भारत-पाकिस्तान वार्ता की पैरवी पर जम्मू-कश्मीर के नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा का कड़ा प्रहार, बोले- 'गंभीर जाँच ज़रूरी'
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने 1 जुलाई 2026 को भारत-पाकिस्तान वार्ता की पैरवी करने वाले नेताओं पर तीखा हमला बोला और इस माँग को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज़ से अनुचित करार दिया। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को और सुदृढ़ करने की कोशिशें जारी रहने के बीच उन्होंने कहा कि ऐसी वकालत की गंभीरता से जाँच होनी चाहिए।
मुख्य आरोप और बयान
शर्मा ने कहा, 'इस देश की एक अजीब विडंबना है। जो विषय किसी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, उसमें जबरदस्ती दखल देना — जगजाहिर है कि यह किस चीज़ की ओर संकेत करता है।' उन्होंने फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और मीरवाइज उमर फारूक का नाम लेते हुए कहा कि ये नेता हमेशा अलगाववाद का समर्थन करते रहे हैं और आतंकवाद को संरक्षण देते रहे हैं। ऐसे में इनका पाकिस्तान के साथ वार्ता की वकालत करना 'बहुत ही अजीब और गंभीर मामला' है।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ
'ऑपरेशन सिंदूर' का उल्लेख करते हुए शर्मा ने कहा कि इस अभियान में भारतीय सेना ने अपना शौर्य और पराक्रम सिद्ध किया। उनके अनुसार, जब वीर जवान अपनी भूमि की रक्षा के लिए डटे हों, उस वक्त बातचीत की पैरवी करना 'विवादित और अनुचित' दिखाई पड़ता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमापार तनाव के बाद भारत की सैन्य सक्रियता को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है।
जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था और युवाओं की अपेक्षाएँ
शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था दृढ़ हुई है और यहाँ का नौजवान शांति, रोज़गार और समृद्धि की उम्मीद रखता है। उनका तर्क था कि इन उम्मीदों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय पाकिस्तान से वार्ता की माँग उठाना प्राथमिकताओं की गलत समझ को दर्शाता है।
चयनात्मक वकालत पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि जो नेता खुद को 'बड़े दिग्गज' मानते हैं, उन्होंने कभी नेपाल, भूटान, चीन या म्यांमार के साथ भारत की वार्ता को लेकर आवाज़ नहीं उठाई। उनका कहना था, 'जब-जब भारत ने शांति के लिए प्रयास किए हैं, तब-तब पाकिस्तान ने छुरा घोंपने का काम किया है।'
पृष्ठभूमि: संयुक्त पत्र और हस्ताक्षरकर्ता
गौरतलब है कि भारत और पाकिस्तान के लगभग 117 लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संयुक्त रूप से पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच वार्ता की अपील की है। भारत की ओर से इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, मणिशंकर अय्यर, मनोज झा और हुमायूँ कबीर जैसे नेता शामिल हैं। शर्मा की यह प्रतिक्रिया सीधे इसी पत्र के संदर्भ में आई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज़ होने के आसार हैं।