टीआईएसएस के 7 छात्रों को अग्रिम जमानत, साईबाबा श्रद्धांजलि मामले में 2 की याचिका खारिज
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई की सेशन कोर्ट ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के 7 छात्रों को 8 अगस्त 2026 को अग्रिम जमानत प्रदान की। यह मामला प्रोफेसर जी.एन. साईबाबा की पुण्यतिथि पर टीआईएसएस परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम और उसमें कथित तौर पर लगाए गए नारों से जुड़ा है। हालाँकि, दो अन्य छात्रों — कमाख्या दास और अभिरूप पॉल — की अग्रिम जमानत याचिकाएँ अदालत ने खारिज कर दीं।
मामले की पृष्ठभूमि
यह प्रकरण अक्टूबर 2025 में टीआईएसएस परिसर, मुंबई में आयोजित एक कथित अनधिकृत कार्यक्रम के बाद दर्ज एफआईआर से उपजा है। कार्यक्रम में पूर्व दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एवं कार्यकर्ता जी.एन. साईबाबा को श्रद्धांजलि दी गई थी। पुलिस का आरोप है कि इस दौरान उमर खालिद और शरजील इमाम — जिनके विरुद्ध गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामले लंबित हैं — की रिहाई की माँग को लेकर भी नारे लगाए गए। नौ छात्रों ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
अदालत का रुख — 7 को राहत क्यों
अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी दिवंगत व्यक्ति को श्रद्धांजलि देना अथवा माओवादी लेखकों द्वारा प्रकाशित पुस्तकें डाउनलोड करना अपने आप में कोई आपराधिक कृत्य नहीं है। 7 छात्रों के मामले में अदालत ने पाया कि उनकी गिरफ्तारी को अनिवार्य ठहराने वाली कोई ठोस सामग्री अभियोजन पक्ष प्रस्तुत नहीं कर सका, इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत दी गई।
दास और पॉल की याचिका खारिज — कारण
कमाख्या दास और अभिरूप पॉल के मामले में जाँच एजेंसी ने अदालत के समक्ष माओवादी विचारधारा से संबंधित सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त डेटा, डिलीट किए गए डेटा की पुनर्प्राप्ति और जाँच में सहयोग न करने के बिंदु रखे। अदालत ने इन तर्कों को पर्याप्त मानते हुए दोनों की अग्रिम जमानत याचिकाएँ अस्वीकार कर दीं।
सुनवाई में विलंब और प्रशासनिक बदलाव
गौरतलब है कि इस मामले की सुनवाई पहले लंबित रही। बाद में केस क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित होने और न्यायाधीश के तबादले के कारण सुनवाई दोबारा आरंभ हुई। यह ऐसे समय में आया है जब यूएपीए और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में न्यायिक समीक्षा की माँग देशभर में तेज़ हो रही है।
आगे क्या होगा
कमाख्या दास और अभिरूप पॉल के लिए उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प खुला है। वहीं, 7 छात्रों को अग्रिम जमानत पर शर्तें लागू रहेंगी और जाँच जारी रहेगी। मामले की अगली सुनवाई की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।