टोल प्लाजा घोटाला: ईडी ने 6 राज्यों में 14 ठिकानों पर की छापेमारी, ₹1.03 करोड़ नकद और 8 बैंक लॉकर फ्रीज
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इलाहाबाद सब-जोनल ऑफिस ने 3 सितंबर को टोल प्लाजा घोटाले की जांच के तहत धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और दिल्ली-एनसीआर में एक साथ 14 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। इस कार्रवाई में लगभग ₹1.03 करोड़ नकद बरामद हुए और 8 बैंक लॉकर फ्रीज किए गए।
घोटाले की जड़ें: अट्रैला टोल प्लाजा से हुई शुरुआत
ईडी की यह जांच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। जनवरी 2025 में पुलिस ने मिर्जापुर के अट्रैला शिव गुलाम टोल प्लाजा पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का भंडाफोड़ किया था। आरोप है कि बिना फास्टैग बैलेंस या कम बैलेंस वाले वाहनों से टोल वसूलने के लिए एक अनधिकृत मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जाता था।
यह अवैध ऐप नकली रसीदें तैयार करता था और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के आधिकारिक सिस्टम से वसूली की जानकारी छिपाता था, जिससे कानूनी टोल रिपोर्टिंग से बचा जाता था और प्राधिकरण को राजस्व का सीधा नुकसान होता था।
मुख्य घटनाक्रम: 'मॉबडेटा' और 'एनी' ऐप का जाल
ईडी की जांच में सामने आया है कि बिना फास्टैग वाले वाहनों से अवैध टोल वसूली को सुचारु बनाने के लिए 'मॉबडेटा' और 'एनी' नाम के दो अनधिकृत ऐप बनाए और संचालित किए गए। इन ऐप की निगरानी के लिए अलग से पोर्टल भी विकसित किए गए थे।
आरोपियों से जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच से खुलासा हुआ कि यह अवैध तंत्र देशभर के लगभग 100 टोल प्लाजा पर सक्रिय था। डिजिटल रिकॉर्ड में करोड़ों रुपए की अनधिकृत टोल रसीदें दर्ज पाई गई हैं। गौरतलब है कि यह मामला केवल एक टोल प्लाजा तक सीमित न होकर एक सुनियोजित राष्ट्रव्यापी नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
बिचौलियों का नेटवर्क और एनएचएआई की भूमिका
जांच में एनएचएआई द्वारा नियुक्त बिचौलियों और टोल वसूली करने वाली संस्थाओं की इस अनधिकृत ऐप के संचालन में कथित भूमिका का भी पता चला है। अधिकारियों के अनुसार, टोल प्लाजा संचालकों और संदिग्ध व्यक्तियों व संस्थाओं के एक बड़े नेटवर्क की पहचान की गई है, जिनकी आगे जांच की जरूरत है। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार फास्टैग प्रणाली को पारदर्शी और अनिवार्य बनाने पर जोर दे रही है।
छापेमारी में क्या मिला
तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने लगभग ₹1.03 करोड़ नकद, अकाउंट बुक, वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए। इसके अलावा 8 बैंक लॉकर फ्रीज किए गए। जांच दल को टोल-वार वसूली और रिपोर्टिंग, बिना फास्टैग वाली वसूली, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन तथा संदिग्ध बातचीत से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज और सामग्री भी हाथ लगी।
आगे क्या होगा
ईडी की यह कार्रवाई पीएमएलए के तहत धन शोधन की जांच का हिस्सा है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ या संपत्ति कुर्की की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फोरेंसिक विश्लेषण और जब्त दस्तावेजों की जांच के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है।