ट्रंप की नीतियाँ पूरी दुनिया के लिए खतरा, भारत को भी नुकसान संभव: हुसैन दलवई
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने 15 जुलाई 2026 को मुंबई में अंतर्राष्ट्रीय और घरेलू राजनीतिक मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियाँ केवल ईरान के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुकी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इन नीतियों का सर्वाधिक नुकसान भारत जैसे देशों को उठाना पड़ सकता है।
ट्रंप नीतियों पर दलवई का रुख
दलवई ने कहा कि भारतीय नेतृत्व को यह समझना होगा कि ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति का असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार, विश्व के देशों को एकजुट होकर ट्रंप को यह स्पष्ट संदेश देना चाहिए कि इस प्रकार की नीतियाँ स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट पक्ष सामने रखे।
इज़रायल-ईरान संघर्ष पर चिंता
इज़रायल की सैन्य कार्रवाइयों पर प्रतिक्रिया देते हुए दलवई ने कहा कि जिस प्रकार निर्दोष नागरिकों, विशेषकर बच्चों की जानें जा रही हैं, उस पर भारत सरकार को खुलकर बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवीय मूल्यों के विरुद्ध हो रही घटनाओं पर चुप्पी साधना उचित नहीं है।
राम मंदिर एसआईटी रिपोर्ट पर सवाल
राम मंदिर से जुड़ी एसआईटी जाँच रिपोर्ट के बारे में पूछे जाने पर दलवई ने कहा कि उन्होंने जगद्गुरु शंकराचार्य का बयान सुना है। उनके अनुसार, शंकराचार्य का मत है कि इस जाँच से कोई ठोस परिणाम निकलने की संभावना नहीं, क्योंकि जाँच करने वाले अधिकारी भी सरकार के ही अधीन हैं। दलवई ने यह भी जोड़ा कि शंकराचार्य इसे केवल धार्मिक नहीं, बल्कि भाजपा और आरएसएस की राजनीति से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि कई साधु-संत इस राय से सहमत नहीं हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति और एनसीपी-फडणवीस बैठक
महाराष्ट्र की राजनीति पर दलवई ने कहा कि कुछ नेता दिल्ली जाकर अपनी राजनीतिक उपलब्धियाँ प्रदर्शित करने में लगे हैं, ताकि मंत्री पद हासिल किया जा सके। एनसीपी नेताओं और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की बैठक पर उन्होंने कहा कि इससे कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। उनका मानना है कि विचारधारा से जुड़े नेता भाजपा में नहीं जाएँगे; केवल राजनीतिक लाभ या व्यक्तिगत स्वार्थ देखने वाले कुछ लोग ही ऐसा कदम उठा सकते हैं।
कॉमेडियन समय रैना मामले पर दलवई की राय
कॉमेडियन समय रैना पर लगाए गए जुर्माने के बारे में दलवई ने कहा कि महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी निश्चित रूप से अस्वीकार्य है, किंतु इतनी बड़ी सज़ा देना भी उचित नहीं लगता। उन्होंने आशंका जताई कि यदि सरकार सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अभिव्यक्ति पर अत्यधिक नियंत्रण रखेगी, तो इससे लोकतांत्रिक माहौल प्रभावित हो सकता है। आलोचकों का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जवाबदेही के बीच संतुलन बनाना सरकार की जिम्मेदारी है।