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ऊना दलित अत्याचार: 40 में से 35 आरोपी बरी, मायावती ने गुजरात सरकार से हाईकोर्ट में सख्त पैरवी की माँग की

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ऊना दलित अत्याचार: 40 में से 35 आरोपी बरी, मायावती ने गुजरात सरकार से हाईकोर्ट में सख्त पैरवी की माँग की

सारांश

ऊना दलित काण्ड के 40 में से 35 आरोपियों का बरी होना न्याय व्यवस्था पर गहरा सवाल है। मायावती ने खुद पीड़ितों से मिलने गई थीं — अब वे गुजरात सरकार से हाईकोर्ट में सख्त पैरवी और पीड़ित परिवारों को सरकारी खर्च पर कानूनी मदद की माँग कर रही हैं।

मुख्य बातें

BSP प्रमुख मायावती ने 7 अगस्त 2026 को ऊना दलित अत्याचार मामले में आरोपियों के बरी होने पर गहरी चिंता जताई।
2016 के ऊना काण्ड में 40 में से 35 आरोपियों को स्थानीय अदालत ने मार्च में बरी कर दिया।
पीड़ित दलित परिवार अब इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए वित्तीय और कानूनी संघर्ष कर रहे हैं।
मायावती ने गुजरात सरकार से माँग की कि वह हाईकोर्ट में प्रभावी पैरवी करे और पीड़ितों को सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराए।
मायावती ने बताया कि वे स्वयं 2016 में पीड़ितों से मिलने ऊना गई थीं और तब भी सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 7 अगस्त 2026 को गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में 2016 में हुए चर्चित दलित अत्याचार मामले में अधिकांश आरोपियों के बरी होने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने गुजरात सरकार से माँग की कि वह इस मामले में हाईकोर्ट में प्रभावी और सख्त पैरवी सुनिश्चित करे, ताकि पीड़ित दलित परिवारों को न्याय मिल सके।

मामले की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि 2016 में ऊना में दलितों पर हुए जघन्य अत्याचार काण्ड ने देशभर में व्यापक रोष और आक्रोश उत्पन्न किया था। इस मामले में 40 आरोपियों में से 35 को मार्च में स्थानीय अदालत ने बरी कर दिया — एक फैसला जिसने न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवार अब इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया में हैं।

मायावती की प्रतिक्रिया और व्यक्तिगत संदर्भ

मायावती ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि पीड़ित दलित परिवारों को हाईकोर्ट में न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए वित्तीय और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जो बहुजन समाज में भारी चिंता का कारण बनी है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वे स्वयं इस काण्ड के बाद पीड़ितों से मिलने ऊना गई थीं और तब राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

मायावती के अनुसार, देशभर में व्यापक रोष के बावजूद 35 आरोपियों का बरी होना दलितों के प्रति सरकारी उदासीनता और उनके हित व सुरक्षा के प्रति लापरवाही का परिणाम प्रतीत होता है।

गुजरात सरकार से माँगें

BSP प्रमुख ने गुजरात सरकार से आग्रह किया कि वह इस मामले की हाईकोर्ट में उचित पैरवी कर सभी दोषियों को कड़ी सजा दिलाए। उन्होंने यह भी माँग की कि राज्य सरकार पीड़ित परिवारों को सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराए। इस संदर्भ में उन्होंने उत्तर प्रदेश में BSP सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान गरीबों के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता का प्रावधान किया गया था।

न्याय व्यवस्था पर व्यापक असर

यह ऐसे समय में आया है जब दलित अधिकारों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की धीमी गति और अभियोजन पक्ष की कमजोर पैरवी को लेकर देशभर में सवाल उठते रहे हैं। ऊना काण्ड ने 2016 में दलित आंदोलन को नई ऊर्जा दी थी और यह मामला दलित न्याय की प्रतीकात्मक लड़ाई के रूप में देखा जाता है। आलोचकों का कहना है कि स्थानीय अदालत का यह फैसला पीड़ितों के लिए एक बड़ा झटका है और इससे अनुसूचित जाति समुदाय में न्यायपालिका के प्रति विश्वास को ठेस पहुँची है।

आगे की राह

पीड़ित परिवारों द्वारा हाईकोर्ट में अपील दायर करने की प्रक्रिया जारी है। मायावती ने स्पष्ट किया कि गुजरात सरकार के पास अभी भी इस गलती को सुधारने का अवसर है — बशर्ते वह हाईकोर्ट में सक्रिय और ईमानदार पैरवी करे। इस मामले का परिणाम न केवल पीड़ित परिवारों के लिए, बल्कि दलित अधिकारों की व्यापक लड़ाई के लिए भी निर्णायक साबित हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राज्य सरकार ने निचली अदालत में अभियोजन पक्ष की पैरवी इतनी कमजोर क्यों रहने दी। हाईकोर्ट अपील अब आखिरी उम्मीद है, लेकिन बिना मजबूत सरकारी इच्छाशक्ति के यह भी महज औपचारिकता बन सकती है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऊना दलित अत्याचार मामला क्या है?
यह 2016 में गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के ऊना में दलितों पर हुए जघन्य अत्याचार का मामला है, जिसने देशभर में व्यापक रोष उत्पन्न किया था। इस मामले में 40 आरोपियों पर मुकदमा चला, जिनमें से 35 को मार्च में स्थानीय अदालत ने बरी कर दिया।
मायावती ने इस मामले में क्या माँग की है?
BSP प्रमुख मायावती ने गुजरात सरकार से माँग की है कि वह हाईकोर्ट में इस मामले की सख्त और प्रभावी पैरवी करे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवारों को सरकारी खर्च पर वकील उपलब्ध कराया जाए।
स्थानीय अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में कैसे चुनौती दी जा रही है?
पीड़ित दलित परिवार 35 आरोपियों के बरी होने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया में हैं, लेकिन उन्हें वित्तीय और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मायावती के अनुसार, राज्य सरकार को इस प्रक्रिया में पीड़ितों की मदद करनी चाहिए।
मायावती का ऊना काण्ड से व्यक्तिगत संबंध क्या है?
मायावती ने बताया कि 2016 में काण्ड के बाद वे स्वयं पीड़ितों से मिलने ऊना गई थीं और सच्चाई का पता करने के बाद राज्य सरकार से सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की माँग की थी। इसलिए यह मामला उनके लिए व्यक्तिगत रूप से भी महत्वपूर्ण है।
BSP ने दलित कानूनी सहायता के लिए क्या उदाहरण दिया है?
मायावती ने उत्तर प्रदेश में BSP सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान गरीबों के लिए निःशुल्क कानूनी सहायता का कानूनी प्रावधान किया गया था। उन्होंने गुजरात सरकार से इसी तर्ज पर पीड़ित परिवारों की मदद करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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