स्थित बूथपड़ी गाँव और अन्ना नगर, पूनाची, केम्मियम्पट्टी, पटलूर तथा मुलियानूर के बागानों पर पड़ा। इन गाँवों में फैले खेत बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए।

प्रभावित किसानों में सेंथिल कुमार (43 वर्ष), वेलुचामी (73 वर्ष), कावेरी (76 वर्ष), परिमाला (56 वर्ष), मूर्ति (62 वर्ष) और पूनाची ईसन शामिल हैं। किसानों ने बताया कि हवाओं की रफ्तार इतनी तेज थी कि उन्हें खड़ी फसल बचाने का कोई मौका ही नहीं मिला।

नुकसान की गहराई

नष्ट हुए पौधों में अधिकांश नेन्द्रन किस्म के केले के थे, जिनकी खेती लगभग सात महीने से की जा रही थी। ये पौधे फल देने की अवस्था में पहुँच चुके थे और किसानों को बेहतर उपज की पूरी उम्मीद थी। तूफान थमने के बाद खेतों में हजारों पौधे उखड़े या टूटे हुए मिले।

किसानों ने बताया कि उन्होंने जमीन तैयार करने, पौधे खरीदने, खाद व कीटनाशक, सिंचाई सुविधाओं के रखरखाव और कृषि श्रमिकों की मजदूरी में बड़ी राशि लगाई थी। फसल पकने के ठीक करीब यह तबाही उनके लिए दोहरा आघात साबित हुई है।

आर्थिक संकट और पुराने बोझ

प्रारंभिक आकलन के अनुसार 10,000 से अधिक पौधों के नष्ट होने से कुल ₹50 लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। किसानों को आशंका है कि विस्तृत सर्वे में यह आँकड़ा और भी बढ़ सकता है।

गौरतलब है कि ये किसान पहले से ही बढ़ती खेती लागत, अस्थिर बाजार कीमतों और कृषि श्रमिकों की कमी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। जिन किसानों ने खेती के खर्चों के लिए कर्ज लिया था, उन पर अब वित्तीय बोझ और भी गहरा हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु के कई जिलों में मानसून की अनिश्चितता पहले से ही कृषि क्षेत्र को प्रभावित कर रही है।

सरकार से मुआवजे की माँग

प्रभावित किसानों ने राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों से क्षतिग्रस्त बागानों का तत्काल निरीक्षण कर नुकसान का व्यापक आकलन करने का आग्रह किया है। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से बिना देरी किए पर्याप्त मुआवजा और राहत उपाय मुहैया कराने की अपील की है।

किसानों का कहना है कि समय पर वित्तीय सहायता ही उन्हें इस झटके से उबरने और खेती फिर से शुरू करने में सक्षम बना सकती है।

आगे की राह

फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आधिकारिक आकलन अभी बाकी है। यदि सरकारी सर्वे में नुकसान की पुष्टि होती है, तो राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के तहत मुआवजे का रास्ता खुल सकता है। किसानों की निगाहें अब सरकारी टीमों के निरीक्षण दौरे पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ये अपीलें हर मानसून के बाद दोहराई जाती रहेंगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इरोड में तूफान से केले के बागानों को कितना नुकसान हुआ?
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार 14 सितंबर 2026 की रात आए तूफान में इरोड जिले के विभिन्न गाँवों में 10,000 से अधिक केले के पौधे नष्ट हुए और कुल नुकसान ₹50 लाख से अधिक आँका गया है। किसानों को आशंका है कि अंतिम सर्वे में यह आँकड़ा और बढ़ सकता है।
कौन-से गाँव सबसे अधिक प्रभावित हुए?
अम्मापेट्टई के पास बूथपड़ी गाँव और अन्ना नगर, पूनाची, केम्मियम्पट्टी, पटलूर तथा मुलियानूर के बागान सबसे अधिक प्रभावित हुए। इन सभी क्षेत्रों में नेन्द्रन किस्म के केले की बड़े पैमाने पर खेती होती है।
किसानों की माँग क्या है?
प्रभावित किसानों ने राजस्व और कृषि विभाग के अधिकारियों से तत्काल निरीक्षण और व्यापक नुकसान आकलन की माँग की है। इसके साथ ही उन्होंने तमिलनाडु सरकार से बिना देरी किए पर्याप्त मुआवजा और राहत उपाय देने की अपील की है।
इन किसानों की आर्थिक स्थिति पहले से कैसी थी?
प्रभावित किसान पहले से ही बढ़ती खेती लागत, अस्थिर बाजार कीमतों और कृषि श्रमिकों की कमी से जूझ रहे थे। कई किसानों ने खेती के खर्च के लिए कर्ज लिया था और फसल की बिक्री से उसे चुकाने की उम्मीद थी, जो तूफान ने तोड़ दी।
नेन्द्रन केले की किस्म इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?
नेन्द्रन केरल और तमिलनाडु में उगाई जाने वाली उच्च-मूल्य किस्म है, जिसकी बाजार में अच्छी माँग और कीमत मिलती है। इसे पकने में सात से आठ महीने लगते हैं, इसलिए फसल तैयार होने के समय नुकसान किसान के पूरे निवेश को एक झटके में खत्म कर देता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 8 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले