वारंगल में प्राचीन मंदिर ध्वंस की खबरें गलत: तेलंगाना अधिकारियों का खंडन, पुनर्स्थापन का आश्वासन

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वारंगल में प्राचीन मंदिर ध्वंस की खबरें गलत: तेलंगाना अधिकारियों का खंडन, पुनर्स्थापन का आश्वासन

सारांश

वारंगल में प्राचीन मंदिर ध्वंस की खबरें राजनीतिक तूफान लेकर आईं — लेकिन संयुक्त सरकारी जाँच ने दावों को गलत पाया। असल में मिले जर्जर ढाँचे को अब पुरातत्व विभाग में दर्ज कराने और उसी स्थान पर पुनर्स्थापित करने का आश्वासन दिया गया है।

मुख्य बातें

वारंगल कलेक्टर ऑफिस ने 8 मई 2025 को प्राचीन मंदिर ध्वंस की मीडिया रिपोर्ट्स को तथ्यहीन बताकर खारिज किया।
6 मई को हुई संयुक्त जाँच में पाया गया कि 30 एकड़ भूमि पर घनी झाड़ियों में एक पुरानी जर्जर संरचना के अवशेष मिले, कोई विध्वंस नहीं हुआ।
पुरातत्व विभाग ने पुष्टि की कि यह संरचना किसी संरक्षित स्मारक या पुरातात्विक स्थल के रूप में दर्ज नहीं थी।
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह भूमि सरकारी भूमि है और पहले ही जनजातीय कल्याण विभाग को आवंटित की जा चुकी थी।
माधव रेड्डी ने आश्वासन दिया कि ढाँचे को इतिहासकारों व पुरातत्व विभाग के परामर्श से उसी स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाएगा।
विपक्षी दलों भारत राष्ट्र समिति (BRS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तत्काल पुनर्स्थापन की माँग की थी।

तेलंगाना के वारंगल जिले के अधिकारियों ने 8 मई 2025 को उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि खानापुर मंडल के पहाड़ला अशोकनगर गाँव में एक सरकारी स्कूल के निर्माण कार्य के दौरान एक प्राचीन मंदिर को ध्वस्त किया गया। वारंगल कलेक्टर ऑफिस के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि ये खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और वास्तविकता पर आधारित नहीं हैं।

संयुक्त जाँच में क्या सामने आया

6 मई 2025 को राजस्व विभाग, पुरातत्व विभाग, खानापुर तहसीलदार, तेलंगाना स्टेट एजुकेशन एंड वेलफेयर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (TGWEIDC) और निर्माण एजेंसी के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण किया। जाँच में पाया गया कि प्रस्तावित

संपादकीय दृष्टिकोण

जो जिम्मेदार विपक्षी आचरण पर सवाल उठाता है। दूसरी तरफ, सरकार का यह दायित्व था कि निर्माण से पहले ही पुरातत्व विभाग से क्लीयरेंस ली जाती — जो स्पष्ट रूप से नहीं हुई। जर्जर ढाँचे की पहचान और पुनर्स्थापन का आश्वासन सकारात्मक है, लेकिन असली जवाबदेही यह है कि 30 एकड़ की सफाई से पहले पुरातात्विक सर्वेक्षण क्यों नहीं कराया गया।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वारंगल में प्राचीन मंदिर ध्वंस का विवाद क्या है?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि खानापुर मंडल के पहाड़ला अशोकनगर गाँव में 'यंग इंडिया इंटीग्रेटेड रेजिडेंशियल स्कूल कॉम्प्लेक्स' के निर्माण के दौरान एक प्राचीन मंदिर को ध्वस्त किया गया। वारंगल जिला अधिकारियों ने 8 मई 2025 को इन दावों को तथ्यहीन बताकर खारिज कर दिया।
संयुक्त जाँच में क्या पाया गया?
6 मई 2025 को हुई संयुक्त जाँच में पाया गया कि 30 एकड़ भूमि पर घनी झाड़ियों की सफाई के दौरान एक पुरानी जर्जर संरचना के अवशेष मिले। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि निर्माण एजेंसी द्वारा कोई विध्वंस या तोड़फोड़ नहीं की गई।
क्या यह संरचना पुरातत्व विभाग में संरक्षित थी?
नहीं। पुरातत्व विभाग ने पुष्टि की कि यह संरचना किसी संरक्षित स्मारक या पुरातात्विक स्थल के रूप में दर्ज नहीं थी। अब इसे पुरातत्व विभाग में अधिसूचित कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस भूमि का मालिकाना हक किसके पास है?
राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार यह सरकारी भूमि है, न कि देवस्थान (एंडोमेंट) भूमि। इसे पहले ही जनजातीय कल्याण विभाग को आवंटित किया जा चुका था।
जर्जर संरचना का आगे क्या होगा?
सत्य शारदा और डी. माधव रेड्डी ने आश्वासन दिया है कि इस संरचना को इतिहासकारों, स्थपतियों और पुरातत्व विभाग के परामर्श से उसी स्थान पर पुनर्स्थापित किया जाएगा। साथ ही इसे पुरातत्व विभाग में अधिसूचित कराने की प्रक्रिया भी आरंभ होगी।
राष्ट्र प्रेस
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