ट्विशा शर्मा मर्डर केस: परिवार ने दूसरे पोस्टमॉर्टम और दिल्ली ट्रांसफर की मांग की, जांच में हेरफेर का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के भोपाल में ट्विशा शर्मा मौत मामले ने 19 मई 2026 को नया मोड़ ले लिया, जब मृतका के परिजनों ने दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने और जांच को दिल्ली स्थानांतरित करने की मांग एक बार फिर तेज कर दी। परिवार का कथित तौर पर आरोप है कि इस मामले में प्रभावशाली लोगों का दबाव है और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है।
परिवार की मांगें और आरोप
ट्विशा शर्मा की माँ रेखा शर्मा ने कहा कि पिछले 5-6 दिनों से परिवार अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर लगा रहा है, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने कहा, 'मैं दोबारा पोस्टमॉर्टम की मांग कर रही हूँ और चाहती हूँ कि हमारा केस जल्द से जल्द दिल्ली ट्रांसफर किया जाए। यहाँ हमारी कोई मदद नहीं कर रहा।'
ट्विशा के पिता नवनिधि शर्मा ने दूसरे पोस्टमॉर्टम की अनुमति पहले दिए जाने और बाद में रोके जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'अगर मामला कमिश्नर के अधिकार क्षेत्र में था तो अनुमति पहले कैसे मिल गई और बाद में क्यों रोक दी गई? यह साफ तौर पर प्रभाव का मामला है।'
आरोपियों पर गंभीर आरोप
नवनिधि शर्मा ने आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष ने कथित तौर पर पहले ही झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी और पूरे सिस्टम को अपने पक्ष में कर लिया। उन्होंने कहा, 'ये बहुत प्रभावशाली लोग हैं। आपने देखा कि उन्हें अग्रिम जमानत भी मिल गई। जमानत की सुनवाई के दौरान खुद पुलिस ने अदालत में कहा कि ये लोग प्रभावशाली हैं। जब पुलिस खुद मान रही है कि आरोपी प्रभावशाली हैं, तो फिर एक आरोपी को खुला क्यों छोड़ा गया ताकि वह मामले को प्रभावित कर सके?'
ट्विशा के पिता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी पक्ष लगातार मीडिया में बयान देकर मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद भी इस तरह का व्यवहार 'आपराधिक मानसिकता' को दर्शाता है।
रिटायर्ड मेजर जनरल का समर्थन
रिटायर्ड मेजर जनरल श्याम श्रीवास्तव ने परिवार के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, 'इसे दहेज हत्या कहें, हत्या कहें या कुछ और, लेकिन सच सामने आना बाकी है। इस घटना को प्रभावशाली लोगों ने अंजाम दिया और उसके बाद पूरा प्रशासन, पुलिस विभाग और बाकी सिस्टम एक ही पक्ष में खड़ा नजर आया। ऐसा लग रहा है जैसे यहाँ कानून नाम की कोई चीज बची ही नहीं है।'
श्रीवास्तव ने अधिकारियों में जवाबदेही और कानून के डर की आवश्यकता पर जोर दिया और बताया कि परिजनों के समर्थन में बुधवार को मोटर रैली निकालने की योजना है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में महिला सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर बहस तेज है। गौरतलब है कि परिवार कई दिनों से न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है और अब सामाजिक समर्थन भी उनके साथ जुड़ने लगा है। आगे की जांच की दिशा और दूसरे पोस्टमॉर्टम की अनुमति मिलती है या नहीं, यह इस मामले का निर्णायक मोड़ होगा।